नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के दौर में UPI ने दुकानदारों और ग्राहकों के लेन-देन को बेहद आसान बना दिया है. हालांकि, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% एमडीआर (MDR) लागू होने से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. हर कारोबारी की चाहत यही होती है कि उसे डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिलती रहे और प्रोसेसिंग कॉस्ट भी कंट्रोल में रहे.
अक्सर छोटे व्यापारी अपने बैंक अकाउंट से जुड़ा पर्सनल क्यूआर कोड यूज करते हैं. पर्सन टू पर्सन (P2P) वाले ट्रांसफर पर नॉर्मल एमडीआर (MDR) लागू नहीं होता. हालांकि, कमर्शियल पेमेंट को जानबूझकर पर्सनल ट्रांजेक्शन के रूप में दिखाना नियमों का साफ उल्लंघन है. कारोबारियों को अपने बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के निर्देश के अनुसार QR कोड का सिलेक्शन करना चाहिए. अगर आपका भी बिजनेस है तो आप यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर से किस तरह बच सकते हैं? आइए जानते हैं-
पर्सनल QR कोड का समझदारी से यूज
अक्सर छोटे कारोबारी अपने बैंक अकाउंट से जुड़ा पर्सनल क्यूआर कोड यूज करते हैं. पर्सन टू पर्सन (P2P) वाले ट्रांसफर पर सामान्य मर्चेंट MDR लागू नहीं होता. हालांकि, कमर्शियल पेमेंट को जानबूझकर पर्सनल ट्रांजेक्शन के रूप में दिखाना नियमों का उल्लंघन हो सकता है. कारोबारियों को अपने बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के दिशा-निर्देश के अनुसार ही QR कोड को सिलेक्ट करना चाहिए.
छोटे पेमेंट के लिए UPI Lite का यूज
कम राशि के रेगुलर ट्रांजेक्शन को आसान बनाने के लिए UPI Lite एक बेहतरीन जरिया है. इसमें हर छोटे पेमेंट के लिए बैंक सर्वर पर दबाव नहीं पड़ता. हालांकि, इसे केवल बड़े पेमेंट पर लगने वाले एमडीआर (MDR) से बचने के उपाय के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इसका मकसद छोटी रकम के पेमेंट को तेजी से और बिना रुकावट के पूरा करना है.
बड़े बिल को छोटे-छोटे पार्ट में करना
5,000 या 10,000 रुपये की बड़ी राशि को 2,000 रुपये से कम के पार्ट में बांटकर करना एक विकल्प हो सकती है. लेकिन हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन लिमिट से बचने की यह कोशिश कुछ मामलों में रिस्की भी हो सकती है. सिर्फ फीस से बचने के लिए कृत्रिम रूप से बिल को कई टुकड़ों में बांटना मर्चेंट के लिए पेनाल्टी का कारण बन सकता है. इसलिए ऐसा करने से पहले पेमेंट एग्रीगेटर की शर्तों को समझना जरूरी है.
सीधे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर का ऑप्शन
दुकानदार ग्राहकों से सीधे बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने के ऑप्शन पर विचार कर सकते हैं. इसमें UPI अकाउंट-टू-अकाउंट के अलावा IMPS या NEFT जैसी सर्विस का यूज किया जा सकता है. इस तरीके से पेमेंट एग्रीगेटर या मर्चेंट वॉलेट के जरिये लगने वाले एक्सट्रा चार्ज से बचा जा सकता है. हालांकि, बैंक की तरफ से लगाए जाने वाले सर्विस चार्ज की पहले से जांच कर लेनी चाहिए.
स्टैटिक QR से डिवाइस रेंटल की बचत
यह जरूरी नहीं कि हर छोटे कारोबारी को महंगा प्वाइंट ऑफ सेल (POS) सिस्टम या साउंडबॉक्स लगाने की जरूरत हो. साधारण बैंक स्टैटिक QR कोड का यूज करके डिवाइस रेंटल और मंथली मेंटेनेंस फीस से आसानी से बचत की जा सकती है. हालांकि, एमडीआर (MDR) का लगना महज इस बात पर निर्भर नहीं करता कि QR कोड स्टैटिक है या डायनेमिक, बल्कि यह मर्चेंट की रजिस्टर्ड कैटेगरी पर निर्भर करता है.






