नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए तैयार है, लेकिन उसी आधार पर जिस पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पिछले साल अलास्का में हुई बैठक के दौरान चर्चा हुई थी। पुतिन के मुताबिक, उन समझौतों को अब यूक्रेन को भी स्वीकार करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है और अभी तक शांति की कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही है।
अलास्का में हुई थी ट्रंप और पुतिन की अहम मुलाकात
15 अगस्त को अमेरिका के अलास्का राज्य के एंकरेज (Anchorage) शहर में डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच एक हाई-प्रोफाइल बैठक हुई थी। इस बैठक की काफी आलोचना भी हुई थी क्योंकि कई लोगों का मानना था कि दोनों नेता यूक्रेन और यूरोप से जुड़े मुद्दों पर सीधे आपस में समझौता करने की कोशिश कर रहे थे। बैठक के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय देशों के नेताओं ने वाशिंगटन में सक्रिय लॉबिंग शुरू कर दी थी। उनका मकसद ट्रंप को यह समझाना था कि यूक्रेन को दरकिनार करके कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पुतिन ने फिर दोहराई पुरानी बात
एंकरेज बैठक की तरह इस बार भी पुतिन ने यूक्रेन को एक स्वतंत्र पक्ष के रूप में ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने साफ कहा कि असली समझौता रूस और अमेरिका के बीच हुआ था और अब यूक्रेन को उन शर्तों को मानना चाहिए। पुतिन ने कहा-
“हम शांतिपूर्ण तरीके से यूक्रेन के साथ समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रूस उन समझौतों को स्वीकार करने को तैयार है जिन पर हमने डोनाल्ड ट्रंप के साथ एंकरेज में चर्चा की थी। अब यूक्रेन की तरफ से भी इन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।”
लेकिन आखिर उन समझौतों में था क्या?
सबसे बड़ी बात यह है कि ट्रंप और पुतिन के बीच अलास्का में वास्तव में क्या समझौता हुआ था, इसकी जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संकेत जरूर दिए थे कि बातचीत सकारात्मक रही और कुछ अहम मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन किसी ने भी यह नहीं बताया कि किन शर्तों पर सहमति बनी थी। यही वजह है कि अब जब पुतिन फिर से उस समझौते का जिक्र कर रहे हैं तो दुनिया भर में इस पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
2022 से रूस अपनी पुरानी मांगों पर अड़ा
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण सैन्य हमला शुरू करने के बाद से रूस लगातार अपनी अधिकतम मांगों (Maximalist Demands) पर कायम है। इन मांगों में सिर्फ उन इलाकों पर कब्जे की मान्यता शामिल नहीं है, जिन पर रूस दावा करता है, बल्कि यूक्रेन की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की बात भी शामिल है। कई पश्चिमी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूक्रेन इन शर्तों को मान लेता है तो उसकी संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता काफी हद तक खत्म हो सकती है।
पुतिन ने “युद्ध की असली वजह” खत्म करने की कही बात
एंकरेज बैठक के दौरान पुतिन ने कहा था कि यूक्रेन युद्ध तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक उसके “मूल कारणों” को खत्म नहीं किया जाता। रूस लंबे समय से दावा करता रहा है कि नाटो (NATO) का विस्तार और यूक्रेन का पश्चिमी देशों के करीब जाना इस युद्ध की मुख्य वजह है। पुतिन ने उस समय कहा था कि उनकी और ट्रंप की बातचीत से ऐसा रास्ता निकल सकता है जो यूक्रेन में शांति की ओर ले जाए। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई थी कि यूक्रेन और यूरोपीय देश इस प्रक्रिया में रुकावट नहीं डालेंगे।
डील को लेकर क्या बोले ट्रंप?
बैठक के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि दोनों नेताओं के बीच “काफी अच्छी तरह आगे बढ़े” हैं। हालांकि उन्होंने भी समझौते की शर्तों का खुलासा नहीं किया। इससे अटकलें और बढ़ गईं कि दोनों देशों के बीच कोई ऐसा समझौता हुआ हो सकता है जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
ट्रंप प्रशासन पर रूस के करीब होने के आरोप
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप और उनके कई सहयोगी लंबे समय से यूक्रेन युद्ध को लेकर ऐसे बयान देते रहे हैं जो रूस के रुख के करीब माने जाते हैं। ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि युद्ध के लिए सिर्फ रूस जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों को भी युद्ध बढ़ाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन पर यह आरोप भी लगता रहा है कि उसने यूक्रेन को मिलने वाली मदद में कटौती की और युद्ध के अहम चरणों में कीव पर ज्यादा दबाव बनाया, जबकि रूस पर अपेक्षाकृत कम दबाव डाला गया।
फिर भी पुतिन ने नहीं मानी ट्रंप की हर बात
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख के बावजूद पुतिन ने कई बार युद्धविराम (Ceasefire) के उन प्रस्तावों को ठुकरा दिया जिन्हें ट्रंप का समर्थन प्राप्त था। रूस अब भी अपनी पुरानी मांगों पर कायम है और बार-बार कह रहा है कि युद्ध तभी खत्म होगा जब यूक्रेन उन शर्तों को स्वीकार करेगा जिन्हें मॉस्को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी मानता है।
क्या शांति का रास्ता निकलेगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ट्रंप और पुतिन के बीच एंकरेज में क्या समझौता हुआ था और क्या यूक्रेन उसे स्वीकार करेगा। पुतिन का ताजा बयान दिखाता है कि रूस अब भी उसी फॉर्मूले पर आगे बढ़ना चाहता है। दूसरी तरफ यूक्रेन लगातार कहता रहा है कि उसके भविष्य का फैसला उसकी भागीदारी के बिना नहीं किया जा सकता। ऐसे में युद्ध खत्म होने की उम्मीद अभी भी दूर नजर आती है, लेकिन अलास्का समझौते का रहस्य एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है।







