सतीश मुखिया ( विशेष रिपोर्ट )
मथुरा : मां पीतांबरा की शक्तिपीठ के लिए प्रसिद्ध दतिया, मध्य प्रदेश आजकल वहां हुए उप चुनाव के कारण ज्यादा चर्चा में है। दतिया की इस शक्तिपीठ में मां बगलामुखी और धूमावती माता का मंदिर है जिसे राजसत्ता और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के द्वारा कांग्रेस विधायक को अयोग्य घोषित होने के बाद इस विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 6 बार के विधायक और पूर्व गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर उनके स्थान पर एक नया प्रयोग करते हुए आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी दतिया जिले के जिला अध्यक्ष सहित सभी संगठनों ने सामूहिक रूप से के इस्तीफा दे दिया और झांसी दतिया हाईवे पर रात पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा भारी जन आक्रोश और भारी बवाल किया।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा समझा बुझाने के बाद इन लोगों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार किया लेकिन दो दिन पहले जब उपचुनाव का परिणाम घोषित हुआ जिस में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह द्वारा भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को एक बार फिर से चुनाव में लगभग 6500 मतो से पटखनी दे दी। जिससे मध्य प्रदेश राज्य में सत्ता सीन भारतीय जनता पार्टी में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बैठक बुलाते हुए बीते कल दतिया जिला अध्यक्ष सहित सभी मंडल और संगठनों के पदों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया।
भारतीय जनता पार्टी और मध्य प्रदेश का आपस में गहरा नाता है या यूं कहैं कि भारतीय जनता पार्टी की शुरुआत ही मध्य प्रदेश से हुई इसको बनाने में राजमाता विजय राजे सिंधिया, सुंदरलाल पटवा, कुशा भाऊ ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेई और न जाने कितने अनगिनत नेताओं ने अपना प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष जीवन समर्पित कर दिया। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के संगठन को सबसे अधिक संगठित माना जाता है लेकिन हाल के दिनों में देखने में आया है कि पार्टी द्वारा अचानक से कुछ ऐसे फैसले लिए गए जिनका पार्टी के अंदर और पार्टी के बाहर धरातल पर पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा भारी मन से विरोध किया जा रहा है इसका एक उदाहरण दतिया विधानसभा से पिछला चुनाव हारे प्रत्याशी का रहा, जो कि इस उप चुनाव की तैयारी कर रहे थे।
इस उपचुनाव में उनका टिकट काटकर नए प्रत्याशी को मैदान में उतारा और मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन के कार्यकर्ताओं को यह समझाने में नाकामयाब रही कि उन्होंने टिकट क्यों काटा जिसका परिणाम भारतीय जनता पार्टी को दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के रूप में झेलना पड़ा। चुनाव में हार जीत लगी रहती है हार जीत लोकतंत्र का हिस्सा है चिंतन होगा मंथन होगा बैठके होगी और मध्य प्रदेश इकाई द्वारा दतिया के सभी संगठनों को भंग करके नए संगठन के निर्माण हेतु आगे कदम बढ़ा दिया गया है लेकिन जहन में यह सवाल तो हमेशा बना ही रहेगा कि जहां पार्टी का संगठन भारतीय जनता पार्टी को अपनी मां मानता है और उसके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है वह कार्यकर्ता आज दतिया में इस तरह खुले आम बगावत क्यों कर रहा है।
क्या पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जमीनी हालात नहीं पता है या पसंद और ना पसंद होने के कारण किसी भी व्यक्ति को आप अचानक राजनीति से जबरन रिटायर कर देंगे कि अब आप घर जाइए जबकि उस व्यक्ति के द्वारा अपना समस्त जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया गया। भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी से रिटायर होने के लिए 75 वर्ष का पैमाना रखा है और युवाओं को मौका मिलना चाहिए इसमें कोई दो राय नहीं है इसी कड़ी में रघुनंदन शर्मा जो भारतीय जनता पार्टी से पूर्व राज्यसभा सांसद रहे और उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को आगे लाने के लिए तीन चुनाव के बाद में कोई भी प्रत्याशी हो उसको हटा देना चाहिए और नए लोगों को लाना चाहिए लेकिन सवाल फिर वही उठता है कि कुछ विशेष लोगों को ही हटाना है या यह पैमाना सभी लोगों पर लागू होगा।
दूसरी तरफ टुकड़ों में बंटी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को ऑक्सीजन मिली जो कि खुद वेंटिलेटर पर है । मध्य प्रदेश कांग्रेस इकाई द्वारा अपने अंतर विरोधों को दरकिनार कर इस उप चुनाव में अपने आप को संगठित किया और पार्टी के प्रत्याशी घनश्याम सिंह को विजय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ऐसा नहीं है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में आपस में मतभेद नहीं है वहां तो इतने मतभेद हैं कि एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते लेकिन उन्होंने मौके का फायदा उठाते हुए मौके पर चौका मार दिया और चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी (काशीराम ) ने भी इस चुनाव में अपना दम दिखाया और उनका प्रत्याशी लगभग 20000 वोट लाते हुए तीसरे नंबर पर रहा।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस हार को किस रूप में लिया जाता है यह देखने वाली बात होगी क्या वह अपने रूठे कार्यकर्ताओं से बात करने को तैयार होगी या फिर वही कांग्रेसी सिस्टम अपनाते हुए कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं पर अपना फैसला थोप देगी। इस उपचुनाव पर पूरे मध्य प्रदेश सहित देश की निगाह थी और इसका दूरगामी असर होना तय हैं, समय रहते जाग गये तो ठीक अन्यथा राज्य की सत्ता से बाहर होने का रास्ता इस उप चुनाव से होकर ही निकलेगा ऐसा परिस्थितियां आभास दे रही है।







