Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home व्यापार

भारत के एक्सपोर्ट में ट्विस्‍ट, गिरते रुपये में बाजी पलटने का दम देख रही सरकार

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 1, 2026
in व्यापार
A A
Digital Rupee
23
SHARES
751
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्‍ली: कमजोर रुपये को अक्सर इकोनॉमिक स्‍ट्रेस यानी आर्थिक तनाव का संकेत माना जाता है। हालांकि, भारत के निर्यातकों के लिए यह अप्रत्याशित फायदे के तौर पर उभर सकता है। सरकार की ताजा आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई है। लेकिन, वित्त मंत्रालय ने आगाह किया है कि यह फायदा तभी मिलेगा जब ग्‍लोबल डिमांड मजबूत बनी रहे। साथ ही महंगाई को कंट्रोल में रखा जाए।

रुपये को लेकर दूसरा नजरिया

इन्हें भी पढ़े

EPFO

UAN भूल गए तो घबराइए मत, EPFO की इस सुविधा से तुरंत मिल जाएगा नंबर

July 23, 2026
pension

EPS पेंशन बढ़ोतरी पर आया अपडेट, सरकार ने संसद में बताई स्थिति

July 22, 2026
दवा उद्योग

ट्रंप के नए टैरिफ का भारतीय फार्मा कंपनियों पर सीमित असर, अमेरिका को दवाओं की आपूर्ति रहेगी जारी

July 22, 2026
crude oil

होर्मुज संकट : 60% बढ़ा भारत का क्रूड ऑयल आयात बिल, तेल-गैस पर भी बढ़ा खर्च

July 20, 2026
Load More

मई महीने की अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में आर्थिक मामलों के विभाग ने तर्क दिया कि रुपये की हालिया गिरावट को केवल करेंसी की कमजोरी के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय, उसने कहा कि कई सालों तक विनिमय दर के ज्‍यादा होने के बाद इस बदलाव ने भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘करेंसी की गिरावट को अंदरूनी कमजोरी के संकेत के तौर पर देखने की सोच समझ में आती है। लेकिन, इसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए।’

इसलिए दबाव में है रुपया

पिछले कुछ महीनों में भारतीय रुपया दबाव में आ गया है। इसके पीछे कई कारण हैं। इनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का लगातार बाहर जाना और पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव शामिल है।

समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारत की मुद्रा में लगभग 10% की गिरावट आई। पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद यह 4.9% और कमजोर हो गई। 26 मई तक यह 95.7 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गई।

सरकार का यह है तर्क

फिर भी सरकार का तर्क है कि ज्‍यादा महत्वपूर्ण पैमाना नॉमिनल एक्‍सचेंज रेट नहीं, बल्कि रियल इफेक्टिव एक्‍सचेंज रेट (REER) है। यह व्यापारिक साझेदारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा का ट्रेड-वेटेड और इनफ्लेशन-एडजस्‍टेड पैमाना है।

अप्रैल 2026 में भारत का REER 92.72 था। यह एक दशक से भी ज्‍यादा समय में सबसे निचला स्तर था। 100 के मानक स्तर से यह काफी नीचे था। रिपोर्ट में बताया गया कि REER नवंबर 2024 में कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर 108.03 पर पहुंच गया था। इससे हालिया सुधार से पहले वैश्विक बाजारों में भारतीय सामान कम प्रतिस्पर्धी हो गए थे।

समीक्षा में कहा गया है, ‘अब जब भारत का REER अपने लंबे समय के औसत से नीचे है तो भारतीय सामान और सेवाओं की कीमतें वास्तविक रूप से पिछले एक दशक में किसी भी समय की तुलना में ज्‍यादा प्रतिस्पर्धी हैं।’ सरकार इसे निर्यात के लिए एक संभावित बढ़ावा मानती है। खासकर ऐसे समय में जब भारत ग्‍लोबल मैन्‍युफैक्‍चरिंग और ट्रेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

कमजोर करेंसी को लेकर चेतावनी भी

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये में 1% की गिरावट से मध्यम अवधि में भारत के माल व्यापार (मर्चेंडाइज ट्रेड) संतुलन में 1.45% का सुधार हो सकता है।

हालांकि, समीक्षा में इस धारणा के प्रति भी आगाह किया गया है कि कमजोर करेंसी का मतलब अपने आप ही ज्‍यादा निर्यात होना है।

इसमें कहा गया है, ‘दूसरी शर्त ग्‍लोबल मांग है और शायद यह एक ज्‍यादा बड़ी बाधा है।’

रिपोर्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 के अनुभव की ओर इशारा किया।

तब रुपये में तेजी से गिरावट आई थी।

लेकिन, उसके बाद के सालों में निर्यात में कमी आई।

कारण है कि कमजोर ग्‍लोबल डिमांड ने सस्ती करेंसी से होने वाले लाभ को बेअसर कर दिया था।

गिरती कमोडिटी कीमतों ने भी इस पर पानी फेरा था।

इसमें आगे कहा गया है, ‘व्यापार अध्ययन लगातार यह पाते हैं कि निर्यात को बढ़ावा देने वाले फैक्‍टरों में एक्‍सचेंज रेट की तुलना में ग्‍लोबल डिमांड का पलड़ा भारी होता है।’

एक और चुनौती कच्चे तेल, उर्वरकों और पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर भारत की निर्भरता है। जहां निर्यातकों को आखिरकार कमजोर रुपये से लाभ हो सकता है। वहीं, आयात की लागत तुरंत बढ़ जाती है। इससे व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ता है।

महंगाई बढ़ी तो फायदा हो जाएगा कम

रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि अगर महंगाई बढ़ती है तो कच्चे तेल, LNG और खाद्य तेलों जैसी कमोडिटीज की ऊंची कीमतें प्रतिस्पर्धात्मकता से होने वाले फायदे के एक हिस्से को कम कर सकती हैं।

इसके बावजूद सरकार ने जोर देकर कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। 8 मई तक विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 697 अरब डॉलर था। यह लगभग 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह रिकॉर्ड 94.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इसके अलावा, भारत का समायोजन व्यापक आर्थिक मजबूती की स्थिति से हो रहा है।’

मूल रूप से रुपये में गिरावट ने निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता के उस स्तर को बहाल कर दिया है जो करेंसी के मजबूत होने के वर्षों के दौरान खो गया था। क्या यह मजबूत एक्‍सपोर्ट ग्रोथ में तब्दील होगा, यह विनिमय दर पर कम और ग्‍लोबल डिमांड, कमोडिटी कीमतों और घरेलू महंगाई की दिशा पर ज्‍यादा निर्भर करेगा।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Dr Jayanti Prasad Nautiyal honored with 'Sahitya Gaurav Samman'

‘साहित्य गौरव सम्मान’ से सम्मानित हुए प्रख्यात साहित्यकार डॉ जयंती प्रसाद नौटियाल

July 5, 2023
Emergency Movie

कंगना रनौत ने प्रियंका गांधी को दिया ‘इमरजेंसी’ देखने का न्योता, इंदिरा गांधी की पोती से मिला ये जवाब

January 10, 2025

BJP ने 2024 आम चुनाव के लिए छोड़ दिए चार ‘ब्रह्मास्त्र’

June 28, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • PM मोदी बोले- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले बचेंगे नहीं, बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
  • दिल्ली में जारी है ‘मेट्रो मंडे’ अभियान, रेखा गुप्ता सरकार सार्वजनिक परिवहन को दे रही बढ़ावा
  • बुलेट ट्रेन की रफ्तार को मिलेगी बिजली की ताकत, तैयार हो रहा नया सिस्टम

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.