नई दिल्ली। त्योहारों से पहले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में ‘वॉर रूम’ की तैयारियों और कामकाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम सुधार करना जारी रखेंगे। वे आगे कहते हैं कि हम 1,000 से अधिक अतिरिक्त नियमित ट्रेनें चलाने वाले हैं।
वैष्णव ने क्या कहा?
इस दौरान ट्रेनों की देरी, नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव, माल ढुलाई और क्षमता विस्तार की दीर्घकालिक परियोजनाओं पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘अभी हम अत्यधिक दबाव (पीक कंजेशन) के दौर से गुजर रहे हैं। कोयले और अन्य सामानों की ढुलाई में भारी तेजी आई है। इससे निपटने के लिए, पिछले 10 वर्षों में 36,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल ट्रैक बिछाए गए हैं। नए ट्रैक बनाना और क्षमता बढ़ाना बहुत जरूरी है।’
अतिरिक्त ट्रेन चलाने पर क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, ‘यही एक स्थायी समाधान है। हमें और अधिक ट्रैक बनाने का काम जारी रखना होगा। यही कारण है कि प्रधानमंत्री अक्सर नई परियोजनाओं को मंजूरी देते रहते हैं। लगभग हर दूसरी या तीसरी कैबिनेट बैठक में। उदाहरण के लिए, हम अभी सात प्रमुख कॉरिडोर को ‘क्वाड्रपल’ (चार-लेन वाला) कर रहे हैं। इनमें दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को जोड़ने वाले रूट, साथ ही दिल्ली से चेन्नई, मुंबई से कोलकाता और दिल्ली से गुवाहाटी जैसे तिरछे (डायगोनल) कॉरिडोर शामिल हैं। एक बार यह चार-लेन का काम पूरा हो जाने पर, हम 1,000 से अधिक अतिरिक्त नियमित ट्रेनें चला सकेंगे। इससे वेटिंग लिस्ट और रिजर्वेशन की उपलब्धता से जुड़ा दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। हमारी लगातार कोशिश क्षमता विस्तार पर केंद्रित है।
ट्रैफिक पैटर्न को पहचाने के लिए क्या कर रही सरकार?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा, ‘हम सुधार करना जारी रखेंगे। लगातार सुधार के लिए प्रयास करना और चीजों को बेहतर बनाते रहना हमारी कार्यप्रणाली का हिस्सा है, जिसमें हम पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों से सीखते हैं। उदाहरण के लिए, टीम ने 10 वर्षों के ‘ओरिजिन-डेस्टिनेशन’ (शुरुआती और अंतिम स्थानों) के डेटा का विश्लेषण किया, ताकि पीक ट्रैफिक पैटर्न की पहचान की जा सके।
खासकर यह पता लगाया जा सके कि किन शुरुआती और अंतिम स्थानों पर यात्रियों की संख्या सबसे अधिक होती है। एक व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए, चेयरमैन और उनकी टीम (जिसमें MOWD और MTRS भी शामिल हैं) ने एक पूर्ण योजना तैयार की है। पिछले साल, ‘गोल्डन एरिया’ पहल को बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी; इससे कई यात्रियों को काफी सुविधा हुई, खासकर नई दिल्ली स्टेशन पर।’







