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Home राज्य

तेंदुए के साए में पढ़ाई… कपकोट के बच्चों की जान पर भारी सरकारी लापरवाही ?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 22, 2026
in राज्य
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तेंदुए
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प्रकाश मेहरा
उत्तराखंड डेस्क


बागेश्वर : उत्तराखंड के बागेश्वर ज़िले की कपकोट विधानसभा से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पंतक्वेराली ने बच्चों और अभिभावकों के लिए अपील जारी की है कि तेंदुए की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए छात्र झुंड में स्कूल आएं-जाएं और कोई भी बच्चा अकेला न निकले। लेकिन सवाल यह है कि क्या बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुँचाने की जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता और खुद बच्चों की है ?

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कपकोट क्षेत्र के कई गांवों में स्कूल जाना आज भी सिर्फ किताबें लेकर निकलना नहीं है। यहां बच्चे पीठ पर बस्ता और हाथ में लाठी या दरांती लेकर निकलते हैं, ताकि रास्ते में किसी जंगली जानवर से सामना हो जाए तो खुद को बचा सकें। जंगल से होकर गुजरने वाले रास्तों पर हर कदम के साथ डर चलता है। यह कोई पोस्टर या प्रतीकात्मक तस्वीर नहीं, बल्कि पहाड़ की रोज़मर्रा की हकीकत है।

जब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी जान की सुरक्षा की तैयारी करने को मजबूर हों, तो यह सिर्फ शिक्षा का नहीं — शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता का मुद्दा बन जाता है।

क्या पहाड़ी क्षेत्रों में स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता नहीं है ? वन विभाग और शिक्षा विभाग मिलकर स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाल पा रहे ? क्या बच्चों को जान जोखिम में डालकर शिक्षा पाने को मजबूर करना संविधान के अधिकारों का उल्लंघन नहीं है ? क्या अब किसी बड़े हादसे का इंतज़ार किया जा रहा है ?

सरकार और प्रशासन से मांग है कि कपकोट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में “बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की जाए। स्कूल जाने वाले मार्गों पर वन विभाग की निगरानी बढ़ाई जाए। प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं। वरना यह सवाल सिर्फ कपकोट का नहीं रहेगा — यह पूरे पहाड़ की व्यवस्था पर सवाल बन जाएगा।

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