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Home राष्ट्रीय

किन हालातों में छिन जाता है वोटिंग का अधिकार, जानें

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 25, 2024
in राष्ट्रीय
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नई दिल्ली। भारत में लोकतंत्र का त्योहार यानी चुनावी प्रक्रिया जोर-शोर से चल रही है. लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण की वोटिंग में लोगों की अच्छी खासी भागीदारी रही है. अब अगले चरण की वोटिंग 26 अप्रैल को होगी. भारत का संविधान सभी 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को वोट डालने का अधिकार देता है. हालांकि, विशेष स्थिति में किसी भारतीय नागरिक से यह अधिकार छीना जा सकता है.

भारत के चुनावों में वोट देने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को है. जो लोग विदेश में रहते हैं और उन्होंने भारतीय नागरिकता नहीं छोड़ी है, वो भी चुनावों में वोट डालकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं. हालांकि, इस अधिकार को पाने के लिए भी एक तय प्रोसेस को फाॅलो करना होता है.

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18 साल से बड़े हैं पर मतदाता सूची में नाम नहीं है, तो क्या वोट कर सकते हैं?

चुनावों में 18 साल या उससे बढ़े भारतीय नागरिकों को वोट करने का अधिकार है. लेकिन यह भी जरूरी है कि मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो. अगर कोई भारतीय नागरिक 18 साल से बढा है लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो वो मतदान नहीं कर सकता है. मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फाॅर्म 6 भरना होगा. अगर आप पहली बार वोट करने के लिए रजिस्टर कर रहे हैं तो फाॅर्म 6 भरकर अपने निर्वाचन क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को जमा करना होगा.

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(3) के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति एक ही वर्ग के एक निर्वाचन-क्षेत्र से एक से ज्यादा वोट नहीं देगा. उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति लोकसभा चुनावों में केवल एक निर्वाचन क्षेत्र से ही वोट कर सकता है. अगर कोई व्यक्ति एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्र में वोट करता है, तो उसके द्वारा किए गए सभी वोट खारिज हो जाएंगे.

कभी-कभार गलती से एक शख्स का नाम एक निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दो बार आ जाता है. ऐसी स्थिति में वोटिंग के अधिकार को लेकर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(4) में जिक्र है. इसके मुताबिक, अगर कोई वोटर एक ही निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में एक से ज्यादा बार वोट करता है, तो उस शख्स का एक भी वोट गिना नहीं जाता. भले ही उसका नाम मतदाता सूची में दो बार आ गया हो, लेकिन वो एक चुनाव में एक से ज्यादा बार मतदान नहीं कर सकता.

जेल में बंद कारावास की सजा काट रहे कैदियों के वोटिंग अधिकार?

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(5) कहती है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेगा यदि वह कारावास की सजा के तहत जेल में बंद है या पुलिस की कानूनी हिरासत में है.

जो कोई मानसिक रूप से विकलांग हैं और जिन्हें न्यायालय से मानसिक रूप से विकलांग घोषित कर दिया गया है, वो मतदाता सूची में अपना नामांकन नहीं करवा सकते और उन्हें मतदाता पहचान पत्र जारी नहीं किया जाता है. इस तरह ये लोग भी वोट नहीं कर सकते.

इन धारा में अयोग्य साबित होने वाले नहीं कर सकते वोट

रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट, 1950 की धारा 62(2) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव में मतदान नहीं करेगा यदि वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के तहत अयोग्य पाया गया है.

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 में मतदाता सूची में पंजीकरण कराने की योग्यता के बारे में बताया गया है. इसके तहत कोई भी गैर-भारतीय है या जो मानसिक रूप से विकलांग हैं और जिन्हें न्यायालय ने भी ऐसा घोषित कर दिया है, वो मतदाता सूची में अपना नामांकन नहीं करवा सकते. इसके अलावा ऐसे लोग भी मतदाता सूची में अपना नामांकन नहीं करवा सकते जो फिलहाल चुनाव के संबंध में भ्रष्ट आचरण और अन्य अपराधों से संबंधित किसी भी कानून के प्रावधानों के तहत वोटिंग करने से अयोग्य घोषित किया गया है.

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