मॉस्को: रूस ने अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमानों पर भारत को नया ऑफर दिया है। भारत के साथ डील पर रूस की ओर से सोर्स कोड देने की बात कही गई है। रूस के दो-सीट वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57D ने इसी महीने अपनी पहली सफल उड़ान भरी है। 19 मई को उड़ान के बाद टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने कहा कि यह वेरिएंट निर्यात ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उनके बयान ने इस उन्नत स्टील्थ विमान कार्यक्रम के भविष्य में भारत की भूमिका को लेकर अटकलें तेज की हैं।
आईडीआरडब्ल्यू के मुताबिक, सर्गेई बोगदान ने Su-57D जेट के महत्व के बारे में बात करते हुए कहा कि पायलट प्रशिक्षण भविष्य के ऑपरेटरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक बना हुआ है। इसका दो-सीट वाला कॉन्फिगरेशन भविष्य के निर्यात ग्राहकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाता है।
भारत पर रूस की नजर
रूस का दो-सीट वाले Su-57 का विकास विदेशी बाजार की जरूरत से जुड़ा रहा है। रूसी अधिकारियों ने बार-बार निर्यात की मांग को इस कार्यक्रम के पीछे अहम वजह कहा है। रूस ने ग्राहकों में भारत को लगातार ऐसी मांगों के पीछे सबसे संभावित देश के रूप में देखा गया है। भारत की ओर से भी इन विमानों में कुछ हद तक दिलचस्पी दिखाई गई है।
भारतीय वायु सेना ने लचीलेपन, प्रशिक्षण, हमले के समन्वय और जटिल मिशनों के लिए दो-सीट वाले लड़ाकू वेरिएंट को प्राथमिकता दी है। यह प्राथमिकता भारत की ओर से दो-सीट वाले लड़ाकू विमानों के उपयोग में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसमें Su-30MKI शामिल है, जो देश के जेट बेड़े की रीढ़ है। भारत की पिछले दो वर्षों में Su-57 में रुचि बढ़ी है।
रूस का भारत को ऑफर
फरवरी 2025 में सामने आई कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान के लिए लाइसेंस प्राप्त उत्पादन व्यवस्था की संभावना पर विचार कर रहे हैं। इसके बाद इस साल जनवरी में चर्चाओं के उन्नत तकनीकी चरण तक पहुंचने की बात सामने आई। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत शुरुआती आकलन से आगे बढ़ चुकी है।
बीते साल महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब दावा किया गया कि रूस ने भारत को Su-57 कार्यक्रम तक अभूतपूर्व स्तर की पहुंच की पेशकश की है। प्रस्ताव में संभावित लाइसेंस उत्पादन समझौते के हिस्से के रूप में लड़ाकू विमान के संवेदनशील सोर्स कोड तक पहुंच शामिल थी। इस तरह की रियायत रूस की पारंपरिक निर्यात प्रथाओं में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।
भारत के Su-57 लेने के विकल्प
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत Su-57 को अपनाने का निर्णय लेता है तो उसके पास कई संभावित रास्ते मौजूद हैं। पहला रास्ता स्क्वाड्रन की ताकत को तेजी से बढ़ाने के लिए रूस से विमानों का सीधा अधिग्रहण है। दूसरा विकल्प संशोधनों के साथ लाइसेंस प्राप्त उत्पादन का है, जिससे घरेलू उद्योग को विनिर्माण के अनुभव का अवसर मिलेगा।
भारत के पास तीसरा और सबसे महत्वाकांक्षी विकल्प संयुक्त विकास ढांचे के माध्यम से तैयार किए गए विमान हैं। यह भारत के लिए विशेष रूप से अनुकूलित एक संस्करण है। ऐसे विमान में स्वदेशी एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, संचार उपकरण, मिशन कंप्यूटर और भारत के हथियार शामिल हो सकते हैं।
भारत-रूस मिलकर बनाएंगे जेट
विश्लेषकों का सुझाव है कि यह दृष्टिकोण (तीसरा विकल्प) भारत के उस दीर्घकालिक उद्देश्य के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जिसके तहत वह अत्याधुनिक विदेशी तकनीक तक पहुंच बनाए रखते हुए अपनी आत्मनिर्भरता को अधिकतम करना चाहता है। Su-57D का सामने आना इन चर्चाओं में एक नया आयाम जोड़ता है।
संयुक्त रूप से विकसित किया जाने वाला भारतीय संस्करण, मानक ‘सिंगल-सीट’ मॉडल के बजाय दो सीटों वाली संरचना पर आधारित हो सकता है। यह भारत के ऑपरेशनल सिद्धांत को पूरा करेगा, जिसने ऐतिहासिक रूप से लंबी दूरी के हमलों, नेटवर्क-केंद्रित अभियानों और जटिल युद्ध परिदृश्यों के दौरान दो-चालक दल वाले लड़ाकू विमानों को महत्व दिया है।
भारत को कैसे मिलेगा लाभ
भारत स्वदेशी ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) के विकास कार्य को जारी रखे हुए है लेकिन इसके 2033 से पहले परिचालन सेवा में आने की उम्मीद नहीं है। इसलिए Su-57 एक अंतरिम ‘पांचवीं पीढ़ी’ की क्षमता के रूप में कार्य कर सकता है। साथ ही यह तकनीकी अनुभव देता है, जिसका लाभ भविष्य के स्वदेशी कार्यक्रमों को मिल सकेगा।
Su-57D की खासियत
- Su-57D रूस के पांचवीं पीढ़ी के सुखोई Su-57 फेलन स्टेल्थ मल्टीरोल जेट का नया पेश किया गया टू-सीटर वेरिएंट है।
- Su-57D मानव-रहित और मानव-युक्त विमानों के तालमेल और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- इसमें S-70 ओखोटनिक स्टेल्थ लड़ाकू ड्रोन को नियंत्रित करना शामिल है, जो फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में काम करता है।
- इस फाइटर जेट में टैंडम सीटों की व्यवस्था होने से पीछे बैठा सदस्य जटिल इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली को संभाल सकता है।







