Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

‘यह गंभीर चिंता का विषय’, HC के इस फैसले को भयावह बता चुका है सुप्रीम कोर्ट

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 21, 2024
in राष्ट्रीय
A A
court
11
SHARES
359
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हो सकता है कि किसी बच्चे का अश्लील सामग्री देखना अपराध न हो, लेकिन अश्लील सामग्रियों में बच्चों का इस्तेमाल किया जाना गंभीर चिंता का विषय है और यह अपराध हो सकता है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले गैर सरकारी संगठनों (जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस ऑफ फरीदाबाद और नयी दिल्ली स्थित बचपन बचाओ आंदोलन) की अपील पर फैसला सुरक्षित रखते हुए ये टिप्पणियां कीं. दोनों संगठन बच्चों के कल्याण के लिए काम करते हैं.

सीजेआई चंद्रचूड़ क अध्‍यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ”हो सकता है कि एक बच्चे का अश्लील सामग्री देखना अपराध नहीं हो, लेकिन अश्लील सामग्रियों के निर्माण में बच्चों का इस्तेमाल किया जाना अपराध हो सकता है और यह गंभीर चिंता का विषय है.’ मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि केवल बाल अश्लील सामग्री डाउनलोड करना और देखना बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून के तहत अपराध नहीं है.

इन्हें भी पढ़े

Jhandewala Devi Temple

झण्डेवाला देवी मंदिर में बप्पा को भावभीनी विदाई, विसर्जन में सम्मिलित हुए भक्तगण

September 25, 2026
UPI

UPI पर 2000 का नियम और डेली लिमिट, दोनों में क्या है बड़ा अंतर?

September 25, 2026
el niño

वैज्ञानिकों की प्रचंड भविष्यवाणी, 6 महीने में काल बन जाएगा अल नीनो

September 24, 2026
election

विश्लेषण: चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्ति, SIR, वोटर लिस्ट और ECINet को लेकर क्या सामने आया?

September 24, 2026
Load More

क्‍या है मामला
हाईकोर्ट ने 11 जनवरी को 28 वर्षीय एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द भी कर दी थी, जिसपर अपने मोबाइल फोन पर बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री डाउनलोड करने का आरोप लगाया गया था. दो संगठनों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने उच्च न्यायालय के फैसले से असहमति जताई और पॉक्सो अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया. पीठ ने कहा कि यदि किसी को इनबॉक्स में ऐसी सामग्री मिलती है तो संबंधित कानून के तहत जांच से बचने के लिए उसे हटा देना होगा या नष्ट कर देना होगा. पीठ ने कहा कि अगर कोई बाल अश्लील सामग्री को नष्ट न करके सूचना प्रौद्योगिकी प्रावधानों का उल्लंघन करना जारी रखता है तो यह एक अपराध है. कथित क्लिप 14 जून 2019 को उसके पास आई थी. उच्च न्यायालय ने आरोपी को बरी कर दिया था और आरोपी के वकील ने कहा कि सामग्री उसके व्हाट्सऐप पर ऑटोमेटिकली डाउनलोड हो गई थी.

हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
शीर्ष अदालत ने बाल अधिकार निकाय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को मामले में हस्तक्षेप करने और 22 अप्रैल तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति दी. सीजेआई ने कहा, ‘बहस पूरी हो गई और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को मद्रास उच्च न्यायालय के उस फैसले को भयावह करार दिया था, जिसमें कहा गया है कि बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री (चाइल्ड पोर्नोग्राफी) को केवल डाउनलोड करना और उसे देखना पॉक्सो अधिनियम और आईटी कानून के तहत अपराध नहीं है. हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाई करने के लिए भी उच्च न्यायालय राजी हो गया था.

‘अश्‍लील सामग्री देखेन की गंभीर समस्‍या’
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि आजकल के बच्चे अश्लील सामग्रियां देखने की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं और समाज को वैसे बच्चों को दंडित करने के बजाय शिक्षित करने को लेकर पर्याप्त परिपक्वता दिखानी चाहिए. अदालत ने 28 वर्षीय एस. हरीश के खिलाफ कार्यवाही भी निरस्त कर दी थी, जिस पर अपने मोबाइल फोन पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री डाउनलोड करने का आरोप था. अदालत ने कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ऐसी सामग्री को केवल देखने को अपराध नहीं बनाता है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
trump

ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ़ पर अमेरिका में बवाल, 25 राज्यों ने संघीय सरकार के खिलाफ़ दायर किया मुक़दमा

August 4, 2026
वैगनर ग्रुप

फूड स्टॉल लगाने वाले ने कैसे बनाई इतनी बड़ी प्राइवेट आर्मी?

June 24, 2023
Deendayal Upadhyay released

दीनदयाल उपाध्याय के गुजराती संस्करण का विमोचन, एकात्म मानव दर्शन पर 100 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत हुए

September 4, 2026
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • झण्डेवाला देवी मंदिर में बप्पा को भावभीनी विदाई, विसर्जन में सम्मिलित हुए भक्तगण
  • UPI पर 2000 का नियम और डेली लिमिट, दोनों में क्या है बड़ा अंतर?
  • भारत-वेस्टइंडीज के बीच होंगे 8 मैच, रोहित-विराट खेलेंगे सिर्फ 3 मैच

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.