गाजियाबाद। बकरीद के दिन गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी में सूर्या चौहान की हत्या करने वाले असद का एनकाउंटर हो चुका है। अब प्रशासन ने एक और कार्रवाई की है। जांच में सामने आया कि खोड़ा के नवनीत विहार में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर एक इमारत बनाई गई है। इसी इमारत में असद अपने माता-पिता के साथ किराए पर रहता था। प्रशासन ने नोटिस जारी कर बिल्डिंग मालिक को 15 दिन में जमीन को खाली करने का अल्टीमेटम जारी कर नोटिस चस्पा कर दिया है।
असद का एनकाउंटर होने के बाद रविवार को नायब तहसीलदार गाजियाबाद एवं अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद खोड़ा-मकरपुर की टीम मौके पर पहुंची। ढोल बजवाकर और लाउडस्पीकर से मुनादी कराने के बाद टीम ने बिल्डिंग मालिक के नाम पर नोटिस चस्पा कर दिया। नोटिस के अनुसार, ग्राम खोड़ा के खसरा संख्या 70 की सरकारी भूमि पर अवैध रूप से यह निर्माण किया गया है। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन 5-3 भूमि के तौर पर दर्ज है।
15 दिन के भीतर अवैध निर्माण हटाने का निर्देश
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2002 की धारा 136 के तहत जारी नोटिस में बिल्डिंग मालिक को 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण हटाने और इमारत खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया तो इमारत को जबरन खाली कराकर ध्वस्त कर दिया जाएगा।
15 दिन की मियाद, फिर चलेगा बुलडोजर
बिल्डिंग में असद के परिवार के अलावा कई अन्य परिवार भी किराए पर रह रहे हैं। नोटिस चस्पा होने के बाद सभी किराएदारों को मकान खाली करना होगा। ढोल और अनाउंसमेंट के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई और इलाके में हड़कंप मच गया। प्रशासन का कहना है कि सूर्या हत्याकांड की जांच के दौरान इस अवैध निर्माण का पता चला था। 15 दिन की मियाद पूरी होने के बाद इस इमारत पर बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी।
बुलंदशहर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक
इससे पहले असद का शव रविवार को बुलंदशहर के उसके पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए असद की लाश को उसके चाचा शहाबुद्दीन गाजियाबाद के पोस्टमार्टम हाउस से बुलंदशहर लेकर आए थे। पोस्टमार्टम के बाद असद का शव लेने के लिए रविवार दोपहर तक कोई परिजन नहीं पहुंचा। असद के पिता नवाब सूर्या हत्याकांड में ही नामजद हैं और जेल में बंद हैं। उसकी सौतेली मां है। भाई शादीशुदा है और खोड़ा में ही अलग रहता है।
- वियतनाम के बाद इंडोनेशिया भी ब्रह्मोस की लाइन में
- वियतनाम के साथ करीब 5,800 करोड़ रुपये की डील होने की बात सामने आ रही है।
- इसमें कोस्टल डिफेंस मिसाइल बैटरीज के अलावा ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है।
- रिपोर्ट के अनुसार बाद में वियतनाम ब्रह्मोस का एयर-लॉन्च वर्जन भी खरीदेगा।
- भारत से सबसे पहले 2022 में फिलीपींस ने ब्रह्मोस खरीदा था।
- इसी तरह से इंडोनेशिया भी भारत और रूस के साझा उत्पाद खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है।
- इनके अलावा इसी क्षेत्र के दो और देश थाईलैंड और मलेशिया भी ब्रह्मोस मिसाइल में दिलचस्पी दिखा चुके हैं।
दक्षिण चीन सागर पर चीन दिखाता है दबदबा
- दक्षिण चीन सागर में चीन ने अपना प्रभुत्व जिस तरह से बढ़ाया है, वह अब बड़े जियोपॉलिटिकल फसाद की जगह बन चुका है।
- फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया तीनों के ही दक्षिण चीन सागर के क्षेत्रों को लेकर चीन के साथ किसी न किसी रूप में विवाद हैं।
- चीन पूरे दक्षिण चीन सागर को अपना हिस्सा मानता है और वहां धड़ल्ले से स्थायी गतिविधियां भी चला रहा है, लेकिन दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई देशों के लिए यह उसकी विस्तारवादी सोच है और वे चीन के दावे को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रह्मोस होने के मायने?
- दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के पास ब्रह्मोस जैसा सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम होना, उनकी क्षमता कई गुना बढ़ा सकता है।
- इन मिसाइलों की क्षेत्र में तैनाती इलाके में सत्ता का संतुलन बदल सकता है।
- चाइनीज नेवी का क्षेत्र में इकलौता वर्चस्व बनाए रखना ज्यादा कठिन हो सकता है।
- भले ही दक्षिण चीन सागर से भारत का सीधा हित नहीं जुड़ा है, लेकिन अपने पड़ोस के क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व इसके अपने हक में भी नहीं है।
- यह डील भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना एक अलग सुरक्षा संगठन बनाने का भी अवसर दे सकता है, जिसमें फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम शामिल हैं।







