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Home राजनीति

सम्राट चौधरी ही क्यों बने नीतीश कुमार के सच्चे उत्तराधिकारी?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 15, 2026
in राजनीति, राज्य
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samrat chaudhary
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पटना: बिहार में लगभग दो दशक तक नीतीश कुमार के साथ सत्ता में सहयोगी रही भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य में सम्राट चौधरी के रूप में अपना मुख्यमंत्री बनाया। नीतीश ने अपनी समाजवादी विचारधारा, लव-कुश वोटबैंक पर पकड़ और सुशासन बाबू की छवि से जो इबारत लिखी, उसे आगे ले जाने की जिम्मेदारी अब भाजपा के सीएम सम्राट चौधरी पर रहेगी। बीते दो दशक के अंदर बिहार में कई ऐसे नेता आए और गए जिन्हें नीतीश के उत्तराधिकारी के रूप में प्रोजेक्ट किया गया। हालांकि, उनके ‘सच्चे उत्तराधिकारी’ सम्राट ही बन पाए।

इसके लिए सम्राट चौधरी का समाजवादी बैकग्राउंड, सरकार एवं संगठन पर मजबूत पकड़ के साथ ही लव-कुश समीकरण भी काम आया। जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला लिया तो समृद्धि यात्रा के दौरान घूम-घूमकर अपने डिप्टी सम्राट चौधरी के कंधों पर ही हाथ रखकर उन्हें आगे कर रहे थे। नीतीश भी संकेत देते रहे कि अगली सरकार की कमान संभालने के लिए एनडीए में सम्राट ही बेहतर विकल्प हैं। नीतीश के मुख्यमंत्री के रहने के दौरान वह भाजपा के इकलौते नेता थे, जो उनके साथ साये की तरह दिखते रहे।

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लव-कुश समीकरण

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के पीछे लव-कुश समीकरण भी एक फैक्टर है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कुर्मी और कोइरी (कुशवाहा) वोटबैंक पर सालों से पकड़ बनाए रखी। ये दोनों जातियां ओबीसी का हिस्सा हैं। बिहार में कुर्मी और कोइरी की कुल आबादी 7 फीसदी है।

नीतीश कुमार की इस वोटबैंक पर मजबूत पकड़ है। वह खुद कुर्मी जाति से आते हैं। जब उन्होंने पद छोड़ा तो भाजपा ने कुशवाहा जाति से आने वाले सम्राट चौधरी को ही कुर्सी पर बैठाया। भाजपा ने यह संदेश दिया कि वह अपना मुख्यमंत्री बना रही है तो गठबंधन के सहयोगी दलों का भी ख्याल रख रही है।

कुर्मी और कोइरी का गठजोड़ गैर-यादव पिछड़ा वर्ग में मजबूत वोटबैंक बनाता है। इससे अन्य पिछड़ी जातियां जैसे दांगी, धानुक, अमात, गंगोता भी एनडीए को प्रमुखता से वोट करते रहे हैं। भाजपा ने यह जताने की कोशिश की है कि भले ही मुख्यमंत्री बदला गया है, लेकिन एनडीए लव-कुश समीकरण को तवज्जो देता रहेगा।

समाजवादी बैकग्राउंड

बिहार में भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने में सम्राट चौधरी का समाजवादी बैकग्राउंड भी काम आया। सम्राट ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। उनके पिता शकुनी चौधरी बड़े समाजवादी नेता हैं। आरजेडी के बाद वह नीतीश की पार्टी जेडीयू में भी रहे। भाजपा में उनका आगमन 2018 में हुआ था, इससे पहले वह समाजवादी दलों में रहकर ही राजनीति करते रहे।

सुशील मोदी के बाद बिहार भाजपा के चेहरा बने सम्राट

एक समय बिहार में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा रहे दिवंगत सुशील कुमार मोदी के बाद पार्टी में नेतृत्व का खालीपन आ गया था, जिसे सम्राट चौधरी ने भर दिया। सुशील मोदी लंबे समय तक नीतीश कुमार के डिप्टी रहे। उनके बाद भाजपा ने तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री की कमान सौंपी, लेकिन यह प्रयोग असफल माना गया। दोनों नेताओं का प्रभाव उतना दमदार नहीं रहा।

इसके बाद भाजपा ने सम्राट चौधरी पर दांव खेला। उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। बिहार में महागठबंधन सरकार के दौरान उन्होंने सदन में आक्रामक तेवर दिखाए। फिर संजय जायसवाल की जगह उन्हें बिहार भाजपा की कमान दी गई। वहां भी उन्होंने अमिट छाप छोड़ी। 2024 में जब राज्य में फिर से एनडीए सरकार बनी तो सम्राट को नंबर दो की पॉजिशन मिली। डिप्टी सीएम रहते हुए उन्होंने वित्त और गृह जैसे अहम विभाग संभाले।

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