Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

कानून से नहीं रूकेगा दलबदल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 12, 2022
in विशेष
A A
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अजीत द्विवेदी

दलबदल को लेकर सबसे बुनियादी सवाल यह है कि यह कानूनी मामला है या राजनीतिक नैतिकता का मामला है? इस सवाल के जवाब से ही इस समस्या का हल निकलना है। दुर्भाग्य से भारत में दलबदल को पूरी तरह से कानूनी मामला बना दिया गया है, इसलिए यह समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है और यह भी स्थापित होता जा रहा है कि कानून के जरिए इसका समाधान नहीं निकल सकता है। वैसे भी भारत में जो चीज कानून के दायरे में आ जाती है वह नैतिकता से परे हो जाती है। कानून के दायरे में आते ही वह इस तरह उलझ जाती है कि उसे सुलझाना नामुमकिन हो जाता है। जैसे अभी दलबदल का मामला उलझा है। महाराष्ट्र के ताजा घटनाक्रम ने इससे जुड़े कई सवालों को फिर से उभार दिया है।

इन्हें भी पढ़े

Shivraj singh

भारत-अमेरिका ट्रेड डील भारतीय अर्थव्यवस्था को देगी नई ऊंचाइयां और गति : शिवराज सिंह

February 8, 2026
IES

इंडिया एनर्जी स्टैक (IES) टास्कफोर्स ने वर्जन 0.3 स्ट्रेटेजी और आर्किटेक्चर डॉक्यूमेंट्स जारी किए

February 7, 2026
pariksha pe charcha

इंटरनेट सस्ता है, लेकिन समय सबसे कीमती- परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी की छात्रों को सीख

February 6, 2026
upsc

‘Examination भी नहीं लिख पा रहे…’ UPSC नोटिफिकेशन में गलतियों की भरमार!

February 6, 2026
Load More

सबसे पहला और अहम सवाल तो यह है कि विधायकों की अयोग्यता का फैसला करने का अधिकार किसका है? संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे दलबदल कानून के नाम से भी जाना जाता है उसमें साफ कहा गया है कि विधायकों की अयोग्यता का फैसला स्पीकर करेगा और स्पीकर की गैरहाजिरी में डिप्टी स्पीकर करेगा। लेकिन अगर स्पीकर या डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लंबित है तो वह फैसला कर पाएगा या नहीं, इस सवाल का जवाब नहीं है। महाराष्ट्र के घटनाक्रम से यह सवाल उठा है क्योंकि शिव सेना के बागी विधायकों का साथ दे रहे दो निर्दलीय विधायकों ने महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया। इसके बाद बागी विधायकों ने डिप्टी स्पीकर की ओर से दिए गए अयोग्यता के नोटिस को इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी डिप्टी स्पीकर के फैसले को पलट कर बागी विधायकों को जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दे दिया। सो, एक सवाल यह भी है कि क्या अयोग्यता का फैसला होने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट स्पीकर या डिप्टी स्पीकर के फैसले में दखल दे सकता है? उम्मीद करनी चाहिए कि 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई होगी तो कोई स्पष्ट जवाब मिलेगा।

लेकिन यह तय है कि सुप्रीम कोर्ट का चाहे कोई भी फैसला हो या संविधान में लिखी गई कोई भी बात हो या संसद से बना हुआ कोई भी कानून हो वह दलबदल को नहीं रोक सकता है, अगर राजनीति में नैतिकता और शुचिता की बहाली नहीं होती है। नैतिकता और शुचिता का सवाल बहुत बड़ा है। आज के संदर्भ में देखें तो राजनीति में इनकी बहाली एक असंभव लक्ष्य है। लेकिन ज्यादा समय नहीं बीता, जब इसे राजनीति में बहुत सहज माना जाता था। जब कोई दलबदल कानून नहीं था तब भी नेता एक ही पार्टी में जीवन बीता देते थे। हेमवती नंदन बहुगुणा की मिसाल है कि जब 1981 में सर्वशक्तिशाली इंदिरा गांधी से उनके मतभेद हुए और उन्होंने कांग्रेस छोड़ी तो कोई कानून बाध्यता नहीं होने के बावजूद उन्होंने लोकसभा सीट से भी इस्तीफा दे दिया। वे उपचुनाव लड़े और इंदिरा व संजय गांधी के तमाम प्रयासों के बावजूद गढ़वाल की अपनी पारंपरिक सीट से जीते। कुछ दिन पहले की मिसाल बिहार के नेता दिग्विजय सिंह की है, जो जनता दल यू से अलग हुए तो राज्यसभा से इस्तीफा दिया और बांका लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीते। इसका मतलब है कि नैतिक बल दिखाने वाले नेताओं का जनता पहले भी सम्मान करती थी और आज भी करती है।

बहरहाल, सोचें कि अब ऐसा क्या बदल गया कि पहले दलबदल कानून नहीं होने के बावजूद नेता एक ही पार्टी में या एक ही विचारधारा के साथ जीवन बीता देते थे और अब कपड़े की तरह पार्टियां बदल रहे हैं? सबसे बड़ा बदलाव तो यह हुआ है कि राजनीति में विचारधारा का लोप हो गया है। थोड़े से अपवाद हैं लेकिन पार्टियों व नेताओं के पास विचारधारा नहीं बची है। दूसरा बदलाव यह हुआ है कि राजनीति समाजसेवा का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि सत्ता और धन हासिल करने का माध्यम बन गई है। यह असीम सत्ता, अकूत संपत्ति और विलासिता का जीवन हासिल करने का साधन बन गई है। इसलिए पार्टियां और नेता दोनों अपने आचरण में भ्रष्ट हुए हैं। हैरानी नहीं है कि सबसे ज्यादा भ्रष्ट वह हुआ या दलबदल का सबसे ज्यादा शिकार वह पार्टी हुई जो सबसे लंबे समय तक सत्ता में रही। जिसने सत्ता का सुख कम भोगा उसके यहां अब भी विचारधारा या नैतिकता कुछ बची हुई है।

इसलिए जब तक नैतिकता की पुनर्स्थापना नहीं होती है और विचारधारा का आग्रह मजबूत नहीं होता है तब तक सिर्फ कानून के दम पर दलबदल को नहीं रोका जा सकता है। पिछले कई अनुभवों से यह प्रमाणित हुआ है कि कानून से बचने का कोई न कोई रास्ता खोज लिया जाता है। दलबदल कानून में प्रावधान है कि अगर कोई सांसद या विधायक पार्टी के ह्विप के खिलाफ वोट करता है तो उसकी सदस्यता चली जाएगी लेकिन अगर दो-तिहाई सांसद या विधायक पार्टी ह्विप का उल्लंघन करके किसी दूसरी पार्टी के साथ चले जाते हैं तो उनके ऊपर दलबदल का कानून लागू नहीं होगा। दलबदल कानून से बचने का एक रास्ता यह है कि सांसद या विधायक अपनी सीट से इस्तीफा दे दे। इसके अलावा दलबदल कानून से बचने का एक रास्ता जोर-जबरदस्ती का है। जिसके हाथ में सत्ता होती है वह फैसला लंबित रखता है। जैसे तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों- शिशिर अधिकारी और सुनील मंडल भाजपा के साथ चले गए हैं लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी स्पीकर ने उनकी अयोग्यता पर फैसला नहीं किया है। इसी तरह भाजपा के विधायक मुकुल रॉय तृणमूल में चले गए हैं लेकिन विधानसभा के स्पीकर ने उनकी अयोग्यता पर फैसला नहीं किया है। इसके अलावा भी कई उलझे हुए और आड़े-तिरछे रास्ते हैं, जिनसे विधायक या सांसद दलबदल कानून से बचते रहे हैं।

कुछ लोगों की सलाह है कि यह कानून बना दिया जाए कि किसी पार्टी से जीतने वाला सांसद या विधायक अगर दलबदल करता है तो उसे अनिवार्य रूप से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लडऩा होगा। लेकिन क्या हो जाएगा? कर्नाटक और मध्य प्रदेश में यहीं तो हुआ। कांग्रेस से जीते विधायकों ने पार्टी छोड़ी, इस्तीफा दिया और सरकार गिर गई। बाद में वे भाजपा की टिकट से जीत कर विधानसभा में पहुंचे और मंत्री बने। एक सलाह यह है कि दलबदल करने वाले सांसद या विधायक पर कम से कम एक चुनाव की पाबंदी लगाई जाए। यानी अगर वह लोकसभा सदस्य है तो उसे उस लोकसभा में दोबारा चुनाव लडऩे की अनुमति नहीं दी जाए और विधायक है तो उस विधानसभा में नहीं लडऩे दिया जाए। लेकिन इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि आज भी नेता अगर किसी वजह से अयोग्य होते हैं तो अपने बेटे-बेटी, पत्नी या किसी दूसरे रिश्तेदार को चुनाव लड़ाते हैं।

तभी यह तय है कि जब तक राजनीतिक दलों और नेताओं की नैतिकता और आचरण की शुचिता बहाल नहीं होती है तब तक दलबदल नहीं रूकेगा। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि दलबदल करा कर अगर सत्ता मिलती है तो वे उसे चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करेंगे। जब तक नेताओं में यह भावना नहीं आती है और राजनीति में सत्ता को ही सब कुछ मानने की धारणा नहीं बदलती है तब तक कानून से कुछ नही होगा।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Dr. Lal Singh Tyagi

त्याग और तपस्या के प्रतीक डॉ. लाल सिंह त्यागी

January 21, 2026
Congress Working Committee

कांग्रेस की राह का कौन बना रोड़ा?

January 1, 2024
श्मशान और मरघट

श्मशान और मरघट की ज़मीनों का होता अंतिम संस्कार, जिम्मेदार मौन…?

September 21, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • सिंधु जल संधि पर ताले के बाद चेनाब पर क्‍या है भारत का प्‍लान?
  • माता वैष्णो देवी के आसपास भी दिखेगा ‘स्वर्ग’, मास्टर प्लान तैयार!
  • ग्रेटर नोएडा में चल रहा था धर्मांतरण का खेल, 4 गिरफ्तार

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.