नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के लाखों यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यह बदलाव भले ही पर्दे के पीछे हो रहा है, लेकिन इसका असर यात्रियों को टिकट बुक करते समय साफ तौर पर दिखाई दे सकता है। भारतीय रेलवे करीब 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) को नए और आधुनिक सिस्टम से बदल रहा है।
नए सिस्टम को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यह एक साथ बड़ी संख्या में टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सके। इसके अलावा टिकट और ट्रेन से जुड़ी जानकारी जल्दी मिल सकेगी और ऑनलाइन टिकट बुक करना भी आसान होगा।
यह बदलाव कई चरणों में धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। रेलवे की टिकट बुकिंग वेबसाइट आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट भी इसी बड़े बदलाव का हिस्सा है। यह अपग्रेड ऐसे समय में किया जा रहा है, जब ज्यादातर यात्री रिजर्व ट्रेन टिकट ऑनलाइन ही बुक कर रहे हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 से जून 2026 के बीच पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम के जरिए कुल 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी कुल रिजर्व टिकटों में करीब 89 फीसदी बुकिंग ऑनलाइन हुई।
PRS क्या है और रेलवे इसे क्यों बदल रहा है?
पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम यानी पीआरएस भारतीय रेलवे का कंप्यूटर आधारित सिस्टम है। इसी के जरिए रिजर्व ट्रेन टिकटों से जुड़े ज्यादातर काम किए जाते हैं। इस सिस्टम की मदद से टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन, सीट और बर्थ का आवंटन, वेटिंग लिस्ट, आरएसी की स्थिति, रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने और यात्रियों को ट्रेन से जुड़ी जानकारी देने जैसे काम होते हैं।
पीआरएस की शुरुआत 1986 में हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे इसे देशभर के रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया। आगे चलकर ऑनलाइन टिकट बुकिंग की व्यवस्था भी इसी सिस्टम पर काफी हद तक निर्भर हो गई। 2002 में इंटरनेट के जरिए रेलवे टिकट बुक करने की सुविधा शुरू हुई। इसके बाद समय-समय पर सिस्टम में कई बदलाव और तकनीकी सुधार किए गए। इन अपग्रेड की मदद से रेलवे बढ़ती ऑनलाइन टिकट बुकिंग की मांग को संभालता रहा। हालांकि, करीब 40 साल पुराने इस सिस्टम पर अब टिकट बुकिंग और यात्रियों की बढ़ती संख्या का दबाव काफी बढ़ गया है। इसी वजह से रेलवे इसे आधुनिक तकनीक वाले नए सिस्टम से बदलने की तैयारी कर रहा है।
नया पीआरएस सिस्टम कितनी ज्यादा बुकिंग संभाल सकेगा?
मौजूदा रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम यानी पीआरएस एक मिनट में करीब 32,000 टिकटों की बुकिंग संभाल सकता है। नए अपग्रेड किए गए पीआरएस को इससे कहीं ज्यादा क्षमता के साथ तैयार किया जा रहा है। यह सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकटों की बुकिंग प्रोसेस कर सकेगा। यानी नए सिस्टम की टिकट बुकिंग क्षमता मौजूदा सिस्टम के मुकाबले करीब पांच गुना ज्यादा होगी। इससे खासकर त्योहारों, छुट्टियों और तत्काल टिकट की बुकिंग के दौरान सिस्टम पर बढ़ने वाले दबाव को संभालने में मदद मिलेगी।
सिर्फ टिकट बुकिंग ही नहीं, बल्कि यात्रियों की पूछताछ की क्षमता भी काफी बढ़ाई जाएगी। मौजूदा सिस्टम एक मिनट में करीब 4 लाख पूछताछ संभाल सकता है। नए सिस्टम में यह क्षमता बढ़कर 40 लाख से ज्यादा पूछताछ प्रति मिनट हो सकती है। इसमें पीएनआर स्टेटस, सीट की उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट और आरएसी की स्थिति जैसी जानकारी के लिए की जाने वाली खोज और पूछताछ शामिल है।
आईआरसीटीसी पर यात्रियों को क्या बदलाव दिखेगा?
नए सिस्टम के आने का मतलब यह नहीं है कि यात्रियों को टिकट बुक करने का कोई बिल्कुल नया तरीका सीखना पड़ेगा। टिकट बुकिंग की मौजूदा प्रक्रिया काफी हद तक पहले जैसी ही रहेगी। इस अपग्रेड का मुख्य उद्देश्य टिकट बुकिंग को तेज और आसान बनाना है। साथ ही, एक साथ बड़ी संख्या में लोग टिकट बुक करें तो सिस्टम उस बढ़ते ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभाल सकेगा। इससे वेबसाइट और बुकिंग सिस्टम पर अचानक बढ़ने वाले दबाव के दौरान यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है।
नई IRCTC वेबसाइट में क्या बदला?
रेलवे की नई आईआरसीटीसी बीटा वेबसाइट जुलाई में शुरू की गई थी। इसे यात्रियों के लिए ज्यादा आसान और तेज बनाने की कोशिश की गई है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, वेबसाइट में अब तक चार बड़े बदलाव किए जा चुके हैं।
- कम कैप्चा और कम रुकावटें – नई वेबसाइट पर बार-बार आने वाले अनावश्यक कैप्चा, पॉप-अप, चमकते ग्राफिक्स और दूसरी ध्यान भटकाने वाली चीजों को कम किया गया है। इससे टिकट बुक करते समय यात्रियों को कम परेशानी होगी।
- सभी क्लास की सीटों की जानकारी आसानी से – अब यात्री एक ही जगह पर अलग-अलग क्लास में उपलब्ध सीटों की जानकारी ज्यादा आसानी से देख सकते हैं। इससे अपनी जरूरत के हिसाब से सीट या क्लास चुनना आसान होगा।
- टिकट बुकिंग की प्रक्रिया हुई छोटी – टिकट बुक करने के लिए जरूरी स्टेप्स की संख्या कम की गई है। इससे बुकिंग पूरी करने में पहले के मुकाबले कम समय लग सकता है।
तत्काल टिकट बुकिंग हो सकती है और तेज
रेलवे के नए बैकएंड सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा तत्काल टिकट की बुकिंग के दौरान देखने को मिल सकता है। तत्काल बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं। ऐसे समय में वेबसाइट पर काफी ज्यादा ट्रैफिक आ जाता है। नए पीआरएस को इसी तरह अचानक बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ सामान्य समय में ज्यादा टिकट बुक करना नहीं, बल्कि तत्काल जैसी पीक बुकिंग के दौरान एक साथ आने वाली लाखों रिक्वेस्ट को बेहतर तरीके से संभालना है।
इस बदलाव का असर अब दिखने भी लगा है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित आईआरसीटीसी के आंकड़ों के मुताबिक, 15 जुलाई को नई बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद जुलाई के पहले और दूसरे हिस्से की तुलना में तत्काल बुकिंग की रफ्तार में सुधार हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, तत्काल बुकिंग शुरू होने के पहले 3 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई।
वहीं, 5 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3 फीसदी और 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि नए सिस्टम और वेबसाइट के अपग्रेड से खासकर तत्काल बुकिंग के समय यात्रियों को फायदा मिल सकता है।
इन बदलावों का सबसे ज्यादा फायदा उन यात्रियों को मिल सकता है जो त्योहारों, छुट्टियों या ज्यादा मांग वाले समय में टिकट बुक करते हैं। ऐसे समय में टिकटों की मांग बहुत ज्यादा होती है और हर कुछ सेकंड महत्वपूर्ण हो जाते हैं।







