नई दिल्ली। बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान तक और सिंध से लेकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) तक. पाकिस्तान के हर कोने से बगावत की एक ही आवाज उठ रही है. जो देश कभी खुद को एक मजबूत इस्लामी राष्ट्र के तौर पर पेश करता था, आज वह जमीनी हकीकत का सामना कर रहा है, जहां उसकी सरकार, सेना और तमाम संसाधन सिर्फ एक प्रांत- पंजाब और एक शहर रावलपिंडी के नियंत्रण में सिमट कर रह गए हैं.
बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान तक, सिंध से लेकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) तक, इस वक्त पाकिस्तान के हर कोने से एक ही आवाज आ रही है विद्रोह की. जो देश अपने आप को एक मजबूत इस्लामिक राष्ट्र बताता था, आज उसकी जमीनी हकीकत ये है कि उसकी सत्ता, उसकी सेना और उसके सारे संसाधन सिर्फ एक प्रांत पंजाब और एक शहर रावलपिंडी के कब्जे में सिमट कर रह गए हैं.
बढ़ते असंतोष को देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान एक और बड़े राजनीतिक और भौगोलिक संकट की ओर तेजी से बढ़ रहा है और 6 टुकड़ों में बंटने की राह पर है. दरअसल, पाकिस्तान की राजनीति, सेना और ब्यूरोक्रेसी में दशकों से पंजाब का एकछत्र राज रहा है. देश की 50% से ज्यादा आबादी पंजाब में है, लेकिन आरोप है कि 80% से ज्यादा सैन्य अफसर, बड़े नौकरशाह और सत्ता के केंद्र इसी प्रांत से आते हैं.
GHQ ही पाकिस्तान की असली सरकार
रावलपिंडी में बैठा GHQ ही पाकिस्तान की असली सरकार है. प्रधानमंत्री और संसद सिर्फ चेहरे हैं. इस पंजाब-केंद्रित सत्ता ने बाकी प्रांतों को सिर्फ एक कॉलोनी की तरह इस्तेमाल किया है. उनके संसाधन लूटो और उन्हें गुलामी और बारूदी सुरंगों पर जीने के लिए छोड़ दो. यही केंद्रीकरण आज पाकिस्तान के टूटने की सबसे बड़ी वजह बन रहा है.
बात अब उन 6 प्रांतों की जो आजादी मांग रहे हैं.
- बलूचिस्तान: विद्रोह की सबसे बड़ी आग यहीं लगी है. बलूच लोग सालों से कह रहे हैं कि उनका गैस, सोना और ग्वादर पोर्ट पंजाब लूट रहा है. जबकि बलूच लोग भूख और गरीबी में जी रहे हैं. बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का हमला अब रोज की खबर बन गया है. ये सिर्फ विद्रोह नहीं, एक पूर्ण स्वतंत्रता आंदोलन है.
- खैबर पख्तूनख्वा: अफगानिस्तान सीमा से लगे इस प्रांत में TTP का कब्जा और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ गुस्सा चरम पर है. पख्तूनों का कहना है कि पंजाब की सेना ने उनके इलाके को आतंक के खिलाफ जंग के नाम पर जंग का मैदान बना दिया है.
- सिंध: सिंध में “सिंधुदेश” की मांग फिर तेज हो गई है. सिंध के लोग मानते हैं कि कराची से कमाया पैसा और सिंधु नदी का पानी सब पंजाब की तरफ मोड़ा जा रहा है. कराची में पानी और बिजली का संकट इसी सौतेले व्यवहार का नतीजा है.
- गिलगित-बाल्टिस्तान: पाकिस्तान ने इसे आज तक संवैधानिक दर्जा तक नहीं दिया. यहां के लोग न पाकिस्तानी हैं और न ही उन्हें कोई अधिकार मिलता है. जमीनें चीन को CPEC के नाम पर दी जा रही हैं और स्थानीय लोग बेरोजगार घूम रहे हैं.
- पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK): मुजफ्फराबाद से लेकर मीरपुर तक भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. PoK के लोग आटा, बिजली और अपने हक के लिए सड़कों पर हैं और सीधे इस्लामाबाद से आजादी की बात कर रहे हैं। वे खुद को गुलाम कहते हैं.
- पंजाब बनाम पंजाब: अब तो खुद पंजाब के अंदर भी दरार है. दक्षिणी पंजाब के लोग सरायकी प्रांत की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सारा विकास सिर्फ लाहौर और उत्तरी पंजाब तक ही सीमित है.
क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?
1971 में भी यही अहंकार था। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के लोगों का शोषण किया गया, उनकी भाषा और संसाधनों को लूटा गया और नतीजा हुआ कि पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट गया। आज वही कहानी 6 अलग-अलग प्रांतों में दोहराई जा रही है.
एक ऐसा देश जिसका कुल क्षेत्रफल तो बहुत बड़ा है, लेकिन जिसकी सत्ता सिर्फ एक प्रांत के हाथ में हो, वो देश ज्यादा दिन तक एक नहीं रह सकता. सवाल अब ये नहीं है कि क्या पाकिस्तान बंटेगा, सवाल ये है कि ये कब बंटेगा.







