नई दिल्ली। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों के ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं. अब केवल फर्जी कॉल या ओटीपी मांगने तक ही साइबर ठग सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, डीपफेक वीडियो, फर्जी क्यूआर कोड, सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप्स के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.
अब सवाल है कि साइबर क्राइम से बचा कैसे जाए. इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं साइबर पीस फाउंडेशन से जुड़े साइबर एक्सपर्ट कैप्टन एससी जोशी से.
स्मार्ट फोन, जामताड़ा मॉडल और AI पर एक्सपर्ट की राय
साइबर एक्सपर्ट एससी जोशी का कहना है कि अगर आपके पास स्मार्ट फोन है और आप उसकी सिक्योरिटी फीचर्स से वाकिफ नहीं हैं तो आप अनजाने में साइबर अपराधियों को अपने मोबाइल को खंगालने का मौका दे रहे हैं. इससे आपका डाटा लीक हो सकता है. इसलिए मोबाइल खरीदते ही सबसे पहले सिक्योरिटी फीचर्स को जरूर एक्टिवेट कर लें.
जामताड़ा मॉडल के बारे में एक्सपर्ट का कहना है कि वहां के युवाओं ने अनैतिक रूप से आम लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाया. इससे राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की बदनामी हुई. वहां के ज्यादातर युवा नहीं के बराबर पढ़े लिखे थे. वैसे युवाओं को साइबर योद्धा बनाने की जरूरत है. ऐसे युवा समाज को साइबर ठगी से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
एक्सपर्ट मानते हैं कि आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के आने से साइबर अपराधियों की पकड़ मजबूत हुई है. वहीं दूसरी तरह यह भी कहते हैं कि AI में इतनी ताकत है जो आपको साइबर ठगी से बचाने में भूमिका निभा सकता है. इसके लिए AI टूल्स से वाकिफ होना जरूरी है. अगर कोई AI से फेक वीडियो या आवाज बनाकर आपको ठगी के लिए एप्रोच करता है तो आप रिस्पॉंड करने से पहले उसकी जांच जरूर कर लें. सरल भाषा में कहें तो आपको क्रॉस चेक सिस्टम को अपनाना होगा.
स्कूल और कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान की जरूरत
साइबर एक्सपर्ट कैप्टन एससी जोशी का कहना है कि इसके लिए सबसे पहले घरेलू स्तर पर बच्चों को यह बताना है कि मोबाइल के इस्तेमाल के वक्त किन-किन बातों का ख्याल रखना है. इसके बाद स्कूल और कॉलेज स्तर पर विशेष क्लास के संचालन की जरूरत है. अगर स्कूल स्तर पर लगातार अभियान चलेगा तो बच्चे साइबर अपराध के प्रति जागरूक होंगे और बड़े होकर देश-दुनिया के लिए असेट साबित होंगे.
सोशल मीडिया पर फोटो डालना साबित हो सकता है घातक
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि फिलहाल डिजिटल अरेस्ट का कांसेप्ट चलन में है. इसमें AI का इस्तेमाल कर वॉयल क्लोन किया जा रहा है. एक तस्वीर भी अगर आप सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं तो अपनी प्राइवेसी को चुनौती देते हैं. कहीं छुट्टी मनाने गये हैं तो सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करते हैं.
कोई फंक्शन हुआ नहीं कि व्हाट्सएप पर स्टेट्स अपडेट कर दिया जाता है. जबकि व्हाट्सएप अलर्ट करता है कि डाटा की जिम्मेदारी हमारी नहीं है. अगर कुछ होता है तो जिम्मेदार आप खुद होंगे. लिहाजा, प्राइवेसी पॉलिसी समझे बगैर लोग स्टेट्स अपडेट करते रहते हैं जो साइबर ठगों के लिए चारा का काम करता है.
दो मामलों में ज्यादा सावधानी की जरूरत
साइबर एक्सपर्ट कैप्टन एससी सिन्हा का कहना है कि साइबर अपराधियों की नजर मुख्य रूप से दो बातों पर होती है. एक तो वैसे लोग या संस्थान जिनके पास मौजूद सूचनाओं में दूसरों की दिलचस्पी हो. दूसरा है पैसा जो रसूखदार लोगों के पास होता है. ऐसे लोग ज्यादा टारगेट पर होते हैं. लिहाजा, दिखावा से बचें. घर खरीदते हैं, महंगी गाड़ी खरीदते हैं तो इसको सार्वजनिक करने से बचें.
इन 10 हथकंडों को अपना रहे हैं साइबर ठग
- सबसे पहले डीपफेक वॉयस और वीडियो कॉल का खतरा तेजी से बढ़ा है. साइबर अपराधी AI की मदद से किसी परिचित, अधिकारी या परिजन की आवाज और चेहरा बनाकर पैसे या गोपनीय जानकारी मांग सकते हैं. ऐसी स्थिति में किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति से अलग माध्यम से संपर्क कर पुष्टि करना जरूरी है.
- दूसरा बड़ा खतरा व्हाट्सएप अकाउंट टेकओवर का है. ठग ओटीपी या वेरिफिकेशन कोड हासिल कर अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं. इसलिए किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी या वेरिफिकेशन कोड साझा नहीं करना चाहिए.
- फर्जी सरकारी आदेश और सर्कुलर भी ठगी का नया तरीका बन चुके हैं. ई-मेल या मैसेज के जरिए नकली पत्र, नोटिफिकेशन और मीटिंग के निमंत्रण भेजे जाते हैं. ऐसे किसी भी दस्तावेज की संबंधित विभाग से पुष्टि करना आवश्यक है.
- सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर भी लोगों को भ्रमित किया जाता है. सार्वजनिक व्यक्तियों या परिचितों के नाम से बनाए गए नकली अकाउंट के जरिए पैसे मांगने या गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जाती है. संदिग्ध प्रोफाइल मिलने पर तुरंत उसकी शिकायत करनी चाहिए.
- इसके अलावा फिशिंग ई-मेल और मैसेज भी बड़ा खतरा हैं. बैंक, सरकारी एजेंसी या अन्य संस्थानों के नाम पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करने से पहले प्रेषक की पहचान की जांच करना जरूरी है.
- क्यूआर कोड और डिजिटल पेमेंट फ्रॉड भी तेजी से बढ़ रहे हैं. किसी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन करने से बैंकिंग जानकारी चोरी हो सकती है या उपयोगकर्ता फर्जी वेबसाइट पर पहुंच सकता है. केवल विश्वसनीय स्रोतों के क्यूआर कोड का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
- साइबर अपराधी फर्जी निजी सहायक, कार्यालय कर्मी या पार्टी कार्यकर्ता बनकर भी तत्काल भुगतान या गोपनीय दस्तावेज मांगते हैं. ऐसे किसी भी असामान्य अनुरोध की स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि करना जरूरी है.
- सिम स्वैप फ्रॉड के जरिए अपराधी डुप्लीकेट सिम हासिल कर ओटीपी प्राप्त कर लेते हैं और बैंक या सोशल मीडिया खातों तक पहुंच बना सकते हैं. यदि अचानक मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाए तो तुरंत टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करना चाहिए.
- पब्लिक वाई-फाई और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल भी जोखिम भरा हो सकता है. असुरक्षित नेटवर्क या चार्जिंग पोर्ट के जरिए निजी जानकारी चोरी की जा सकती है. इसलिए सुरक्षित नेटवर्क और अपने चार्जर का उपयोग करना बेहतर है.
- वहीं मोबाइल ऐप्स के जरिए डाटा चोरी भी एक गंभीर खतरा है. कई फर्जी ऐप अनावश्यक रूप से संपर्क सूची, फोटो, माइक्रोफोन और लोकेशन जैसी अनुमति मांगते हैं. केवल विश्वसनीय स्रोतों से ऐप डाउनलोड करें और समय-समय पर ऐप की परमिशन की समीक्षा करते रहें.
इन 10 उपायों से साइबर सुरक्षा संभव
- किसी भी लिंक, अटैचमेंट या QR कोड पर क्लिक करने से पहले उसकी पुष्टि करना. अनजान व्यक्ति या संदिग्ध स्रोत से आए संदेशों पर बिना जांच के प्रतिक्रिया देना जोखिम भरा हो सकता है.
- मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने तथा सभी जरूरी खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करने का है. इससे किसी के लिए आपके अकाउंट तक पहुंच बनाना काफी कठिन हो जाता है.
- मोबाइल फोन को PIN या बायोमेट्रिक लॉक से सुरक्षित रखने, समय-समय पर अपडेट करने और केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी गई है.
- यदि कोई व्यक्ति पैसे, गोपनीय जानकारी या किसी जरूरी काम के नाम पर जल्दबाजी में निर्णय लेने का दबाव बनाए तो पहले उसकी पुष्टि करें. जरूरत पड़ने पर अलग से फोन कर जानकारी की सत्यता जांचना बेहतर विकल्प है.
- सोशल मीडिया के उपयोग में भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. यात्रा की जानकारी, निजी विवरण, आधिकारिक दस्तावेज या संवेदनशील चर्चाएं सार्वजनिक मंच पर साझा करने से बचना चाहिए, क्योंकि साइबर अपराधी इन्हीं जानकारियों का दुरुपयोग कर सकते हैं.
- ‘Trust, But Verify’ यानी भरोसा करें, लेकिन पहले सत्यापन करें. फर्जी प्रोफाइल, क्लोन किए गए व्हाट्सएप अकाउंट और किसी अन्य की पहचान बनाकर ठगी करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसलिए किसी भी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना जरूरी है.
- आधिकारिक और गोपनीय दस्तावेज केवल सुरक्षित एवं अधिकृत माध्यमों से ही साझा किए जाने चाहिए. असुरक्षित प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील जानकारी भेजना खतरे को बढ़ा सकता है.
- सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर संवेदनशील कार्य जैसे बैंकिंग या गोपनीय जानकारी साझा करने से बचने की सलाह दी गई है. यदि जरूरी हो तो सुरक्षित कनेक्शन का ही उपयोग करें.
- यदि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत इंटरनेट कनेक्शन बंद करें, पासवर्ड बदलें और संबंधित एजेंसी को बिना देरी सूचना दें. समय पर कार्रवाई करने से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
- सबसे महत्वपूर्ण संदेश है कि साइबर सुरक्षा की शुरुआत जागरूकता से होती है. केवल तकनीक के भरोसे साइबर हमलों को नहीं रोका जा सकता. सतर्कता, सही जानकारी और सोच-समझकर लिया गया हर फैसला ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है.







