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Home विश्व

ईरान से ‘दुश्मन’ मुल्‍क क्‍यों भाग रहे भारतीय?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 18, 2026
in विश्व
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Indians fleeing Iran
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नई दिल्ली: ईरान में जंग है. चारों ओर से मिसाइलों और फाइटर जेट्स की आवाज गूंज रही है. यह देखकर ईरान में रह रहे कुछ भारतीय सड़क के रास्ते पड़ोसी देशों आर्मेनिया और अजरबैजान भागने की कोशिश कर रहे हैं. मामला इतना गंभीर हो गया है कि भारतीय विदेश मंत्रालय को खुद सामने आकर लोगों को चेतावनी देनी पड़ी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा क‍ि कुछ भारतीय आर्मेनिया और अजरबैजान जाना चाह रहे हैं. हमारी उनसे अपील है कि कृपया ऐसा न करें. ईरान में भारतीय दूतावास ने भी एक सख्त एडवाइजरी जारी की है. सवाल ये क‍ि लोग अजरबैजान जैसे देश की तरफ क्यों जा रहे हैं, जिसके भारत के साथ रिश्ते बिल्कुल भी अच्छे नहीं हैं?

सबसे पहले समझते हैं कि ईरान में भारतीय दूतावास ने जो एडवाइजरी जारी की है, उसमें क्या कहा गया है. दूतावास ने साफ कहा है क‍ि कोई भी भारतीय नागरिक बिना दूतावास से बात किए या इजाजत लिए ईरान के जमीनी बॉर्डर की तरफ न जाए. अगर आपको ईरान से बाहर निकलना ही है, तो पहले दूतावास को बताइए और उनकी सलाह लीजिए.

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दूतावास ने साफ कहा है कि अगर आप ईरान का बॉर्डर पार कर लेते हैं और दूसरा देश जैसे अजरबैजान या आर्मेनिया आपको अपने देश में घुसने नहीं देता है, तो आप बीच में फंस जाएंगे. उस हालत में भारतीय दूतावास आपकी कोई मदद नहीं कर पाएगा. अगर कोई परेशानी है, तो सीधे दूतावास को फोन करें. इसके लिए उन्होंने कई मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जारी किए हैं.
अजरबैजान आखिर ‘दुश्मन’ देश क्यों है?

दरअसल, अजरबैजान, पाकिस्तान और तुर्की ये तीनों बहुत पक्के दोस्त हैं. जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा उठता है, तो अजरबैजान हमेशा पाकिस्तान का साथ देता है और भारत के खिलाफ बोलता है. दूसरी तरफ, अजरबैजान का अपने पड़ोसी देश आर्मेनिया के साथ खून-खराबे वाला युद्ध चल रहा है.

इस युद्ध में भारत आर्मेनिया का समर्थन करता है और उसे अपने हथियार भी बेचता है. साफ-साफ कहें तो अजरबैजान भारत का ‘दोस्त’ बिल्कुल नहीं है. वहां की सरकार और वहां की सेना भारतीयों को हमेशा शक की नजर से देखती है. ऐसे में अगर कोई भारतीय नागरिक सड़क के रास्ते, जंगलों या पहाड़ों से होते हुए चुपचाप अजरबैजान के बॉर्डर पर पहुंच जाए, तो उसे वहां गिरफ्तार किया जा सकता है.

तो फिर भारतीय वहां भाग क्यों रहे हैं?
सवाल ये है क‍ि अगर अजरबैजान से इतनी ही दुश्मनी है, तो लोग वहां जा ही क्यों रहे हैं? सबसे बड़ा कारण हैं वो ट्रैवल एजेंट जो लोगों को विदेश भेजने के नाम पर ठगते हैं. कई भारतीयों को एजेंटों ने यूरोप या रूस भेजने का सपना दिखाया होता है. एजेंट उन्हें बताते हैं कि ईरान से सड़क के रास्ते आर्मेनिया या अजरबैजान जाना बहुत आसान है और वहां से वे आसानी से यूरोप जा सकेंगे. इसे डंकी रूट भी कहा जाता है. भोले-भाले लोग इन एजेंटों की बातों में आकर अपनी जान खतरे में डाल लेते हैं.

ईरान जंग की वजह से फ्लाइट्स बंद हैं. इससे हवाई उड़ानों के टिकट बहुत महंगे हो गए हैं. तमाम फ्लाइट कैंसिल हैं. ऐसे में जो लोग घबरा रहे हैं, वे सोच रहे हैं कि बस या टैक्सी पकड़कर सड़क के रास्ते ही बॉर्डर पार कर लें. उन्हें लगता है कि जैसे भारत में एक राज्य से दूसरे राज्य में बस से चले जाते हैं, वैसे ही दूसरे देश में भी चले जाएंगे. लेकिन असली दुनिया में ऐसा नहीं होता.
फंस गए तो किस तरह की मुसीबत?

नो-मैन्स लैंड में फंसने का डर: जब आप सड़क के रास्ते किसी देश का बॉर्डर पार करते हैं, तो एक ऐसा इलाका आता है जो न इस देश का होता है, न उस देश का. इसे नो-मैन्स लैंड कहते हैं. मान लीजिए आपने ईरान का बॉर्डर पार कर लिया. अब आप आगे बढ़े और अजरबैजान के बॉर्डर पर पहुंचे. वहां के सैनिकों ने आपका भारतीय पासपोर्ट देखा और आपको अंदर घुसने से मना कर दिया. अब आप वापस मुड़ेंगे. लेकिन ईरान वाले कहेंगे कि आपकी वीजा की मियाद खत्म हो गई है, इसलिए वे भी आपको वापस अंदर नहीं आने देंगे. अब आप बीच सड़क पर फंस गए. न आगे जा सकते हैं, न पीछे. वहां न खाना मिलेगा, न पानी, न मोबाइल का नेटवर्क आएगा. भारतीय दूतावास ने इसी स्थिति से बचने के लिए सख्त चेतावनी दी है.

जासूस समझकर जेल में डाल देंगे: अजरबैजान भारत को शक की नजर से देखता है. अगर आप बिना सही वीजा और कागजातों के उनके बॉर्डर पर पकड़े गए, तो वे आपको सीधा घुसपैठिया या जासूस समझ सकते हैं. अजरबैजान की जेलों में एक बार कोई विदेशी चला जाए, तो वहां से उसे छुड़ाना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि वहां भारत सरकार की पहुंच बहुत सीमित हो जाती है.

मौसम और लुटेरों का डर: ईरान और इन देशों का बॉर्डर पहाड़ी और जंगली है. वहां का मौसम बहुत खराब रहता है. वहां कड़ाके की ठंड और बर्फबारी होती है. इसके अलावा, ऐसे बॉर्डर वाले इलाकों में मानव तस्करों और लुटेरों के गिरोह सक्रिय रहते हैं. वे लोगों का पैसा, पासपोर्ट सब छीनकर उन्हें मरने के लिए छोड़ देते हैं.

ईरान का इन देशों के साथ कैसा बॉर्डर एग्रीमेंट है?
अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर कोई खुली सड़क नहीं होती. ईरान के उत्तर में आर्मेनिया और अजरबैजान, दोनों देशों के बॉर्डर लगते हैं. ईरान और आर्मेनिया आपस में अच्छे दोस्त हैं. लेकिन इनका बॉर्डर बहुत छोटा लगभग 40-45 किलोमीटर है और बहुत ही खतरनाक पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है. वहां सिर्फ एक मुख्य रास्ता नोरदुज बॉर्डर है. वहां चेकिंग बहुत सख्त होती है.

ईरान और अजरबैजान का बॉर्डर: ईरान और अजरबैजान का बॉर्डर काफी लंबा है, लेकिन इन दोनों देशों के आपस में भी रिश्ते बहुत तनावपूर्ण रहते हैं. अजरबैजान के बॉर्डर पर हमेशा सेना मुस्तैद रहती है. इन देशों के बीच बॉर्डर पार करने के लिए सख्त बॉर्डर एग्रीमेंट हैं. इसका मतलब है कि सिर्फ वही इंसान सड़क के रास्ते बॉर्डर पार कर सकता है जिसके पास पहले से उस देश का पक्का वीजा हो, सारे सरकारी कागज हों और सीमा पर मौजूद अधिकारियों से उसे मंजूरी मिले. आप बस अपना झोला उठाकर पैदल या टैक्सी से बॉर्डर पार नहीं कर सकते.

 

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