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रेगिस्तान का देश विदेशों से मंगा रहा बालू, तेल का पैसा क्यों बहा रहे अरब के शेख!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 15, 2026
in विश्व
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रेत
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नई दिल्ली। सऊदी अरब और यूएई जैसे रेगिस्तानी देश विदेशों से निर्माण योग्य रेत आयात कर रहे हैं. वजह यह है कि रेगिस्तान की रेत चिकनी और गोल होती है, जिससे मजबूत कंक्रीट नहीं बनता. बड़े मेगा प्रोजेक्ट्स और गगनचुंबी इमारतों के लिए खास किस्म की खुरदरी रेत चाहिए.

पहली नजर में यह बात अजीब लगती है कि जिन देशों में चारों तरफ रेगिस्तान ही रेगिस्तान है, वही देश विदेशों से रेत मंगा रहे हैं. लेकिन सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों में यही हो रहा है. ये देश ऑस्ट्रेलिया, चीन और यूरोप के कुछ हिस्सों से निर्माण में काम आने वाली खास किस्म की रेत आयात कर रहे हैं. सवाल उठता है, जब इनके पास इतनी रेत है तो बाहर से क्यों मंगानी पड़ रही है? दरअसल, सारी रेत एक जैसी नहीं होती.

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पहली नजर में यह बात अजीब लगती है कि जिन देशों में चारों तरफ रेगिस्तान ही रेगिस्तान है, वही देश विदेशों से रेत मंगा रहे हैं. लेकिन सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों में यही हो रहा है. ये देश ऑस्ट्रेलिया, चीन और यूरोप के कुछ हिस्सों से निर्माण में काम आने वाली खास किस्म की रेत आयात कर रहे हैं. सवाल उठता है, जब इनके पास इतनी रेत है तो बाहर से क्यों मंगानी पड़ रही है? दरअसल, सारी रेत एक जैसी नहीं होती.

अगर रेगिस्तान की रेत से कंक्रीट बनाया जाए तो वह उतना मजबूत नहीं होगा. बड़े-बड़े टावर, पुल, मेट्रो, एयरपोर्ट या स्मार्ट सिटी बनाने के लिए खास गुणवत्ता वाली रेत जरूरी होती है. यही वजह है कि सऊदी अरब और यूएई जैसे देश नदी, समुद्र या खदानों से निकली रेत विदेशों से खरीद रहे हैं.

कंक्रीट तीन चीजों से बनता है. सीमेंट, पानी और एग्रीगेट. एग्रीगेट में गिट्टी और रेत शामिल होती है. कंक्रीट के कुल वजन का बड़ा हिस्सा इसी एग्रीगेट का होता है, जिसमें रेत अहम भूमिका निभाती है. अगर रेत सही नहीं होगी तो पूरी इमारत की मजबूती पर असर पड़ेगा.

दुनिया भर में हर साल लगभग 50 अरब टन रेत का इस्तेमाल होता है. यह दुनिया में सबसे ज्यादा निकाला जाने वाला ठोस प्राकृतिक संसाधन है. लेकिन इसमें से बहुत कम हिस्सा ही निर्माण योग्य होता है.

टॉइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ‘विजन 2030’ के तहत बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बना रहा है. NEOM, द लाइन, रेड सी प्रोजेक्ट जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली कंक्रीट चाहिए. ऐसी कंक्रीट के लिए खास किस्म की रेत जरूरी है, जो रेगिस्तान में मौजूद नहीं है. पाम जुमेराह जैसे कृत्रिम द्वीप बनाने में करोड़ों क्यूबिक मीटर समुद्री रेत का इस्तेमाल हुआ. स्थानीय भंडार तेजी से खत्म होने लगे, इसलिए आयात जरूरी हो गया. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि दुनिया ‘रेत संकट’ की ओर बढ़ रही है.

ऑस्ट्रेलिया इस पूरी कहानी में एक अहम सप्लायर के रूप में उभरा है. ऑब्ज़र्वेटरी ऑफ इकोनॉमिक कॉम्प्लेक्सिटी (OEC) के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में ऑस्ट्रेलिया ने करीब 273 मिलियन डॉलर की रेत निर्यात की, जिससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेत निर्यातक बना. खरीदारों में सऊदी अरब भी शामिल है. 2023 में सऊदी अरब ने ऑस्ट्रेलिया से लगभग 140,000 डॉलर की प्राकृतिक निर्माण-ग्रेड रेत खरीदी. यह रकम भले बहुत बड़ी न लगे, लेकिन यह दिखाती है कि रेगिस्तान में रेत की भरमार होने के बावजूद बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए सऊदी अरब को ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों से खास किस्म की उच्च गुणवत्ता वाली रेत मंगानी पड़ रही है.

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