नई दिल्ली। बजट 2026 के आते ही सबसे तेज चर्चा इस बात की है कि क्या ओल्ड टैक्स रिजीम को अब पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक करीब 80 से 90 प्रतिशत टैक्सपेयर पहले ही न्यू टैक्स रिजीम पर शिफ्ट हो चुके हैं. ऐसे में सवाल ये है कि जब ज्यादातर लोग नए सिस्टम में आ चुके हैं तो क्या सरकार अगले बजट में पुराना सिस्टम खत्म करने का बड़ा फैसला ले सकती है.
टैक्स विशेषज्ञ मानते हैं कि रुझान जरूर बदल चुका है लेकिन ओल्ड टैक्स रिजीम को एक झटके में खत्म कर देना आसान नहीं होगा. कई परिवारों की बचत योजना, होम लोन ब्याज, हाउस रेंट अलाउंस और 80C जैसे डिडक्शन्स इसी सिस्टम पर आधारित हैं. कई साल की फाइनेंशियल प्लानिंग इन छूटों के हिसाब से बनी होती है. ऐसे में अगर ओल्ड रिजीम को अचानक बंद कर दिया गया तो मिडिल क्लास बजट से लेकर लोन ईएमआई तक पर असर दिख सकता है.
न्यू टैक्स रिजीम को पिछले दो साल में काफी आक्रामक तरीके से प्रमोट किया गया है. इसमें कम टैक्स स्लैब और सरल स्ट्रक्चर दिया गया है जिससे युवा और सैलरीड क्लास तेजी से इसी मॉडल में आ गए हैं.सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम आसान बनाना है ताकि रिटर्न फाइलिंग और कागजी झंझट कम हो. 80 से 90 प्रतिशत लोगों के शिफ्ट होने के बाद ओल्ड सिस्टम को चालू रखने का तर्क कमजोर पड़ता दिख रहा है.
एक्सपर्ट्स क्यों कह रहे हैं इसे तुरंत बंद नहीं करना चाहिए
टैक्स सलाहकारों का कहना है कि भारत में लाखों परिवार अपनी पूरी सेविंग स्ट्रेटेजी टैक्स डिडक्शन्स पर टिका कर चलते हैं. ओल्ड टैक्स रिजीम उन्हें निवेश के लिए प्रेरित करता है. इसमें पीपीएफ, होम लोन ब्याज, स्वास्थ्य बीमा जैसी चीजों पर मिलने वाली राहत मिडिल क्लास को बड़ा सुरक्षित कुशन देती है. अगर इसे अचानक हटा दिया गया तो हाउसिंग मार्केट से लेकर इंश्योरेंस सेक्टर तक में गिरावट का जोखिम बन सकता है.
आगे क्या फैसला ले सकती है सरकार
सरकार भले ही ओल्ड रिजीम को हटाने पर विचार कर रही हो लेकिन संभावना यही है कि यह फैसला जल्दी नहीं लिया जाएगा. ज्यादा मुमकिन है कि दोनों सिस्टम कुछ समय तक साथ चलते रहें ताकि लोग धीरे धीरे पूरी तरह नए सिस्टम पर आ सकें. फाइनेंस मंत्रालय यह भी देख रहा है कि ओल्ड रिजीम खत्म करने से सेविंग रेट पर क्या असर पड़ेगा क्योंकि भारत की घरेलू बचत अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है.







