नई दिल्ली: देश की जानीमनी चार हस्तियां अब संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में देश की आवाज को बुलंद करेंगे. राष्ट्रपति ने इनके नामों की सिफारिश की है. इस लिस्ट में मुंबई हमलों के गुनहगार अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने वाले सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम का नाम का भी शामिल है. उज्ज्वल निकम के अलावा पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला, जानीमानी इतिहासकार मीनाक्षी जैन और समाजसेवी सदानंदन मास्टर को भी राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए इन चारों को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया है. बता दें कि ये नामांकन भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत किए गए हैं. साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वालों को राष्ट्रपति अपर हाउस के लिए मनोनीत कर सकते हैं.
उज्ज्वल निकम
उज्ज्वल निकम का जन्म 30 मार्च 1953 को महाराष्ट्र के जलगांव में वकील देवराव माधवराव निकम और प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी विमलादेवी के घर हुआ था. उन्होंने साइंस में ग्रैजुएशन की डिग्री ली और जलगांव के एसएस मनियार लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री प्राप्त की. उज्ज्वल निकम कुछ प्रसिद्ध अदालती मामलों में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं.
साल 1991 में उन्होंने कल्याण बम विस्फोट के लिए रविंदर सिंह को दोषी ठहराने में प्रमुख भूमिका निभाई. उनके करियर ने 1993 में एक बड़ा मोड़ लिया जब वे मुंबई सीरियल बम विस्फोट मामले में सरकारी वकील बने. उज्ज्वल निकम 26/11 के हमलों के बाद पकड़े गए एकमात्र पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब के मुकदमे में सरकारी वकील थे. उन्होंने कसाब की मौत की सजा के लिए सफलतापूर्वक बहस की और उसे फांसी के फंदे तक पहुंचाया.
हर्ष श्रृंगला
पूर्व विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला को राज्यसभा के लिए नामित किया है. साल 1984 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी श्रृंगला बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं. वह जनवरी 2020 से अप्रैल 2022 तक विदेश सचिव थे. हर्षवर्धन श्रृंगला भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त भारतीय राजनयिक हैं, जिन्होंने 2023 में भारत की जी20 अध्यक्षता के लिए मुख्य समन्वयक के रूप में कार्य किया. वे इससे पहले भारत के विदेश सचिव, संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत, बांग्लादेश में उच्चायुक्त और थाईलैंड में राजदूत के रूप में कार्य कर चुके हैं. वे जनवरी 2025 से विकसित भारत के विशिष्ट फेलो हैं.
मीनाक्षी जैन
मीनाक्षी जैन एक भारतीय इतिहासकार और राजनीतिशास्त्री हैं, जो मध्यकालीन और औपनिवेशिक भारत पर अपने काम के लिए जानी जाती हैं. इसमें सांस्कृतिक और धार्मिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है. उन्होंने फ़्लाइट ऑफ़ डेइटीज़ एंड रीबर्थ ऑफ़ टेम्पल्स और द बैटल फ़ॉर राम: केस ऑफ़ द टेम्पल एट अयोध्या सहित कई पुस्तकें लिखी हैं. साहित्य और शिक्षा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. मीनाक्षी दिल्ली यूनिवर्सिटी के गार्गी कॉलेज में पढ़ाती हैं.
सदानंदन मास्टर
केरल के भाजपा सदस्य और शिक्षक सी. सदानंदन मास्टर को पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था. सदानंदन को राजनीतिक हिंसा का भी शिकार होना पड़ा है. 25 जनवरी 1994 को माकपा कार्यकर्ताओं ने उनके पैतृक गांव पेरिंचरी के पास उनके दोनों पैर काट दिए थे. अपने क्षेत्र में उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी है.






