नई दिल्ली। आज की दुनिया व्यापार (Trade) पर टिकी है और इस व्यापार की लाइफलाइन हैं समंदर के वो रास्ते, जिन्हें चोकपॉइंट्स (Chokepoints) कहा जाता है. ये समुद्री मार्ग इतने संकरे हैं कि अगर यहां एक जहाज भी फंस जाए या कोई देश यहां ‘टोल’ वसूलना शुरू कर दे, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल से लेकर खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छूने लगेंगे.
अभी तक आपको सिर्फ एक या दो चोकपॉइंट्स के बारे में जानकारी होगी. अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण कई लोग अब होर्मुज का नाम तो जान ही गए होंगे. लेकिन हम यहां आपको इनसे अलग कुछ और समुद्री चोकपॉइंट्स के बारे में बता रहे हैं. ये चोकपॉइंट्स पूरे विश्व में सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं.
चोकपॉइंट क्या होता है?
समुद्र में कुछ ऐसे संकरे रास्ते होते हैं, जहां से होकर ही जहाजों को गुजरना पड़ता है. इन्हें ही चोकपॉइंट कहा जाता है. ये इतने जरूरी हैं कि इनके बिना अंतरराष्ट्रीय व्यापार लगभग ठप पड़ सकता है. दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और जरूरी सामान इन्हीं रास्तों से एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है. अगर किसी कारण से ये रास्ते बंद हो जाएं या यहां पर कोई देश टोल लगा दे, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है. ये रास्ते इतने महत्वपूर्ण हैं कि अगर इन्हें बंद कर दिया जाए, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है.
क्यों बढ़ रही है टोल लगाने की चर्चा
अभी अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण ईरान ने अपने यहां Strait of Hormuz पर जहाजों की आवाजाही को बंद कर दिया है. अब ईरान का कहना है कि वह इस जगह से टोल लेगा. जिसके बाद पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है. ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इन रास्तों से गुजरने वाले जहाजों से टोल लिया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो यह सिर्फ एक साधारण टैक्स नहीं होगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाला फैसला साबित हो सकता है.
ये हैं दुनिया के 10 सबसे बड़े चोकपॉइंट्स
- मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca): यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है. चीन, जापान और भारत का अधिकांश तेल और व्यापार इसी रूट से गुजरता है. चीन का तो 80% तेल यहीं से गुजरता है. यह भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बहुत करीब है, जो भारत को रणनीतिक बढ़त देता है. अगर भारत इस चोकपॉइंट को बंद कर दे, तो चीन की पूरी अर्थव्यवस्था हिल जाएगी.
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): इसे दुनिया की ‘ऑयल लाइफलाइन’ कहा जाता है. ओमान और ईरान के बीच स्थित यह रास्ता खाड़ी देशों के तेल को पूरी दुनिया तक पहुंचाता है. दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% यहीं से गुजरता है. अगर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे तनाव के बाद ईरान इसे पूरी तरह बंद कर दे, तो पूरी दुनिया में तेल का संकट खड़ा हो जाएगा. इस रास्ते से भारत का कच्चा तेल, रसोई गैस और काफी व्यापार होता है.
- बाब-अल-मंडेब (Bab-el-Mandeb): इसे ‘आंसुओं का द्वार’ भी कहा जाता है. यह अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित है. यह रास्ता स्वेज नहर की ओर ले जाता है. हाल के दिनों में यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों की वजह से यह इलाका दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री चोकपॉइंट बन गया है.
- पनामा नहर (Panama Canal): यह अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है. हाल ही में सूखे (Drought) की वजह से इस नहर में पानी का स्तर कम हो गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है. यह अमेरिका के व्यापार के लिए सबसे जरूरी रास्ता है.
- स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर (Strait of Gibraltar): यह भूमध्य सागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ता है और यूरोप-अफ्रीका के बीच व्यापार का मुख्य रास्ता है.
- बॉस्फोरस जलडमरूमध्य (Bosphorus Strait): तुर्की में स्थित यह रास्ता काले सागर (Black Sea) को बाकी दुनिया से जोड़ता है, जो रूस और यूक्रेन के अनाज व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है.
- स्ट्रेट ऑफ डोवर (Strait of Dover): यह इंग्लिश चैनल का सबसे संकरा हिस्सा है, जो ब्रिटेन और यूरोप के बीच व्यापार का मुख्य केंद्र माना जाता है.
- केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope): हालांकि यह एक नहर नहीं है, लेकिन स्वेज नहर में संकट के समय जहाज इसी लंबे रास्ते का उपयोग करते हैं.
- डेनमार्क जलडमरूमध्य (Danish Straits): यह बाल्टिक सागर को अटलांटिक से जोड़ता है और उत्तरी यूरोप के व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है.
- स्वेज नहर (Suez Canal): मिस्र में स्थित यह नहर एशिया और यूरोप के बीच का सबसे छोटा रास्ता है. 2021 में जब ‘एवर गिवेन’ जहाज इसमें फंसा था, तो पूरी दुनिया ने इसकी अहमियत देखी थी.
अगर ये रास्ते बंद हुए तो क्या होगा?
अगर किसी भी कारण से ये रास्ते बंद होते हैं, तो माल ढुलाई का खर्च (Freight Cost) बढ़ जाएगा, जिससे हर चीज महंगी हो जाएगी. दुनिया में चिप्स, अनाज और दवाओं की कमी हो सकती है. इन रास्तों पर कब्जे के लिए बड़ी शक्तियों (जैसे अमेरिका और चीन) के बीच टकराव बना रहता है. ये समुद्री चोकपॉइंट्स ग्लोबल इकोनॉमी की नसों की तरह हैं. अगर इनमें कहीं भी ‘ब्लॉक’ आता है, तो उसका असर सीधे आपकी जेब और रसोई पर पड़ता है. यही वजह है कि दुनिया के तमाम देश अपनी नौसेना को इन इलाकों में तैनात रखते हैं.







