नई दिल्ली। ग्रामीण विकास विभाग के इस वर्ष के बजट में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाई गई नई योजना वीबी-जी राम जी को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है. इस योजना को विभाग के कुल आवंटन का लगभग 40 फीसदी हिस्सा दिया गया है. पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए किए गए बजट के विश्लेषण में कहा गया कि वीबी-जी राम जी को बजट में 95,692 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जो ग्रामीण विकास विभाग के कुल बजट का लगभग 40 फीसदी हिस्सा है.
वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रामीण विकास विभाग के कुल बजट में वीबी-जी-राम जी के 40 फीसदी और प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के लिए 23 फीसदी आवंटित किए गए हैं जिसे मिलाकर ग्रामीण विकास के लिए कुल आवंटन 63 फीसदी हो जाता है. वहीं, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को आठ-आठ फीसदी हिस्सा मिला है, जबकि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को चार फीसदी हिस्सा दिया गया है.
ग्रामीण विकास को कितने पैसे मिले
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ग्रामीण विकास मंत्रालय को 1,97,023 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान से चार फीसदी अधिक है. भूमि संसाधन विभाग को 2,654 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान से 51 फीसदी अधिक है. विभाग को मिले करीब 2 लाख करोड़ रुपये में से 1.25 लाख करोड़ का आवंटन तो सिर्फ राम जी और पीएम आवास योजना को ही दिए गए हैं.
क्या है मनरेगा योजना
5 सितंबर, 2005 को ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी देने के लिए इस योजना को लागू किया गया था. तब इसके तहत सालभर में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती थी. इसमें ग्रामीण क्षेत्र के अकुशल श्रमिकों को उनके रहने के 5 किलोमीटर के दायरे में काम दिया जाता है. साल 2024 में न्यूनतम मजदूरी भी रोजाना 374 रुपये कर दिया गया है. इस योजना के तहत करोड़ों ग्रामीणों युवाओं को अपने घर के पास ही काम मिला है.
क्या है जी रामजी योजना
विकसित भारत जी रामजी योजना एक तरह से मनरेगा का ही उन्नत संस्करण है. इस योजना को ग्रामीण इलाकों से युवाओं के पलायन को रोकने के लिए तैयार किया गया है. इसमें 100 के बजाय 125 दिनों का काम दिलाने की गारंटी दी जाती है. साथ ही भुगतान के तरीकों को भी ज्यादा आसान बनाया गया है. इस योजना के तहत श्रमिकों को हर सप्ताह पैसे का भुगतान कर दिया जाता है.







