नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि तिथि और सावन दोनों ही भोलेनाथ को विशेष रूप से प्रसन्न करते हैं। इस बार सावन में सोम प्रदोष और भौम प्रदोष का संयोग बन रहा है। प्रदोष व्रत से नकारात्मकता दूर होती है, मानसिक शांति मिलती है और संतान, स्वास्थ्य, धन तथा करियर से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं सावन 2026 के दोनों प्रदोष व्रत की पूरी जानकारी।
सावन में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व
सावन में प्रदोष व्रत का फल सामान्य महीनों से कहीं ज्यादा माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस समय की गई पूजा पापों का क्षय करती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि लाती है। सावन के दोनों प्रदोष व्रत भक्तों के लिए विशेष अवसर हैं। सच्ची श्रद्धा से व्रत रखने वाले लोगों पर शिव जी की कृपा जरूर पड़ती है।
सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026
सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 को सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन सोमवार व्रत और प्रदोष व्रत का महासंयोग बन रहा है। सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 10 अगस्त को सुबह 8 बजे शुरू होकर 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे समाप्त होगी। प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 6:37 से रात 8:48 बजे तक रहेगा। सोम प्रदोष में शिव आराधना करने से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख मिलता है। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
भौम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026
सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026 को मंगलवार को है। सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी सुबह 6:20 बजे शुरू होकर अगले दिन 26 अगस्त को सुबह 7:59 बजे समाप्त होगी। प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 6:24 से रात 8:39 बजे तक रहेगा। शिव पुराण के अनुसार, भौम प्रदोष साहस, ऋण मुक्ति और कष्टों से राहत देने वाला व्रत है। मंगल ग्रह से जुड़े दोष शांत होते हैं और भूमि संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान करके संकल्प लें और भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, गंगाजल और पंचामृत से करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें। प्रदोष काल में विशेष पूजा करें क्योंकि यही सबसे शुभ समय है। ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ भी करें। क्षमता अनुसार, दान-पुण्य करें और दिनभर संयम तथा सकारात्मक विचार रखें।
व्रत के दिन सावधानियां और लाभ
प्रदोष व्रत के दिन फलाहार या सात्विक भोजन करें। अहंकार छोड़कर सच्ची श्रद्धा से पूजा करने से शिव जी की कृपा अवश्य मिलती है। यह व्रत स्वास्थ्य, धन, करियर और संतान सुख के लिए अचूक माना जाता है। सही मुहूर्त में पूजा करने से फल कई गुना बढ़ जाता है। सावन के दोनों प्रदोष व्रत को न चूकें। भोलेनाथ की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।







