नई दिल्ली। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में नए वित्तवर्ष से इनकम टैक्स का 6 दशक पुराना कानून खत्म कर नया कानून लागू करने का ऐलान कर दिया है. इनकम टैक्स रूल 2026 और 1962 के पुराने नियम में क्या अंतर है. टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियम से नौकरीपेशा को लाभ होगा. 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले नए नियम के तहत नौकरीपेशा की टेक होम सैलरी भी बढ़ जाएगी, जिसका फायदा पुराने टैक्स रिजीम को अपनाने वालों को भी मिलेगा.
टैक्स जानकारों का कहना है कि नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट में एचआरए की लिमिट ज्यादा रखी गई है. शिक्षा और हॉस्टल खर्च से भी टैक्स का बोझ कम होगा, खासकर उनके लिए जो पुराने टैक्स रिजीम को अपनाते हैं. फिलहाल इस ड्राफ्ट को 22 फरवरी तक आम लोगों के कमेंट्स के लिए खोला गया है, जिसके बाद ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा और सरकार इसे नए वित्तवर्ष से लागू कर देगी. इसके लिए बाकायदा नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा और इनकम टैक्स के पुराने नियम में भी कई बदलाव किए गए हैं.\
अब ज्यादा शहरों में एचआरए का लाभ
नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट में सबसे बड़ा फायदा नौकरीपेशा को हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) के रूप में मिलने वाली इनकम टैक्स छूट पर दिया गया है. अभी तक सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में नौकरी करने वाले को ही एचआरए के रूप में 50 फीसदी छूट का प्रावधान था, लेकिन नए नियम के तहत बैंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी 50 फीसदी वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है. अन्य शहरों में पहले की तरह ही 40 फीसदी छूट की सीमा लागू रहेगी.
एजुकेशन और हॉस्टल अलाउंस पर ज्यादा छूट
नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट में शिक्षा और हॉस्टल अलाउंस पर ज्यादा छूट का प्रावधान किया गया है. अब बच्चों पर शिक्षा पर मिलने वाला अलाउंस 100 रुपये प्रति बच्चे से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है. इसी तरह, हॉस्टल के अलाउंस पर मिलने वाली टैक्स छूट को भी प्रति बच्चा हर महीने 300 रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये कर दिया गया है. हालांकि, यह छूट सिर्फ 2 बच्चों तक ही सीमित रहती है.
पुराने नियम में सैलरी पर क्या असर
मान लीजिए किसी नौकरीपेशा व्यक्ति की सालाना कमाई 30 लाख रुपये है, तो पुराने नियम के तहत शिक्षा खर्च पर 2,400 रुपये सालाना और हॉस्टल खर्च पर 7,200 रुपये की छूट मिलेगी. 75 हजार रुपये महीने किराये पर सालाना 6 लाख का एचआरए, 50 हजार का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर कुल छूट होगी 6,59,600 रुपये. इसके बावजूद 23,40,400 रुपये नेट सैलरी होगी जो इनकम टैक्स के दायरे में आएगी. इस पर पुराने रिजीम के तहत 80सी, 80डी, 80टीटीए, 80सीसीसी और 80सीसीडी सेक्शन में कुल छूट होगी 4.05 लाख रुपये. इन सभी के बावजूद कुल टैक्सेबल इनकम 19,35,400 रुपये रहेगी, जिस पर 4,08,844 रुपये का टैक्स चुकाना पड़ेगा. इसका मतलब है कि सालाना टेक होम सैलरी 23,47,955.20 रुपये ही रह जाएगी.







