नई दिल्ली। इस बार दिवाली के जश्न और रोशनी के बीच मौसम का मिजाज बिगड़ गया है. समुद्र में सेमपाका नाम का एक खतरनाक तूफान उठ चुका है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह करने की तैयारी में है. मौसम विभाग ने भारी तबाही की आशंका जताते हुए चेतावनी जारी कर दी है, क्योंकि ये बड़ा खतरा अब तेजी से रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है. बताया जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटे सबसे मुश्किल होने वाले हैं. इस तूफान की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसकी पावर घर बीतते सेकेंड्स के साथ बढ़ने वाली है.
कहां आ रहा है तूफान सोमपाका?
प्रशांत महासागर के एक खास हिस्से में लंबे समय से सुलग रहा मौसम का ये सुलगता हुआ गोला अब पूरी तरह फट पड़ा है. मारियाना द्वीप समूह के ऊपर गहराए एक जबरदस्त ट्रॉपिकल डिप्रेशन ने अब एक खूंखार चक्रवाती तूफान यानी ‘टाइफून सेमपाका’ का रूप धारण कर लिया है. जैसे-जैसे ये सिस्टम आगे बढ़ रहा है, समुद्र का गर्म पानी और वहां की हवाएं इसे और ज्यादा ताकतवर बनाती जा रही हैं.
शनिवार दोपहर 12 बजे जैसे ही मौसम की रिपोर्ट सामने आई, वैज्ञानिकों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गईं क्योंकि ये तूफान हर बीतते घंटे के साथ और अधिक आक्रामक और शक्तिशाली होता जा रहा है.
हवाओं की खौफनाक रफ्तार: जानिए किस कदर कहर बरपाएंगी ये हवाएं!
जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो हवा की एक-एक रफ्तार मौत का पैगाम बनकर आती है. टाइफून सेमपाका की मौजूदा स्थिति और इसकी ताकत को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को मिट्टी में मिला देने की पूरी ताकत रखता है.
तूफान की तेज रफ्तार: ये खूंखार सिस्टम इस समय लगभग 35 किलोमीटर प्रति घंटे की बेकाबू रफ्तार से पश्चिम दिशा की ओर तेजी से दौड़ रहा है. जब कोई चक्रवात इतनी रफ्तार से भागता है, तो वहां के प्रशासन और लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता!
केंद्र के पास का प्रहार: इस तूफान के ठीक बीच यानी केंद्र के पास बहने वाली लगातार हवाओं की ताकत 18 मीटर प्रति सेकंड यानी करीब 64.8 किलोमीटर प्रति घंटा मापी जा चुकी है. इतनी रफ्तार तो आम दिनों में ही बड़े-बड़े टीन शेड उड़ाने के लिए काफी होती है.
मौत के झोंके: सामान्य हवाओं से भी ज्यादा खतरनाक इसके वो अचानक आने वाले झोंके हैं जो किसी छप्पर या दीवार को एक झटके में गिरा सकते हैं. इस वक्त इसके केंद्र के आसपास हवा के ये घातक झोंके 25 मीटर प्रति सेकंड यानी पूरे 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से थप्पड़ मार रहे हैं!
आने वाले 48 घंटों में और बढ़ेगा खतरा: आने वाले समय में ये शक्ति कई गुना बढ़ने वाली है. मौसम के आंकड़ों की मानें तो रविवार की मध्यरात्रि (12 AM) तक ये जब ओगासावारा द्वीप समूह के पास पहुंचेगा, तब इसका केंद्रीय दबाव गिरकर 1,000 हेक्टोपास्कल रह जाएगा और इसके झोंकों की रफ्तार बढ़कर सीधे 30 मीटर प्रति सेकंड यानी 108 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा पहुंचेगी! 100 की स्पीड से चलने वाली ये हवाएं बस्तियों की बस्तियां उजाड़ने की ताकत रखती हैं.
तबाही का महा-दायरा: सैकड़ों किलोमीटर तक पसरेगा मौत का साया!
क्या ये तबाही सिर्फ वहीं तक सीमित रहेगी जहां इसका केंद्र है? बिल्कुल नहीं! इस टाइफून का सबसे डरावना सच ये है कि इसका असर बहुत बड़े भौगोलिक इलाके को अपनी चपेट में लेने वाला है. 15 मीटर प्रति सेकंड यानी 54 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार वाली खतरनाक हवाएं इसके केंद्र से मीलों दूर तक तांडव मचा रही हैं.
उत्तर दिशा का फैलाव: तूफान के केंद्र से उत्तर की तरफ लगभग 280 किलोमीटर की विशाल दूरी तक ये तूफानी हवाएं कोहराम मचा रही हैं.
दक्षिण दिशा का फैलाव: वहीं दूसरी ओर, केंद्र से दक्षिण दिशा में भी 165 किलोमीटर के दायरे तक इसका भयंकर असर साफ देखा जा रहा है.
इसका मतलब साफ है कि अगर कोई इलाका इस तूफान के मुख्य केंद्र से 200 से 250 किलोमीटर दूर भी बसा है, तो भी वो सुरक्षित नहीं है. वहां भी 50 से 60 की स्पीड से चलती हवाएं, भारी बारिश और समुद्र का ज्वार तबाही मचाने के लिए काफी होगा.
कैसे तबाही मचा सकता है तूफान?
108 किलोमीटर प्रति घंटे की पागल रफ्तार से चलने वाले ये झोंके और मीलों तक फैला इसका दायरा किस-किस तरह से बर्बादी ला सकता है.
कच्चे और कमजोर घर: तटीय इलाकों में बनी झोपड़ियां, टिन या एस्बेस्टस की छत वाले मकान इस आंधी के सामने ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएंगे. हवाएं छतों को ऐसे उड़ा ले जाएंगी जैसे कागज के टुकड़े हों.
होर्डिंग्स और साइनबोर्ड्स: शहरों में लगे बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड, लोहे के फ्रेम और सोलर पैनल उखड़कर सड़कों और लोगों के ऊपर आ गिरेंगे, जिससे बचना नामुमकिन हो जाएगा.
बड़ी इमारतों के टूटे कांच: तेज हवा के दबाव और उसमें उड़कर आते भारी मलबे की टक्कर से गगनचुंबी इमारतों की कांच की खिड़कियां चकनाचूर हो जाएंगी.
बिजली के खंभों का धराशायी होना: 70 से 100 किमी/घंटा की ये आंधियां बिजली के बड़े-बड़े ट्रांसमिशन टावरों और कंक्रीट के खंभों को जड़ से उखाड़कर फेंक देंगी. इससे पूरे इलाके में हफ्तों के लिए भयंकर ब्लैकआउट छा जाएगा.
संचार व्यवस्था ध्वस्त: मोबाइल टावर और इंटरनेट की अंडरग्राउंड या ऑप्टिकल फाइबर लाइनें टूटने से संपर्क पूरी तरह कट जाएगा, जिससे बाहर की दुनिया से मदद मांगना भी बंद हो जाएगा.
सदियों पुराने पेड़ जमींदोज: इस रफ्तार की हवाएं दशकों पुराने विशालकाय पेड़ों को उनकी जड़ों समेत उखाड़कर जमीन पर सुला देंगी.
रास्तों का ब्लॉक होना: ये गिरे हुए पेड़ मुख्य मार्गों, हाईवे और पटरियों पर ऐसे बिछ जाएंगे कि एम्बुलेंस या राहत दल का निकलना भी असंभव हो जाएगा.
समुद्र का रौद्र रूप और तूफानी लहरें
ऊंची-ऊंची लहरें: कम वायुमंडलीय दबाव के चलते समुद्र का पानी उफनकर कई मीटर ऊंची दीवारों जैसी खतरनाक लहरों के रूप में तटीय इलाकों पर टूट पड़ेगा.
बस्तियों का जलमग्न होना: ये समुद्र का खारा पानी तटीय बस्तियों में ऐसे घुसेगा कि सब कुछ डुबो देगा. बड़े-बड़े जहाज और छोटी नावें खिलौनों की तरह पलट जाएंगी.
मूसलाधार बारिश और खौफनाक भूस्खलन
आसमान से बरसता कहर: अपने साथ नमी का पहाड़ लेकर चल रहा ये चक्रवात कुछ ही घंटों में इतनी भारी बारिश कराएगा कि चारों तरफ पानी ही पानी नजर आएगा.
पहाड़ों का खिसकना: पहाड़ी और द्वीपीय इलाकों में लगातार बारिश से मिट्टी पूरी तरह गीली होकर ढीली पड़ जाएगी, जिससे अचानक लैंडस्लाइड होगा और सोते हुए लोग मलबे में दफन हो जाएंगे.
हाई अलर्ट और प्रशासन की तैयारी
इस भीषण खतरे को भांपते हुए जापान मौसम विज्ञान एजेंसी की चेतावनी के बाद ओगासावारा और आसपास के तमाम इलाकों में युद्धस्तर पर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. रविवार की मध्य तक इस आफत के मुहाने पर पहुंचने की आशंका के चलते कड़े कदम उठाए जा रहे हैं.
समुद्र में जाने पर पूरी पाबंदी: मछुआरों और नाविकों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वे अपनी नावें सुरक्षित जगह बांध दें और भूलकर भी पानी की तरफ न जाएं.
लोगों को सुरक्षित निकालना: तटीय और ढलान वाले खतरनाक इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित शेल्टर होम में शिफ्ट किया जा रहा है.
आपातकालीन टीमों की तैनाती: राहत और बचाव कार्य चलाने के लिए आपदा टीमों और भारी मशीनों को अभी से मुस्तैद कर दिया गया है ताकि तबाही के तुरंत बाद मोर्चा संभाला जा सके.
ये टाइफून सेमपाका सिर्फ एक आम मौसमी घटना नहीं है, बल्कि इंसानी दुनिया के सामने प्रकृति का एक बेहद डरावना इम्तिहान है. मारियाना से शुरू होकर ओगासावारा की तरफ बढ़ता ये तूफान अपने साथ 108KMPH की रफ्तार से मौत और बर्बादी का सामान लेकर आ रहा है.
हालांकि कुदरत के इस तांडव को पूरी तरह रोकना किसी के बस में नहीं है, लेकिन समय रहते चेते गए संकेतों और प्रशासन की मुस्तैदी से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है. आने वाले 48 घंटे इन इलाकों के लोगों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का सबसे कड़ा इम्तिहान साबित होने वाले हैं!







