नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश से लौटने के बाद बुधवार शाम को गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की. इसी मीटिंग में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी शामिल रहे. इस मीटिंग से एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली जाकर गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. वहीं कुछ दिन पहले ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लखनऊ का दौरा किया था. तमाम मीटिंगों की कड़ियों को जोड़कर देखने पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. आइए बारी-बारी से उसे प्वाइंटवार समझते हैं.
मोदी-शाह की मीटिंग को लेकर यूपी के राजनीतिक गलियारों में क्या चर्चा?
इस वक्त राजनीतक रूप से देश में सबसे बड़ा मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव है. बीजेपी किसी भी कीमत पर यूपी में जीत की हैट्रिक लगाना चाहती है. वहीं अयोध्या के राम मंदिर में हुई चोरी और 2024 के लोकसभा चुनाव में आजमाए गए पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले की सफलता से उत्साहित समाजवादी पार्टी सत्ता के 10 साल के वनवास को खत्म करने के प्रयास में है. ऐसे में बीजेपी इस प्रयास में है कि वह किसी भी कीमत पर यूपी को जीते. ऐसे में हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और महासचिव बीएल संतोष से चुनाव तैयारियों की पड़ताल की हो.
लखनऊ के गलियारों में यह भी चर्चा है कि यूपी चुनाव को देखते हुए संगठन को लेकर कोई बड़ा बदलाव किया जा सकता है. हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम में कुछ लोगों को शामिल किया था. अब चर्चा है कि वह अखिलेश यादव के पीडीए को काटने के लिए जिला स्तर पर खुद जाकर फीडबैक लेंगे और उसके बाद जिलाध्यक्षों के बदलाव का फैसला लिया जा सकता है.
तीसरी चर्चा यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में फेरबदल करने वाले हैं. तो क्या यूपी चुनाव को देखते हुए इस राज्य से कुछ लोगों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है या मौजूदा मंत्रियों के पोर्टफोलियों में सुधार देखा जा सकता है.
चौथी चर्चा यह है कि क्या यूपी चुनाव को देखते हुए केंद्र से कुछ नेताओं की टीम उत्तर प्रदेश में भेजी जा सकती है. ताकि योगी आदित्यनाथ को प्रचार कार्यक्रम में मदद मिल सके. साथ ही राज्य टीम को एक मैसेज जाए कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह से उनके साथ है.
एक चर्चा यह भी है कि विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव चाहते हैं कि वह एनडीए और बीजेपी के कुछ बड़े चेहरों को तोड़कर अपने साथ ला पाएं. इसी संदर्भ में पिछले दिनों अखिलेश यादव ने कहा था कि वह जब चाहेंगे साक्षी महाराज को अपने साथ ले आएंगे. इसके अलावा पूर्व सांसद और बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह भी पार्टी लाइन से अलग जाकर बयान देते दिख रहे हैं. वहीं बीजेपी के कुछ नेता और एनडीए के घटकदल सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर लगातार दावा कर रहे हैं कि विधानभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की तर्ज पर बड़े स्तर पर समाजादी पार्टी के सांसद टूटने वाले हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि हो सकता है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इन मुद्दों पर भी बातचीत की हो.
मोदी-शाह और नवीन की मीटिंग को लेकर बिहार में क्या चर्चा?
बिहार में इस मीटिंग को लेकर पहली चर्चा यह है कि क्या बीजेपी यहां भी ऑपरेशन लोटस चला रही है. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक से पहले लोकसभा में आरजेडी के नेता अभय कुशवाहा ने सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात की. अभय की यह पिछले कुछ दिनों में दूसरी मुलाकात थी. चर्चा यह है कि क्या अभय कुशवाहा के नेतृत्व में आरजेडी के सांसद बगावत कर पाला बदलने वाले हैं. हाल ही में टीएमसी और शिवसेना प्रकरण के बाद बिहार में भी अटकलों का बाजार गरम है. आरजेडी के चार सांसद हैं, जिसमें एक तेजस्वी यादव की बड़ी बहन मीसा भारती भी हैं. बातें हो रही है कि पीएम, गृहमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के साथ मीटिंग में यह बात हुई हो कि अगर आरजेडी के सांसद टूटते हैं तो क्या उन्हें कैबिनेट विस्तार में कोई जगह दी जाए. क्योंकि चर्चा है कि टीएमसी से टूटने वाले कुछ सांसदों को भी मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है.
दूसरी चर्चा यह है कि बिहार पिछले कुछ दिनों से जिस तरह की आपराधिक घटनाएं हुईं हैं उससे बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की छवि को काफी नुकसान होता दिख रहा है. दूसरी तरफ जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव के बहाने लगातार सम्राट चौधरी के असली नाम, शिक्षा आदि को लेकर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं. ऐसे में चर्चा है कि क्या बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस पहलू पर भी कोई फैसला लेने पर विचार कर सकता है क्या.
बिहार में तीसरी चर्चा यह है कि क्या वहां भी संगठन स्तर पर कोई बदलाव दिख सकता है. राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार चल रही है. तो जातीय और सामाजिक समीकरण पर पकड़ बनाए रखने के लिए संगठन स्तर पर कोई बड़ा बदलाव हो.
बिहार में भी चौथी चर्चा यह है कि क्या पीएम मोदी अपनी कैबिनेट में फेरबदल करने जा रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो क्या बिहार से किसी नये चेहरे को मौका मिल सकता है या मौजूदा चेहरों में किसी की छुट्टी हो सकती है, या फिर उनके पोर्टफोलियो में बदलाव हो सकता है.
मोदी, शाह, नवीन और संतोष की मीटिंग को लेकर केंद्र स्तर पर क्या चर्चा?
बीजेपी के तीन बड़े नेताओं की प्रधानमंत्री मोदी के साथ मीटिंग को लेकर केंद्र स्तर पर भी कई बातें हो रही है. कहा जा रहा है कि पार्टी की संगठनात्मक टीम में इसी सप्ताह बड़ा बदलाव दिख सकता है. नई टीम पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का प्रभाव दिख सकता है. चर्चा है कि नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी तरजीह दी जा सकती है.
दूसरी चर्चा यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट से कई मंत्रियों को हटाकर संगठन में भेज सकते हैं. वहीं संगठन से उठाकर कई को कैबिनेट में लिया जा सकता है.
एक चर्चा यह भी है कि संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक दोबारा लाने से पहले पार्टी संगठन और सरकार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का फैसला ले सकती है. संगठन में युवा महिलाओं को आगे करने का फैसला लिए जाने की अटकलें हैं.
एक चर्चा यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तीनों नेताओं से पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर कोई बात की हो. क्योंकि पीएम मोदी 17 जुलाई को पंजाब जा रहे हैं. वहीं इस बार पंजाब में बीजेपी मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष की मीटिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में जो भी चर्चाएं चल रही हैं उसमें कौन सी सही होने वाली है यह तो अगले कुछ ही दिनों पता चल पाएगा. लेकिन एक बात तो तय है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की मीटिंग के बाद राजनीतिक स्तर पर कुछ बड़ा देखने को मिल सकता है.







