उज्जैन (स्पेशल डेस्क)। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत शहर में चल रहे मार्ग चौड़ीकरण के बीच छत्रीचौक के समीप स्थित खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर विवाद अब आस्था, प्रशासन और विरासत के सवाल में बदलता जा रहा है। मंदिर का स्ट्रक्चर हटाए जाने के बाद भी प्रतिमा को स्थानांतरित नहीं किया जा सका। इसके बाद श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है और भक्त इसे हनुमानजी की इच्छा बताते हुए प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग कर रहे हैं। आइये इस पूरे मामले को एक्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।
हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने का अभी कोई प्रयास नहीं किया गया है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने इंटरनेट मीडिया पर प्रतिमा को जबरन हटाने की कोशिश से जुड़ी खबरों को भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि पहले विशेषज्ञ प्रतिमा की गहराई, आधार और संरचना की जांच करेंगे। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
मंदिर का स्ट्रक्चर हटा, प्रतिमा नहीं हिली
सिंहस्थ-2028 को देखते हुए कंठाल चौराहे से छत्रीचौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। प्रस्तावित मार्ग की जद में आ रहे धार्मिक स्थलों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना है। इसी क्रम में खड़े हनुमान मंदिर को भी दूसरी जगह ले जाने की तैयारी की गई है।
4 सितंबर को नगर निगम और प्रशासन की टीम ने मंदिर का स्ट्रक्चर हटा दिया था। योजना के अनुसार प्रतिमा को टंकी चौराहे पर बनाए गए नए मंदिर में स्थापित किया जाना है। हालांकि प्रतिमा का आधार अपेक्षा से अधिक गहराई तक होने के कारण उसे हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। फिलहाल प्रतिमा के ऊपर टेंट लगाकर दर्शन की व्यवस्था जारी है।
राजसी सवारी के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़
खड़े हनुमान मंदिर बाबा महाकाल की राजसी सवारी के मार्ग में आता है। 4 सितंबर की कार्रवाई के बाद 7 सितंबर को राजसी सवारी निकली। इसके बाद मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की भावनाएं और मुखर हो गईं। प्रतिमा के नहीं हट पाने को कई श्रद्धालुओं ने चमत्कार से जोड़ते हुए इंटरनेट मीडिया पर प्रचारित किया। इसके बाद यहां महाआरती और धार्मिक आयोजन शुरू हो गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। भक्तों की प्रमुख मांग है कि प्रतिमा को वर्तमान स्थान से हटाया नहीं जाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हिंदूवादी संगठनों के लोग भी मौके पर पहुंचे। प्रशासन अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही प्रतिमा के विस्थापन पर निर्णय लेने की बात कह रहा है।
आस्था के बाद सियासत भी शुरू
खड़े हनुमान की प्रतिमा का मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। बुधवार को कांग्रेस जिला अध्यक्ष महेश परमार के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शन किया। इस दौरान हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसी दिन शाम को श्रद्धालुओं की ओर से स्थल पर ‘हनुमान अंश’ फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इससे साफ है कि प्रतिमा को लेकर धार्मिक भावनाओं के साथ अब राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं।
170 साल पुराने मंदिर की प्रतिमा कितनी प्राचीन ?
खड़े हनुमान मंदिर का इतिहास करीब 170 वर्ष पुराना बताया जाता है और इसे 1857 के आसपास से जोड़ा जाता है। हालांकि मंदिर की उम्र और उसमें स्थापित प्रतिमा की प्राचीनता अलग-अलग विषय हैं। पुरातत्वविद् रमण सोलंकी के अनुसार प्रतिमा की शिल्प शैली परमारकालीन हो सकती है और इसे राजा भोज के समय का होने की संभावना भी जताई जा रही है। इस आधार पर प्रतिमा के करीब एक हजार वर्ष पुरानी होने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुरातात्विक और तकनीकी जांच के बाद ही प्रतिमा की वास्तविक प्राचीनता स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में प्राचीनता की पुष्टि होती है तो इसका महत्व धार्मिक होने के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी बढ़ जाएगा।
नींव में पुरानी निर्माण तकनीक की संभावना
प्रतिमा के नीचे पुराने समय की इंटरलॉकिंग तकनीक से बनी संरचना होने की संभावना भी जताई गई है। इस तरह की निर्माण पद्धति में पत्थरों और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को आपस में इस प्रकार जोड़ा जाता था कि भार और पकड़ के कारण पूरी संरचना मजबूत बनी रहे। फिलहाल यह केवल संभावना है। खुदाई और तकनीकी परीक्षण के बाद ही यह पता चलेगा कि प्रतिमा का आधार किस तकनीक से बनाया गया है और वह जमीन के कितने नीचे तक है।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट तय करेगी आगे का रास्ता
अब विशेषज्ञों की टीम प्रतिमा के भार, आधार, नींव, गहराई और आसपास की जमीन की स्थिति का परीक्षण करेगी। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि प्रतिमा को उठाकर दूसरी जगह ले जाने से उसकी संरचना को किसी तरह का नुकसान तो नहीं होगा।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य रूप से तीन विकल्प सामने आ सकते हैं—
सुरक्षित स्थानांतरण: यदि विशेषज्ञ प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना संभव मानते हैं तो तकनीकी प्रक्रिया के तहत इसे टंकी चौराहे पर नए मंदिर में स्थापित किया जा सकता है।
यथास्थान संरक्षण: यदि प्रतिमा को हटाना जोखिमपूर्ण पाया गया तो इसे वर्तमान स्थान पर ही सुरक्षित रखने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
सड़क के अलाइनमेंट में बदलाव: यदि प्रतिमा को हटाना तकनीकी रूप से संभव नहीं पाया जाता है तो सड़क की प्रस्तावित डिजाइन या अलाइनमेंट में बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
टंकी चौराहे पर बनाया गया है नया मंदिर
प्रशासन की योजना के अनुसार खड़े हनुमान की प्रतिमा को छत्रीचौक के समीप टंकी चौराहे पर स्थानांतरित किया जाना है। इसके लिए नया मंदिर भी तैयार किया जा चुका है। हालांकि श्रद्धालुओं का कहना है कि “वर्तमान स्थान पर प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर है, जबकि नए स्थान पर स्थापना की स्थिति में मुख उत्तर दिशा की ओर हो सकता है। इसे लेकर भी कुछ भक्तों में आपत्ति है। उनका कहना है कि प्रतिमा को वर्तमान स्वरूप और दिशा में ही सुरक्षित रखा जाना चाहिए।”
आस्था का सम्मान, तथ्यों का प्रमाण: प्रकाश मेहरा
इस पूरे मामले पर लेखक और पत्रकार प्रकाश मेहरा बोले “खड़े हनुमान के मामले में फैसला न दबाव में हो, न राजनीति में— फैसला आस्था के सम्मान और विशेषज्ञों की प्रमाणित जांच के आधार पर हो। विकास जरूरी है, लेकिन विरासत की कीमत पर नहीं।
विशेषज्ञों से प्रतिमा की तकनीकी जांच
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि “प्रतिमा को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से अभी कोई प्रयास नहीं किया गया है। इंटरनेट मीडिया पर चल रही कई खबरों को उन्होंने भ्रामक बताया। प्रशासन पहले विशेषज्ञों से प्रतिमा की तकनीकी जांच करवाएगा और रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।”
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या सड़क चौड़ीकरण के लिए खड़े हनुमान को स्थानांतरित किया जाएगा, या आस्था और संभावित ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सड़क का रास्ता बदला जाएगा? इसका जवाब विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।







