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Home राष्ट्रीय

‘मिशन शक्ति’: जानिए क्यों पड़ी भारत को इस महाहथियार की जरूरत?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 27, 2024
in राष्ट्रीय, विश्व
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नई दिल्ली। 27 मार्च 2019 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को बताया कि अब भारत अंतरिक्ष में भी अपने दुश्मनों पर हमला कर सकता है. अंतरिक्ष से होने वाले हमलों से खुद को बचा सकता है. उसने ऐसी मिसाइल विकसित की है, जो अंतरिक्ष में दुश्मन सैटेलाइट या हथियार को मार गिरा सकती है. तब दुनिया हैरान रह गई थी.

इस ऑपरेशन का नाम था ‘मिशन शक्ति’. इस मिशन को पूरा करना इतना आसान नहीं था. दो साल से तैयारी चल रही थी. लॉन्चिंग से छह महीने पहले तक मिशन मोड पर काम चल रहा था. यानी इन छह महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट पर नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल से संपर्क में थे.

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डोभाल हर कदम हर डेवलपमेंट की जानकारी पीएम मोदी को दे रहे थे. यह प्रोजेक्ट इतनी शांति से पूरा किया गया कि पड़ोसी मुल्कों को खबर ही नहीं लगी. पता तब चला जब भारत में बनी स्वदेशी ASAT सैटेलाइट ने अंतरिक्ष में 350 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद पुराने भारतीय बेकार सैटेलाइट को निशाना बनाया.

मिसाइल ने टारगेट को सीधा हिट किया. जिसे काइनेटिक किल कहते हैं. यह मिसाइल धरती की निचली कक्षा यानी लोअर अर्थ ऑर्बिट में निशाना लगा सकती है. यह उसके ऊपर भी जा सकती है. लेकिन 2019 का परीक्षण सिर्फ निचली कक्षा तक के लिए था. क्योंकि ज्यादातर सैटेलाइट वहीं रहते हैं.

भारत के पास कौन सा ASAT हथियार है 
भारत के पास एंटी-सैटेलाइट मिसाइल के लिए पृथ्वी एयर डिफेंस (पैड) सिस्टम है. यह पूरी तरह से पृथ्वी मिसाइल से नहीं मिलता. लेकिन कुछ तकनीक ली गई है. इसे प्रद्युम्न बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर भी कहते हैं. यह एक्सो-एटमॉसफियरिक (पृथ्वी के वातावरण से बाहर) और एंडो-एटमॉसफियरिक  (पृथ्वी के वातावरण से अंदर) के टारगेट पर हमला करने में सक्षम हैं.

हमारे वैज्ञानिकों ने पुराने मिसाइल सिस्टम को अपग्रेड किया है. उसमें नए एलीमेंट जोड़े हैं. यानी पहले से मौजूद पैड सिस्टम को अपग्रेड कर तीन स्टेज वाला इंटरसेप्टर मिसाइल बनाया गया. फिर मिशन शक्ति के परीक्षण में उसी का इस्तेमाल किया गया. भारतीय ASAT मिसाइल की रेंज 2000 किमी है. यह 1470 से 6126 km/hr की रफ्तार से सैटेलाइट की तरफ बढ़ती है. हालांकि, बाद में इसे अपग्रेड कर ज्यादा ताकतवर और घातक बनाया जा सकता है.

क्या होते हैं एंटी-सैटेलाइट हथियार?
ऐसे प्रक्षेपास्त्र यानी मिसाइल या रॉकेट जो तेज गति से जाकर अंतरिक्ष में धरती के चारों तरफ चक्कर लगा रहे दुश्मन देश के सैटेलाइट को मार गिराए. उसे एंटी-सैटेलाइट हथियार (ASATs Weapons) कहते हैं.

कितने प्रकार के होते हैं एंटी-सैटेलाइट हथियार?

ASATs को प्रमुख तौर पर दो तरह से बांटा जा सकता है. एक वो जो ताकतवर तरीके से हमला करते हैं. दूसरे वो जो नहीं करते. ASAT की काइनेटिक ऊर्जा का फायदा उठाकर उसे किसी सैटेलाइट से टकरा दिया जाए तो भी सैटेलाइट खत्म हो जाएगी.

दूसरे होते हैं नॉन-काइनेटिक हथियार. यानी इसमें किसी तरह के मिसाइल, रॉकेट या ड्रोन का उपयोग नहीं करते, बल्कि साइबर अटैक किया जाता है. सैटेलाइट्स को लेजर के जरिए बेकार कर दिया जाता है. ऐसे हमले हवा, धरती की निचली कक्षा या फिर जमीन से भी किया जा सकता है.

कौन-कौन से देश है इस रेस में शामिल?
चार देशों ने अब तक अपने पुराने सैटेलाइट्स को मार गिराने के लिए अपनी मिसाइलों का उपयोग किया है. ये है- भारत, अमेरिका, रूस और चीन. लेकिन बाद में अमेरिका और रूस ने आपस में यह तय किया कि वो ASATs को खत्म करेंगे. ताकि परमाणु हथियारों के जंग से राहत मिल सके.

रूस ने जब अपने पुराने सैटेलाइट्स को उड़ाया तब अमेरिका ने मिसाइलों से सैटेलाइट्स को उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया. क्योंकि इससे निकलने वाला कचरा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (International Space Station) के लिए खतरनाक साबित होता है. एक बार तो एस्ट्रोनॉट्स को एस्केप पैड्स में जाकर बैठना पड़ा था.

क्या फायदा होता एंटी-सैटेलाइट हथियारों का?
दुश्मन देश एकदूसरे के सैटेलाइट्स को मार गिराने के लिए एंटी-सैटेलाइट हथियार बना चुके हैं. सैटेलाइट्स को मार गिराने का मतलब है संचार, नेविगेशन, निगरानी समेत कई सुविधाओं का बंद होना

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