नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील देशों को आर्थिक और तकनीकी मदद देने के वादे पर विकसित देशों को जमकर सुनाया। उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने दशकों तक दुनिया के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन विकासशील देशों की मदद करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी नहीं की।
बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में एक गोलमेज चर्चा को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि विकसित देशों और यूरोपीय संघ को बताना चाहिए कि उन्होंने जलवायु फंडिंग से जुड़े अपने वादे को पूरा करने के लिए क्या किया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गरीब देशों के हित में खूब आवाज उठाई। उन्होंने यूरोपीय पैनल से साफ कहा कि आप खुद तो कार्बन उत्सर्जन करके अमीर हो गए लेकिन अब आप गरीब देशों पर प्रतिबंध चाहते हैं। उन्होंने कहा कि 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान विकासशील देशों की मदद के लिए हर साल 100 अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई गई थी, लेकिन 11 साल बाद भी इस दिशा में कोई ठोस मदद नहीं मिली।
‘सिर्फ वादे किए गए, 11 साल बाद भी कुछ नहीं मिला’
पीयूष गोयल ने कहा कि 2015 में पेरिस में आयोजित जलवायु सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों को एकजुट करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई थी।
गोयल के मुताबिक, उस समय यह सहमति बनी थी कि विकसित देश विकासशील और कम विकसित देशों के साथ-साथ प्रशांत और कैरेबियाई क्षेत्र के द्वीपीय देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेंगे। इसके लिए हर साल 100 अरब डॉलर देने का लक्ष्य रखा गया था। उन्होंने कहा, ‘‘11 साल बाद भी हमें उसकी फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। सिर्फ वादे किए गए।’’ वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ और कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) से जुड़े सवालों का भी पर्याप्त जवाब नहीं मिला है।
2009 में किया गया था 100 अरब डॉलर देने का वादा
जलवायु वित्त को लेकर विकसित देशों की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए गोयल ने पहले किए गए वादों की ओर ध्यान दिलाया। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के तहत 2009 में कोपेनहेगन में आयोजित कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी15) में विकसित देशों ने विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 2020 तक संयुक्त रूप से हर साल 100 अरब डॉलर जुटाने की प्रतिबद्धता जताई थी।
हालांकि, विकसित देश इस लक्ष्य को समय पर पूरा नहीं कर सके। इसके बाद 2015 में पेरिस में आयोजित सीओपी21 के दौरान इस लक्ष्य को 2025 तक जारी रखने का फैसला किया गया था। गोयल ने कहा कि विकसित देश अब भी कम विकसित देशों की जरूरतों को पूरा करने और उन्हें कार्बन उत्सर्जन घटाने के प्रयासों में पर्याप्त सहयोग देने में नाकाम रहे हैं।







