ऊखीमठ। हिमालय की मनोरम वादियों में स्थित तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर इन दिनों श्रद्धा, अध्यात्म और प्रकृति प्रेमियों का आकर्षण बना हुआ है। कपाट खुलने के बाद से 35 दिनों में 47 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर चुके हैं।
तीर्थ यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या से सम्पूर्ण तुंगनाथ घाटी में धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियां तेज हो गईं हैं, जिससे स्थानीय कारोबारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन तुंगनाथ धाम पहुंच रहे हैं। सुबह से ही यात्रा मार्ग पर भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है। श्रद्धालु चोपता से लगभग साढ़े तीन किमी की पैदल यात्रा तय कर बाबा तुंगनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं।
धाम में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक एवं भगवान शिव के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु विश्व शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामनाओं के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
यात्रा सीजन के चलते चोपता, दुगलबिट्टा, भुजगली समेत पूरे क्षेत्र के होटल, लाज, रेस्टोरेंट और स्थानीय दुकानें गुलजार हो उठी हैं। स्थानीय युवाओं को घोड़ा-खच्चर संचालन, होटल व्यवसाय और अन्य पर्यटन गतिविधियों से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस बार यात्रा सीजन क्षेत्र की आर्थिकी के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है।
वहीं प्रकृति प्रेमी और ट्रेकिंग के शौकीन पर्यटक भी बड़ी संख्या में तुंगनाथ और चंद्रशिला पहुंच रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र मैठाणी ने सरकार से तुंगनाथ यात्रा मार्ग पर पार्किंग, शौचालय, पेयजल एवं कूड़ा निस्तारण जैसी स्थायी सुविधाओं के विस्तार की मांग की है।
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने कहा कि आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य के अद्भुत संगम के रूप में विख्यात तुंगनाथ धाम इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आ रहा है।







