प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
देहरादून : उत्तराखंड का चमोली जनपद प्राकृतिक सुंदरता और सामरिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है, वहीं इसके कई विकासखंड आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझते नजर आते हैं। इन्हीं में से एक है विकासखंड देवाल, जो लंबे समय से चर्चा में रहा है- पर अफसोस, विकास के वास्तविक धरातल पर यह क्षेत्र आज भी उपेक्षित है।
शिक्षा व्यवस्था- शिक्षक हैं, या नहीं ?
देवाल क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। अनेक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। विद्यालय भवन जर्जर हालत में हैं और संसाधनों का अभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह विडंबना है कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों का क्षेत्र सवाड़, जहाँ से कई युवा भारतीय सेना में कार्यरत हैं, वहां आज तक केंद्रीय विद्यालय केवल “घोषणा” तक ही सीमित है।
स्वास्थ्य सेवाओं का संकट
देवाल विकासखंड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र एक है, और वहां भी डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते। एक हालिया RTI के जवाब में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई बार ग्रामीणों को इलाज के लिए 30 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। आपात स्थिति में यह दूरी किसी जीवन-मरण के बीच का फासला बन जाती है। स्वास्थ सेवाओं की ऐसी दुर्दशा, जो कि सरकार की जिम्मेदारी है, आखिर क्यों बरकरार है ?
सड़कों की स्थिति-योजनाओं में बनी, ज़मीनी हकीकत में नहीं
विकासखंड में कई सड़कों के सर्वे किए जा चुके हैं, इसकी पुष्टि स्थानीय सूत्रों और दस्तावेजों से होती है। लेकिन वर्ष बीतते जा रहे हैं, और निर्माण कार्य अब भी शुरू नहीं हुआ। कई गाँव आज भी कच्चे रास्तों और बरसात में फिसलन भरे ट्रेक पर निर्भर हैं। सड़कें न होने की वजह से न सिर्फ शिक्षा और स्वास्थ्य बल्कि रोज़गार और कृषि को भी भारी नुकसान हो रहा है।
#Uttarakhand: Due to the absence of a road in the remote village of Sawar (Gweela) in Chamoli, this is still the situation today, although the video is from a few weeks ago. From roads to healthcare, and from schools to the concept of smart villages-the reality remains the same. pic.twitter.com/9ryq29YVEv
— Prakash Mehra (@mehraprakash23) July 2, 2025
शिकायतें दर्ज, पर हल नहीं
इन समस्याओं के बारे में कई बार उत्तराखंड सीएम हेल्पलाइन और RTI के माध्यम से शिकायतें दर्ज की गई हैं। लेकिन समाधान के नाम पर केवल खानापूर्ति होती दिख रही है। जवाबदेही का कोई स्पष्ट तंत्र न होने से आम जनता हताश और निराश है।
जिम्मेदार कौन ?
यह सवाल अब सिर्फ प्रशासन से नहीं, बल्कि नीतियों की क्रियान्वयन व्यवस्था, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता, और सरकार की प्राथमिकताओं पर उठता है। जब एक रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्र विकास से महरूम हो, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि एक संवेदनहीन प्रशासनिक व्यवस्था का परिचायक है।
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देवाल जैसे क्षेत्र, जो सीमा से सटे होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों से भी भरपूर हैं, उन्हें विकास की पहली पंक्ति में होना चाहिए था। लेकिन जो हकीकत है वह बेहद चिंताजनक है। सच्चाई यह है कि विकास योजनाएं कागजों में हैं और ज़मीनी स्तर पर आम जनता आज भी संघर्ष कर रही है।
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अब वक्त आ गया है कि सरकार व प्रशासन केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि जिम्मेदारी तय करें और निगरानी तंत्र को सशक्त करें, ताकि देवाल जैसे क्षेत्रों को भी देश के बाकी हिस्सों की तरह बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।







