प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए, जिन्हें इसराइल ने “पूर्व-निवारक हमला” बताया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता, राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के प्रमुख को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान” करार दिया और ईरानियों से अपील की कि वे अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें। ईरान ने जवाबी हमले किए, जिसमें इजराइल और अमेरिकी ठिकानों (जैसे बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात) को निशाना बनाया। इससे मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई, कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया और वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई।
यह हमला 2025 में हुए इजराइल-ईरान हवाई युद्ध का विस्तार है, जिसमें अमेरिका ने ईरान के परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने का दावा किया था। अब यह संघर्ष क्षेत्रीय स्तर पर फैल गया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जो वैश्विक तेल व्यापार का 20% संभालता है) युद्ध क्षेत्र बन गया।
भारत पर प्रभाव, मुश्किलें कैसे बढ़ीं ?
यह संघर्ष भारत के लिए बहुआयामी चुनौतियां पैदा कर रहा है। भारत ईरान से मजबूत रणनीतिक संबंध रखता है (जैसे चाबहार बंदरगाह), लेकिन अमेरिका और इसराइल से भी गहरे संबंध हैं। इस संतुलन को बनाए रखना अब मुश्किल हो गया है। भारत अपनी 80% से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें से लगभग 50% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। यह जलडमरूमध्य अब युद्ध क्षेत्र है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
तेल कीमतों में तेज उछाल (वर्तमान में $500 बिलियन वार्षिक व्यापार प्रभावित), जो भारत की मुद्रास्फीति बढ़ाएगा। निर्माण, परिवहन और रसद लागत बढ़ने से रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्र प्रभावित होंगे। शेयर बाजार में अस्थिरता, रुपये पर दबाव और विकास दर पर असर। भारत के तेल बिल में वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों की चिंता
ईरान, इजराइल और खाड़ी देशों (UAE, कुवैत, कतर) में लाखों भारतीय काम करते हैं। हमलों से इन क्षेत्रों में विस्फोट और मिसाइल हमले हो रहे हैं, जिससे भारतीयों की सुरक्षा खतरे में है। भारतीय दूतावास ने इजराइल और ईरान में भारतीयों को शेल्टर लेने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी। केरल सरकार (NORKA) ने प्रभावित भारतीयों के लिए हेल्पलाइन शुरू की। प्रवासियों से आने वाली रेमिटेंस (प्रवासी धन) प्रभावित हो सकती है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
परिवहन और उड़ानों में बाधा
हमलों से इजराइल, ईरान, इराक, जॉर्डन और UAE ने हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। एयर इंडिया की दिल्ली-तेल अवीव उड़ान को सऊदी हवाई क्षेत्र से वापस मुंबई लौटना पड़ा। उत्तर अमेरिका और यूरोप की उड़ानों में ईंधन स्टॉप की जरूरत पड़ सकती है, जिससे यात्रा समय और लागत बढ़ेगी। एयरलाइंस जैसे लुफ्थांसा, एयर फ्रांस और वर्जिन अटलांटिक ने मध्य पूर्व उड़ानें रद्द कीं। भारत-मध्य पूर्व व्यापार प्रभावित, शिपिंग लागत बढ़ने से निर्यात-आयात महंगा।
कूटनीतिक और रणनीतिक चुनौतियां
भारत ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह विकसित कर रहा है, जो मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करता है। संघर्ष से यह परियोजना खतरे में है, जबकि पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह लाभ उठा सकता है। भारत को अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच संतुलन बनाना मुश्किल। हाल के महीनों में भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करते हुए ईरानी टैंकरों को जब्त किया, जिससे ईरान से संबंध खराब हुए। पाकिस्तान ईरान सीमा का फायदा उठा सकता है, जबकि भारत की “स्वतंत्र विदेश नीति” पर सवाल उठ रहे हैं।
यह संघर्ष भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति को सीधे प्रभावित कर रहा है। सरकार ने प्रवासियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन लंबे संघर्ष से वैश्विक मंदी का खतरा है। भारत को शांति की अपील करनी चाहिए और विविध ऊर्जा स्रोतों (जैसे अमेरिकी LNG) पर ध्यान देना चाहिए। स्थिति तेजी से बदल रही है।







