नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंधों को नई उड़ान देने के लिए सोमवार को नई दिल्ली में एक दूसरी द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इस बैठक में समुद्री सुरक्षा, सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग, सह-विकास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
बैठक के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया की 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति और इंटीग्रेटेड इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम का स्वागत करते हुए कहा कि दोनों देशों के रक्षा संबंधों में विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, आज की चर्चा के दौरान, ‘मैं इस नीतिगत दस्तावेज और भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंधों में विकास की संभावनाओं पर आपके विचार जानने के लिए उत्सुक हूं।’
‘भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक रूप से एकजुट’
वहीं रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया पहले से कहीं अधिक रणनीतिक रूप से एकजुट हैं और दोनों देश समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम निश्चित रूप से समुद्री क्षेत्र में और अधिक काम कर रहे हैं और हम आज अपनी नियमित बैठक में इस बारे में बात करेंगे।’
गौरतलब है कि यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। दोनों देशों के बीच होने वाली यह वार्ता केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि भविष्य की रक्षा साझेदारी की दिशा तय करने वाली अहम कड़ी मानी जा रही है।
किन मुद्दों पर हो रही चर्चा
- रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस बैठक में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने, दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने, संयुक्त सैन्य अभ्यासों को नई गति देने तथा रक्षा उद्योग में सहयोग के अवसरों पर विस्तार से चर्चा हो रही है।
- खास तौर पर रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा, जिससे दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिल सके।
- क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी दोनों नेता विचार-विमर्श करेंगे।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मुक्त नौवहन सुनिश्चित करने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा इस संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
रिचर्ड मार्ल्स की यह यात्रा अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित पहले रक्षा मंत्रियों के संवाद के बाद हो रही है। इसे भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लगातार मजबूत होते स्वरूप का प्रमाण माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि भारत की मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत की सोच में ऑस्ट्रेलिया एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दे सकती है। वहीं भारत और अमेरिका के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।







