नई दिल्ली। भारत ने 2025 में अपनी सेना पर 92.1 अरब डॉलर खर्च किए। स्वीडन के थिंक टैंक Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की नई रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया में पांचवां सबसे अधिक सैन्य खर्च है। यह रकम 2024 की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है।
सोमवार को जारी रिपोर्ट में मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए गंभीर सैन्य गतिरोध का भी जिक्र किया गया है। SIPRI ने इसे ‘असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट’ बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के देशों ने 2025 में अपनी सेनाओं पर रिकॉर्ड 2.9 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए जो ग्लोबल इकोनॉमी के कुल उत्पादन का लगभग 2.5 प्रतिशत है।
यह लगातार 11वां वर्ष है जब वैश्विक सैन्य खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। SIPRI द्वारा रिकॉर्ड किया गया यह अब का सबसे बड़ा सैन्य व्यय है।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में यूनाइटेड स्टेट्स ने सबसे ज्यादा सैन्य खर्च किया। अमेरिका ने अपनी सेना पर 954 अरब डॉलर खर्च किए जो दुनिया के कुल सैन्य खर्च का लगभग एक-तिहाई है। हालांकि, यह 2024 की तुलना में 7.5 प्रतिशत कम था।
इसके बाद चीन ने 336 अरब डॉलर खर्च किए और सैन्य खर्च के मामले में यह दूसरे नंबर पर रहा। वहीं रूस 190 अरब डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा। चौथे स्थान पर जर्मनी और पांचवें स्थान पर भारत रहा।
SIPRI के अनुसार, दुनिया के 15 देशों ने मिलकर 2025 में कुल 2304 अरब डॉलर खर्च किए जो वैश्विक सैन्य खर्च का 80 प्रतिशत है। इनमें से कई देश गाज़ा और यूक्रेन में चल रहे युद्धों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हुए हैं।
भारत-पाकिस्तान तनाव का रिपोर्ट में जिक्र
SIPRI ने भारत-पाकिस्तान टकराव को 2025 के सबसे खतरनाक तनावपूर्ण घटनाक्रमों में से एक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान के कुछ हवाई और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया जिनमें से कुछ का संबंध परमाणु कार्यक्रम से माना जाता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ‘दोनों देशों ने तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाए।’
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह पहली बार था जब भारत और पाकिस्तान ने किसी सशस्त्र संघर्ष के दौरान खुले तौर पर साइबर हमलों का इस्तेमाल किया।
वर्ष 2025 की प्रमुख घटनाओं की समयरेखा में SIPRI ने दर्ज किया कि ‘7 से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार तीव्र गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई हुई।’
रिपोर्ट में कहा गया, ”मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट पैदा हुआ था।” साथ ही यह भी बताया गया कि दोनों देश पहली बार सशस्त्र संघर्ष में साइबर अभियानों को खुलकर शामिल कर रहे हैं।
भारत-पाकिस्तान का परमाणु जखीरा
SIPRI के अनुमान के अनुसार, जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार (न्यूक्लियर वॉरहेड) थे। वहीं पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार थे। माना जाता है कि भारत ने 2025 में अपने परमाणु भंडार में थोड़ा इजाफा किया और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को बनाने पर काम जारी रखा।
SIPRI ने कहा, ”भारत का आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब ऐसे लंबी दूरी के हथियार विकसित करने पर अधिक केंद्रित है जो चीन के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकें। हालांकि, भारत की रणनीतिक योजना में पाकिस्तान के साथ उसकी पुरानी प्रतिद्वंद्विता भी प्रमुख बनी हुई है।”
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान भी नए मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहा है और परमाणु सामग्री का उत्पादन बढ़ा रहा है। SIPRI ने कहा, ”2025 में पाकिस्तान ने नए परमाणु हथियार डिलीवरी सिस्टम को विकसित करना और विखंडनीय (फिसाइल) सामग्री का भंडार बढ़ाना जारी रखा जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दशक में उसका परमाणु हथियारों का भंडार और बड़ा हो सकता है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में दुनिया के नौ देशों- यूनाइटेड स्टेट्स, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल के पास कुल मिलाकर करीब 12,187 परमाणु हथियार थे।
हालांकि दुनिया में कुल परमाणु हथियारों की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है। SIPRI का कहना है कि इसका मुख्य कारण अमेरिका और रूस द्वारा पुराने और रिटायर्ड परमाणु हथियारों को हटाना है।
संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दुनिया के कई देश अब राष्ट्रीय शक्ति के साधन के रूप में परमाणु हथियारों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। यह दशकों से चल रहे परमाणु हथियारों की संख्या और भूमिका कम करने के प्रयासों के उलट है। साथ ही, गलत आकलन और तनाव बढ़ने के जोखिम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
सबसे बड़े हथियार खरीदारों में शामिल है भारत
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच भारत दुनिया के पांच सबसे बड़े हथियार आयातक देशों में शामिल रहा। भारत के अलावा यूक्रेन, सउदी अरब, कतर और पाकिस्तान भी इस सूची में शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन पांच देशों ने मिलकर 2021 से 2025 के दौरान दुनिया के आयात होने वाले कुल हथियार का 35 प्रतिशत हिस्सा खरीदा।







