नई दिल्ली। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन परेशान है, क्योंकि उसकी रफ्तार धीमी (China Economy Slow) पड़ रही है. अप्रैल-जून तिमाही में चीन अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट तीन सालों में सबसे धीमी रही, परेशानी की बात ये है कि ये स्लोडाउन ऐसे समय में है, जबकि चीनी निर्यात (China Export) में भारी बढ़ोतरी हुई है. चीन में इस अंतर के पीछे प्रॉपर्टी मार्केट में मंदी से लेकर बेरोजगारी तक तीन बड़ी वजह मानी जा सकती हैं.
इकोनॉमिक ग्रोथ के मामले में चीन भारत से काफी पीछे नजर आ रहा है. जहां चीन की जीडीपी ग्रोथ 4.3% रही है, तो भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में शानदार रही थी. बीते दिनों जारी आंकड़ों पर नजर डालें, India GDP Growth 7.8% दर्ज की गई और ये उम्मीद से बेहतर रही थी.
3 साल में सबसे धीमा ग्रोथ रेट
अप्रैल-जून तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था की विकास दर (China Economy Growth Rate) तीन वर्षों में सबसे धीमी रही, जो देश के बढ़ते निर्यात और घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानियों में बढ़ते अंतर को दर्शाती है. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों को देखें, तो चीन इकोनॉमी इस तिमाही में सालाना आधार पर 4.3% की रफ्तार से बढ़ी है, जो जनवरी-मार्च तिमाही की 5% ग्रोथ रेट से कम है. इसके साथ ही ये तमाम अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से भी कम है.
चीनी सामानों को जोरदार निर्यात
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि डैग्रन की ये धीमी रफ्तार जोरदार निर्यात के बाद देखने को मिल रही है. AI, क्लीन एनर्जी, प्रोडक्ट्स की ग्लोबल डिमांड के चलते इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और सेमीकंडक्टर के चीनी निर्यात में तेजी से वृद्धि हो रही है. आंकड़े देखें तो चिप, बैटरी और इलेक्ट्रिक व्हीकल की मजबूत मांग के चलते जून में निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 27% का इजाफा हुआ. इस दौरान चीन का व्यापार अधिशेष 125 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जो अब तक का दूसरा सबसे उच्च स्तर है. साल के पहले छह महीनों में निर्यात में 20% से अधिक की वृद्धि हुई है.
भले ही चीन दुनिया का सबसे बड़ा कारखाना (China World Factory) बना हुआ है, लेकिन देश की घरेलू इकोनॉमी लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति संकट, कमजोर उपभोक्ता खर्च और सुस्त रोजगार के बोझ तले दबी है. इससे साफ है कि निर्यात में तो तेजी है, लेकिन घरेलू स्तर पर डिमांड धीमी है.
एक्सपर्ट जता रहे चिंता
इस पूरे मामले में दिग्गज अर्थशास्त्रियों का कहना है कि निर्यात के ये प्रभावशाली आंकड़े देश के भीतर गहरी समस्याओं को छिपा रहे हैं. यूबीएस चाइना (UBS China) के चीफ इकोनॉमिस्ट यू सोंग का कहना है कि AI ग्रोथ वैश्विक है और चीन सिर्फ उन देशों में से एक है जो इससे फायदे में हैं. इसके बिना, चीन की अर्थव्यवस्था की स्थिति कहीं अधिक खराब होती.
पहला कारण: रियल एस्टेट संकट
चीन की इकोनॉमी की सुस्त रफ्तार के पीछे पहला कारण है, लंबे समय से जारी रियल एस्टेट संकट, इस सेक्टर में आई मंदी चीन के आर्थिक विकास में सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है. रिपोर्ट की मानें तो China Property Market में गिरावट शुरू होने के बाद से 1.4 करोड़ से अधिक निर्माण श्रमिकों ने अपनी नौकरियां खो दी हैं. कई परिवारों के घरों की कीमत भी गिरी है, जिससे वे खर्च करने में हिचकिचा रहे हैं. घर खरीदने के बजाय चीनी उपभोक्ता बचत पर फोकस कर रहे हैं.
दूसरा कारण: खर्च करने से कतराते लोग
US-ईरान संघर्ष ने चीन में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है. हालांकि, चीनी सरकार फ्यूल प्राइस कंट्रोल करती है, फिर भी ईंधन की कीमतें एक साल पहले की तुलना में काफी अधिक हैं, जिससे लोगों की यात्रा महंगी हुई है. सोशल मीडिया पर उपभोक्ता पैसे बचाने के सुझाव शेयर कर रहे हैं, तो लोग महंगे ब्रांडेड सामानों से दूर होकर सस्ते विकल्प चुनने पर जोर दे रहे हैं. जो तस्वीर सामने है, उससे पता चलता है कि चीन में लोगों के खर्च करने की क्षमता कम हुई है. कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में लंबे समय से कोई सुधार नहीं हुआ है.
तीसरा कारण: कम होते रोजगार
China Economy की रफ्तार पर ब्रेक लगाने में एक और बड़ा कारण बेरोजगारी के रूप में सामने हैं. जहां एक ओर AI, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी कंपनियां मजबूत डिमाडं से फायदे में हैं, तो वहीं इनसे बाहर के तमाम क्षेत्रों में कामगार पीछे छूटते रहे हैं. अर्थशास्त्री यूरेशिया ग्रुप के चीन निदेशक डैन वांग ने कहा है कि China AI Demand से आम लोगों को फायदा नहीं होता और वास्तव में संरचनात्मक बेरोजगारी और अल्प-रोजगार का कारण बनती है. प्रॉपर्टी मार्केट में मंदी, खर्च में कमी और रोजगार अनिश्चितता परिवारों पर दबाव डाल रही है.







