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ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों से भारत की कैसे बढ़ी टेंशन

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 25, 2026
in विश्व
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iran
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तेहरान: ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों से भारत की नेबरहुड फर्स्ट की नीति मुश्किल में पड़ती दिख रही है। इस कारण भारत ईरान में हो रही घटनाओं को लेकर परेशान है। भारत को डर है कि अगर ईरान में तख्तापलट होता है तो उसका रणनीतिक दांवपेंच का दायरा काम हो सकता है। इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।

भारत का ईरान के रास्ते यूरोप, मध्य एशिया और अफगानिस्तान से जुड़ने का सपना भी टूट सकता है। वहीं, इससे पाकिस्तान और चीन की मौज हो सकती है। ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक आधिकारिक रूप से 5000 से ज्यादा लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, कई मानवाधिकार समूहों का दावा है कि यह आंकड़ा कहीं ज्यादा है।

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ईरानी प्रदर्शनकारियों की मांग क्या है

ईरानी प्रदर्शनकारी देश में इस्लामिक मौलवियों के शासन को खत्म करने की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि इस कारण ईरान पर हद से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं, जिसने आर्थिक हालात को खराब कर दिया है। पिछले हफ्ते, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए दखल देने की धमकी दी थी।

उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐलान किया था कि “मदद आ रही है।” हालांकि हाल के दिनों में अशांति कम हुई है, लेकिन खबरों के मुताबिक, भारी हथियारों से लैस हजारों की संख्या में सुरक्षा बलों ने पूरे देश में, खासकर तेहरान के ग्रैंड बाजार जैसे संवेदनशील जगहों पर गश्त और चेकपॉइंट लगा दिए हैं।

ईरान ने भारत की टेंशन कैसे बढ़ाई

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में चीन अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रोफेसर श्रीपर्णा पाठक ने कहा कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों के कारण भारत ईरान में चल रही अशांति पर “चुपचाप बेचैनी” से नजर रख रहा था।

उन्होंने कहा, “ईरान में सत्ता परिवर्तन से इस क्षेत्र में भारत के रणनीतिक दांव-पेंच का दायरा सिकुड़ सकता है, खासकर पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों के बीच।” पाठक ने कहा कि भारत मौजूदा ईरानी सरकार को पाकिस्तान के प्रभाव के खिलाफ एक “अनुमानित संतुलन” के रूप में देखता था, खासकर अफगानिस्तान में, जहां तेहरान ने चरमपंथी समूहों के खिलाफ दिल्ली के साथ गठबंधन किया था।

ईरान में अशांति से भारत को कैसे नुकसान

व्यापार के मोर्चे पर, ईरान में चाबहार बंदरगाह में भारत ने अरबों रुपये का निवेश किया है। यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है या फिर लंबे समय तक अस्थिरता जारी रहती है तो भारत का यह निवेश खतरे में पड़ सकता है।

इससे पश्चिम एशिया और मध्य एशिया में चीन और पाकिस्तान का प्रभाव भी बढ़ सकता है। इसके अलावा भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और सुरक्षा हितों को भी तगड़ा झटका लग सकता है। भारत मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के साथ कनेक्टिविटी का रास्ता भी खो सकता है। इसके अलावा भारत के इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर इनिशिएटिव पर भी खतरा मंडरा सकता है।

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