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Home गैजेट्स

इंटरनेट पर हर क्लिक छोड़ता है निशान, समय रहते ऐसे करें डिजिटल क्लीनअप

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 9, 2026
in गैजेट्स
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Internet
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नई दिल्ली। ईमेल, मैसेज, फोरम डिस्कशन, एप्स, वेबसाइट, न्यूजलेटर्स या स्ट्रीमिंग सर्विसेज के लिए साइनअप, इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट, लाइक्स, कमेंट, फोटो अपलोड करने, यहां तक कि आपकी सर्च हिस्ट्री और ब्राउजिंग की आदतें डिजिटल दुनिया में आपका फुटप्रिंट तैयार करती हैं या कहें कि आनलाइन गतिविधियों के जरिये आप अपनी हर आदत की एक निशानदेही बनाते चलते हैं।

यही कारण है कि वर्षों पहले आपने फेसबुक पर कोई फोटो अपलोड की थी या कोई शापिंग अकाउंट बनाकर भूल गए थे या किसी से बहस करते हुए वर्षों पहले आपने कोई असामान्य कमेंट किया था, वह सब डिजिटल फुटप्रिंट का हिस्सा बन चुका होता है।

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आज की कनेक्टेड दुनिया में डिजिटल पहचान भी वास्तविक दुनिया की हमारी साख की ही तरह है, लेकिन आभासी साख को लेकर बड़ी संख्या में लोग बेखबर ही रहते हैं। पहली बार आपसे परिचित होने वाला लगभग हर व्यक्ति, संस्था, कंपनी इसी साख के आधार पर आपके प्रति अपनी धारणा बना सकती है। यहां तक कि साइबर अपराधी भी डिजिटल दुनिया में आपकी मौजूदगी और बेतरतीबी के आधार पर ही आपको टारगेट करते हैं।

डिजिटल फुटप्रिंट पर नजर क्यों जरूरी

साख और सुरक्षा दोनों की ही दृष्टि से डिजिटल फुटप्रिंट की सफाई आवश्यक है, पर इसका मतलब इंटरनेट से गायब हो जाना नहीं है, बल्कि अपनी निजी जानकारियों, निजता को लेकर सतर्क होना है। यह तय करना जरूरी है कि आनलाइन जानकारी आपकी वर्तमान स्थिति के बारे में हो, न कि एक दशक पहले आप क्या थे, इस आधार पर कोई धारणा बना ले।

आनलाइन माध्यमों पर अपनी जानकारियों को अपडेट और सुरक्षित करते रहना जरूरी है। जैसे बेतरतीब होने पर सामान के खोने या चोरी होने का डर रहता है, उसी तरह आनलाइन लापरवाही आपको साइबर ठगी का शिकार बना सकती है।

पुराने अकाउंट, लीक हुआ डेटा और अनावश्यक एप्स से दूरी बना लेने में ही भलाई है। स्मार्ट व आटोमेटेड होते माहौल में अपनी डिजिटल लाइफ को व्यवस्थित करना सुरक्षा का सबसे आसान उपाय है।

‘स्प्राउट सोशल’ के मुताबिक दुनियाभर में 5.7 अरब इंटरनेट मीडिया यूजर्स हैं और एक औसत यूजर हर महीने कम से कम सात अकाउंट का इस्तेमाल करता है यानी वास्तविक दुनिया के सामानांतर एक अभासी दुनिया भी तैयार हो चुकी है, जहां आपकी नई जाब, किसी नए व्यक्ति से परिचय या किसी व्यावसायिक डील में भी इस साख का असर होना तय है। आज किसी व्यक्ति के बारे में जानना हो तो गूगल और इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म का लोग स्वाभाविक रुख कर लेते हैं।

दो तरह के होते हैं डिजिटल फुटप्रिंट

इंटरनेट पर आप जो डेटा खुद से साझा करते हैं उसे एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट कहते हैं, जैसे इंटरनेट मीडिया पोस्ट, फोटो, ब्लाग आर्टिकल, आनलाइन प्रोफाइल आदि। दूसरा, जो डेटा आपकी एक्टिविटी से कलेक्ट होता है, जिसे पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट कहा जाता है, जैसे ब्राउजिंग हिस्ट्री, एप परमिशन, लोकेशन डेटा , शापिंग आदतें और वेबसाइट कुकीज आदि। दोनों ही आनलाइन आइडेंटिटी का हिस्सा बनते हैं और वर्षों तक इनके दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।

आपके सोच से अधिक महत्वपूर्ण है डेटा

ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि मशहूर और सार्वजनिक हस्तियों को ही अपनी आनलाइन मौजूदगी के बारे में चिंता करनी चाहिए। जबकि यहां गंवाने के लिए हर किसी के पास कुछ न कुछ जरूर होता है। हमें समझना होगा कि इंटरनेट की याददाश्त बहुत जबरदस्त होती है।

यहां तक कि डिलीट किया गया कंटेंट भी आर्काइव और शेयर किया जा सकता है। इसका स्क्रीनशाट भी लिया जा सकता है। बरसों पहले किया गया कोई लापरवाही भरा पोस्ट अचानक फिर से सामने आ सकता है।

डिजिटल साख बनाए रखना क्यों आ‍वश्यक

निजता है जरूरी

कंपनियां विज्ञापनों को पर्सनलाइज करने, प्रोडक्ट्स की सिफारिश करने और ग्राहकों के व्यवहार का विश्लेषण करने के लिए बहुत सारा पर्सनल डेटा इकट्ठा करती हैं। इससे डेटा ब्रीच होने या इसके गलत इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ती है।

नियाक्ताओं की नजर

रिक्रूटर अक्सर जाब देने का फैसला करने से पहले उम्मीदवारों को आनलाइन सर्च करते हैं। पुरानी प्रोफाइल, आपत्तिजनक कमेंट या गुमराह करने वाली जानकारी से ऐसी छवि बन सकती है जो आपके मौजूदा व्यक्तित्व या प्रोफेशनलिज्म को सही ढंग से नहीं दिखाती हो।

साइबर अपराध की आशंका

अधिक पर्सनल जानकारी उपलब्ध होने से स्कैमर्स के लिए फिशिंग अटैक करना आसान हो जाता है। इसलिए जन्मदिन, पता, परिवार के सदस्यों और यात्रा की योजनाओं जैसी जानकारियों को साझा करने से आपके लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।

यहां हो सकते हैं खतरे

  • पब्लिक प्रोफाइल जिनमें पुरानी निजी जानकारी हो
  • पुराने इंटरनेट मीडिया अकाउंट, जिनका आप अब इस्तेमाल नहीं करते
  • कमजोर या दोबारा इस्तेमाल किए गए पासवर्ड
  • बिना जरूरत की परमिशन मांगने वाले एप्स
  • इस्तेमाल नहीं होने वाले आनलाइन शापिंग या गेमिंग अकाउंट
  • सभी को दिखने वाली निजी तस्वीरें
  • सर्च रिजल्ट में आपका फोन नंबर या पता दिखना।

कैसे करें डिजिटल फुटप्रिंट की सफाई

इनबाक्स करें व्यवस्थित: अक्सर इनबाक्स नोटिफिकेशन, रिमाइंडर, रिसीप्ट, न्यूजलेटर, टिकट, बैंक और क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट से भरा होता है। संभव है कि उसमें कुछ निजी संदेश हों, जिन्हें आप रखना चाहते हों और साथ ही कुछ स्पैम भी हों, जिन्हें आप हटाना चाहते हों।

इनबाक्स को मेल की साइज के हिसाब से शार्ट या फिल्टर करें, ताकि सबसे बड़े मैसेज, आमतौर पर वे जिनमें बहुत बड़ी फाइल अटैचमेंट होती हैं, वे सबसे ऊपर आ जाएं और आप उन्हें डिलीट कर सकें। इसी तरह पुराने और बेकार ईमेल या अधिक ईमेल भेजने वालों के बड़े बैच डिलीट करें। उन मेलिंग लिस्ट या न्यूजलेटर को अनसब्सक्राइब करें, जिन्हें आप नहीं पढ़ते हैं।

एप्स और सॉफ्टवेयर को अपडेट करें

फोन में हर एप का लेटेस्ट वर्जन ही होना चाहिए। इसके लिए एप स्टोर पर अपडेट्स चेक करते रहना चाहिए। यही बात फोन और कंप्यूटर के आपरेटिंग सिस्टम पर भी लागू होती है। सॉफ्टवेयर अपडेट्स और पैच चेक करते रहने सुरक्षा और परफार्मेंस दोनों में सुधार होता है।

एप्स चेक

जिन एप्स को इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें डिलीट कर देना चाहिए। अगर किसी एप के लिए पहले अकाउंट बनाना पड़ा था, तो लाग-इन करके उस अकाउंट को भी डिलीट कर देना चाहिए अन्यथा साझा की गई जानकारियां फाइल में बनी रहेगी और हैकर्स का खतरा भी।

हर इनएक्टिव अकाउंट स्कैमर्स के लिए एक खुले दरवाजे की तरह होता है। प्लेटफॉर्म समय-समय पर सिक्योरिटी और प्राइवेसी सेटिंग्स को अपडेट करने के साथ यह भी देखना चाहिए कि कौन-सी सेटिंग चालू है और कौन-सी बंद। साथ ही देखें कि कोई थर्ड-पार्टी एप, जैसे गेम, क्विज एप आपकी जानकारी का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं।

इंटरनेट मीडिया पर सतर्कता

फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन आदि इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर दो बातें जरूरी हैं, पहली आपकी कौन सी निजी जानकारी सार्वजनिक है और आपने एप्स और सर्विसेज के लिए क्या-क्या एक्सेस दे रखा है। अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग को चेक करना चाहिए।

इससे फिशिंग अटैक और आइडेंटिटी थेफ्ट जैसे खतरों से बचाव होता है। उन पोस्ट को चेक करें, जिनमें आपको टैग किया गया है, उसे हटा सकते हैं। आप किसे फालो कर रहे हैं और आपको कौन फालो कर रहा है, यह भी देखना जरूरी है।

थर्ड पार्टी सर्विसेज

अगर आपने फेसबुक या गूगल अकाउंट से किसी एप या सर्विस के लिए लागइन किया हुआ है तो रिव्यू करें और अनावश्यक थर्ड पार्टी एक्सेज को डिलीट कर दें। आप गूगल अकाउंट में ‘थर्ड पार्टी एप्स एंड सर्विसेज’ सेक्शन में जाकर इसे चेक और डिलीट कर सकते हैं।

पासकीज का इस्तेमाल

पासवर्ड के प्रयोग को लेकर अब अधिक सतर्क होने की जरूरत है। साथ ही मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन टर्नआन होने से अकाउंट को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। बेहतर होगा कि पासकीज को एनेबल करें। पारंपरिक पासवर्ड की तुलना में यह अधिक सुरक्षित है। पासकीज को फिंगरप्रिंट, फेस स्कैन या पिन से आथेंटिकेट करना होता है, जिससे स्कैम या एआइ आधारित हमलों से सुरक्षा मिलती है।

डिजिटल हाइजीन के लिए क्लीनअप टूल्स

मैकएफी जैसी कुछ साइबर सुरक्षा कंपनियां आनलाइन अकाउंट क्लीनअप टूल्स की सर्विस देती हैं ताकि आप डिजिटल हाइजीन को बेहतर बना सकें। इससे आप ईमेल से जुड़े अनजान अकाउंट्स, वेबसाइट आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे आप अपनी आनलाइन मौजूदगी को बेहतर ढंग से सुरक्षित कर पाएंगे।

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