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होर्मुज संकट : 60% बढ़ा भारत का क्रूड ऑयल आयात बिल, तेल-गैस पर भी बढ़ा खर्च

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 20, 2026
in विश्व, व्यापार
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crude oil
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नई दिल्ली। भारत का कच्चे तेल का आयात बिल मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेजी से बढ़ा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर (YoY) देश का क्रूड ऑयल आयात बिल 60% से अधिक बढ़ गया, जबकि आयात की मात्रा (वॉल्यूम) में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के आसपास सप्लाई बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी रही।

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यही रुझान एलएनजी (LNG) आयात और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी देखने को मिला, जहां वॉल्यूम घटा लेकिन ऊंची कीमतों के कारण कुल वैल्यू बढ़ गई।

कुल मिलाकर, देश का नेट ऑयल और गैस आयात पिछले साल के लेवल से 45% ज्यादा बढ़ गया, जो एनर्जी आयात पर निर्भर भारत पर पश्चिम एशिया संकट के बुरे आर्थिक असर को दिखाता है।

देश अपनी 88% से ज्यादा क्रूड ऑयल की ज़रूरत और नेचुरल गैस की लगभग आधी खपत को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है, जिसे LNG, या सुपर-चिल्ड गैस के रूप में आयात किया जाता है।

इम्पोर्टेड तेल और गैस पर निर्भर होने के बावजूद, भारत अपनी बड़ी तेल रिफाइनिंग कैपेसिटी की वजह से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का नेट एक्सपोर्टर है, जबकि यह लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) जैसे कुछ पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स भी इम्पोर्ट करता है।

भारत का लगभग 40% क्रूड ऑयल इम्पोर्ट, 60% LNG इम्पोर्ट और 90% LPG इम्पोर्ट इसी स्ट्रेट के ज़रिए पश्चिम एशिया से होता है। होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से फिजिकल सप्लाई की तंगी से जूझने के अलावा, इंटरनेशनल कीमतों में बढ़ोतरी ने भारत को बहुत ज्यादा रेट पर तेल और गैस इम्पोर्ट करने पर मजबूर किया, क्योंकि देश कीमतों के बजाय सप्लाई सिक्योरिटी को प्राथमिकता दे रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए MoU से भारत और ग्लोबल एनर्जी मार्केट को राहत मिली, लेकिन समझौते के पूरी तरह खत्म होने के बाद खाड़ी में फिर से शुरू हुआ टकराव एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से एनर्जी का फ्लो तीन हफ़्ते की छोटी रिकवरी के बाद फिर से गिर गया है।

भारत का तेल और गैस व्यापार का गणित

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के जारी लेटेस्ट प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, जून तिमाही में कच्चे तेल का आयात साल-दर-साल 61.2% बढ़कर 49.8 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि आयात वॉल्यूम 4.5% घटकर 59.8 मिलियन टन या लगभग 438 मिलियन बैरल रह गया।

इसका मतलब है कि जून तिमाही में आयात किए गए कच्चे तेल की औसत लैंडेड कीमत लगभग 113 डॉलर प्रति बैरल रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही में लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल थी। PPAC डेटा से पता चलता है कि अप्रैल-जून में आयात किए गए तेल पर भारत की निर्भरता साल-दर-साल आधार पर 89.1% थी।

एलएनजी आयात की बात करें तो, अप्रैल-जून में सप्लाई पिछले साल की इसी तिमाही के 8,396 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (mscm) से 8.6% घटकर 7,674 mscm रह गई, जबकि LNG आयात बिल लगभग 6% बढ़कर 3.6 बिलियन डॉलर हो गया।

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