Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

नेताओं को रिश्वतखोरी से बचाने वाला वो कानून, जिसकी समीक्षा कर रहा सुप्रीम कोर्ट

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 22, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
26
SHARES
864
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: नोट के बदले वोट का जिन्न फिर बाहर आ गया है. इसकी चर्चा तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल पुराने पांच जजों के अपने ही फैसले को फिर से समीक्षा करने को सात जजों की पीठ गठित की है. उम्मीद जताई जा रही है कि आए दिन कुछ जनहित में नया करने वाले चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ इस मामले में कुछ अलग करने वाले हैं.

साल 1998 में पीवी नरसिंह राव केस में सुप्रीम कोर्ट ने 3/2 के बहुमत से फैसला सुनाया था, उसकी आड़ में बड़ी संख्या में सांसद-विधायक जेल जाने से बचे हुए हैं. जबकि उनके खिलाफ बड़ी संख्या में मामले सामने आ चुके हैं. इसी तरह के एक मामले में जब झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेता, शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन पर आरोप लगे तो वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं और सर्वोच्च अदालत से 1998 में आए फैसले के आलोक में राहत की मांग की.

इन्हें भी पढ़े

Agni

DRDO ने जिस एडवांस अग्नि मिसाइल का टेस्ट किया, जानें उसकी खासियत

May 10, 2026
amit shah

अमित शाह का राहुल और I.N.D.I.A गठबंधन पर हमला, पूछा- क्या हर जगह हुई वोट चोरी?

May 9, 2026
temperature

सुपर अल-नीनो को लेकर IMD का अलर्ट जारी, देशभर में पड़ेगी भीषण गर्मी

May 9, 2026

‘बंगाल फतह’ के साथ भाजपा ने कहां-कहां अपने दम पर अकेले खिलाया कमल?

May 9, 2026
Load More

इसी मसले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने इस पूरे मामले को सात जजों की पीठ को सौंप दिया. नवगठित पीठ को यह तय करने की जिम्मेदारी दी गई है कि वह नोट के बदले वोट के बाद भी सांसद-विधायक को वह सुरक्षा मिलनी चाहिए या नहीं? देखना रोचक होगा कि सर्वोच्च अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है?

क्या था पूरा मामला और सांसदों को राहत देने वाला कानून?
पीवी नरसिंह राव की अल्पमत में आई सरकार को बचाने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा और जनता दल के सांसदों पर आरोप था कि उन्होंने पैसा लेकर राव सरकार को बचाने को वोट किया. सरकार बच तो गई लेकिन शोर-शराबे के बीच मामला सीबीआई के पास जांच को पहुंचा.

एजेंसी ने जांच में पुख्ता किया कि अजित को छोड़ सभी सांसदों ने नोट के बदले सदन में वोट किया था. अजित ने वोट नहीं डाला. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों के सामने जो तर्क दिए उनमें संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला दिया जो सांसदों को राहत देता है.

इसी तरह की राहत विधायकों के संदर्भ में अनुच्छेद 194 देता है. इस तरह नोट के बदले वोट के मामले में 3/2 के बहुमत से जो फैसला दिया उसमें कहा गया कि जिन सांसदों ने रिश्वत लेकर सदन में वोट किया, आपराधिक मुकदमे से मुक्त होंगे. क्योंकि कथित रिश्वत संसदीय वोट के संदर्भ में थी.

चौंकाने वाला हो सकता है फैसला
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे कहते हैं कि 25 साल बाद किसी फैसले की समीक्षा के लिए पांच जजों का फैसला सात जजों की पीठ को सौंपा जाना कई मामलों में अनूठा है. सात जजों की पीठ जब सुनवाई करेगी तो यह बहस सुनने वाली होगी और फैसला उससे ज्यादा चौंकाने वाला हो सकता है. क्योंकि इस केस में कानूनन दो ही संभावना बनती है. एक-पीठ पांच जजों की पीठ के साथ जाए. दो-उस फैसले के खिलाफ आदेश दे.

पहला आदेश आता है तब तो कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी लेकिन अगर फैसला उलट आया तो बहुत बड़ी संख्या में सांसद-विधायक मुश्किल में पड़ेंगे, जो अब तक शिकायत, प्रमाण होने के बावजूद अनुच्छेद 105 (2), अनुच्छेद 194 (2) और सुप्रीम कोर्ट के 1998 में आए फैसले का सहारा लेते हुए बचते आ रहे हैं.

अदालत के पास सांसदों-विधायकों के खिलाफ़ अलग-अलग तरीके से दर्ज मामलों, जांचों का पर्याप्त डाटा है, जो ईडी, सीबीआई जैसी सरकारी मशीनरी ने ही समय-समय पर उपलब्ध करवाया है. नौ सौ से ज्यादा सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामले बीते कई सालों से देश की अदालतों में अटके पड़े हैं. सीबीआई भी कई मामलों की जांच कर रही है.

अगर सात जजों की पीठ ने पांच जजों की पीठ के पुराने फैसले को पलटा तो यह एक ऐतिहासिक फैसला साबित होगा भले ही केंद्र सरकार कानून के जरिए उस फैसले को पलट दे लेकिन नजीर तो बन ही जाएगी. इसकी संभावना इसलिए भी है क्योंकि मौजूदा केंद्र सरकार ने भी 1998 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन कर चुकी है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
nda

लोकतंत्र में सबकी जय होती है!

June 5, 2024

भारत को फंसाना चाहता था यूक्रेन, जयशंकर ने इस तरह फेरा पानी?

June 8, 2023
Jagannath Rath Yatra

कब शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा ? आषाढ़ की इस पावन यात्रा में मिले मोक्ष का आलिंगन !

June 16, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • अब Google Chrome में नहीं पकड़ पाएगा कोई आपकी असली Location!
  • 4 मिनट 8 सेकंड का वो गाना… जो आज भी कानों में घोल देता है शहद!
  • MI के खिलाफ बड़ा कारनामा करने उतरेंगे विराट कोहली!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.