नई दिल्ली। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली में ‘एआई के युग में औद्योगिक संबंधों और कार्यस्थल भागीदारी का पुनर्निर्माण’ विषय पर आयोजित औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026 के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि सतत आर्थिक विकास के लिए उद्योग और कार्यबल को साझेदार के रूप में साथ-साथ आगे बढ़ना होगा। सम्मेलन का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारत के नियोक्ता महासंघ (EFI) ने किया।
316 जिलों के औद्योगिक क्लस्टरों में चलेगा ‘श्रम संवाद’
डॉ. मांडविया ने घोषणा की कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय श्रम संहिताओं को लेकर ‘श्रम संवाद’ नाम से व्यापक जागरूकता अभियान शुरू कर रहा है। अगले 90 दिनों में यह अभियान सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 316 जिलों के औद्योगिक क्लस्टरों को कवर करेगा। उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ हितधारकों के बीच संवाद और परामर्श को लगातार मजबूत करना जरूरी है।
‘जहां संवाद है, वहां समाधान है’
केंद्रीय मंत्री ने औद्योगिक संबंधों को मजबूत करने के लिए नियोक्ताओं, श्रमिकों और अन्य हितधारकों के बीच निरंतर संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “जहां संवाद है, वहां समाधान है।” उन्होंने सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और उन्हें अपनाने की आवश्यकता बताई, ताकि उद्योग और श्रमिकों के हितों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके।
एआई से रोजगार के नए अवसर
डॉ. मांडविया ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशाल अवसर खोल रही है और भारत के युवाओं को एआई, स्वचालन, रोबोटिक्स तथा अन्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित करने की घोषणा की गई है।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज में विस्तार
केंद्रीय मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 2015 में यह आबादी के 19% के स्तर पर था, जो अब बढ़कर 101 करोड़ लोगों यानी आबादी के 68% तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस विस्तार को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी मान्यता दी है।
उद्योग और श्रमिकों को साझेदार बनाने पर जोर
मनसुख मांडविया ने उद्योग-अनुकूल नीतियों को श्रम-विरोधी और श्रमिक हितों को उद्योग-विरोधी मानने वाली पारंपरिक सोच में बदलाव की आवश्यकता बताई। उन्होंने उद्योग और श्रमिकों को राष्ट्र-निर्माण में साझेदार के रूप में साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
आर्थिक वृद्धि और रोजगार
केंद्रीय मंत्री ने भारत की 7.8% जीडीपी वृद्धि का उल्लेख करते हुए सरकार की व्यापक आर्थिक नीतियों को मजबूत आर्थिक वृद्धि का आधार बताया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। उनके अनुसार, 2017-23 के दौरान अर्थव्यवस्था में प्रत्येक 1% वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11% की वृद्धि हुई, जबकि पहले यह आंकड़ा 0.008% था।
विकसित भारत 2047 के लिए सामूहिक प्रयास
डॉ. मांडविया ने सभी हितधारकों से सतत आर्थिक विकास, रोजगार के अवसरों के विस्तार और गरिमापूर्ण कार्यबल को केंद्र में रखते हुए विकसित भारत 2047 की दृष्टि को साकार करने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया।







