नई दिल्ली। सावन के महीने में देशभर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। शिव भक्त गंगाजल लेकर लंबी पैदल यात्रा करते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि कांवड़ में लाया गया जल बेहद पवित्र और शुभ होता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि कांवड़ का जल घर में कहां रखना चाहिए? इसे रखते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है और इस पवित्र जल से जलाभिषेक करने की सही विधि क्या है?
घर में यहां रखें कांवड़ का जल
मान्यता के अनुसार कांवड़ का जल सिर्फ पानी नहीं बल्कि गंगाजल और शिव भक्ति का प्रतीक है। ऐसे में हमें इसे घर के अंदर पूरे सम्मान और पवित्रता के साथ ही रखना चाहिए। नियम के अनुसार इसे रखने के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा का चुनाव करना चाहिए। घर में पूजा वाली जगह पर कांवड़ का जल रखा जा सकता है। मान्यता है कि ये दिशा देवी-देवताओं को समर्पित है। इसी वजह से यहां पर कांवड़ का जल रखना सबसे शुभ माना जाता है।
जमीन पर ना रखें कांवड़
कांवड़ के जल को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि इसे हमेशा लकड़ी की चौकी पर रखा जाए। साथ ही इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ये लाल या पीले रंग के कपड़े के ऊपर ही रखा जाए। मान्यता है कि इससे जल की पवित्रता बनी रहती है। नियम के अनुसार इस जल को साफ-सफाई वाली जगह पर ही रखना चाहिए। इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि कांवड़ के जल से किसी का भी पैर ना लगे। इसे बाथरूम या फिर बेडरूम के पास वाली जगह पर रखने से भी बचने की कोशिश करनी चाहिए। इसके आसपास लेदर का कोई भी सामान नहीं होना चाहिए।
कांवड़ के जल से ऐसे करें जलाभिषेक
जलाभिषेक करने से पहले स्नान करें। इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें। भगवान शिव का ध्यान करें और जलाभिषेक करें। इस दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप शांत मन से करें। मान्यता है कि शांत मन और श्रद्धा से किया गया जलाभिषेक फलदायी होता है।
ध्यान में रखें ये बातें
- शिवलिंग का जलाभिषेक कभी भी हड़बड़ी में ना करें।
- पूजा के दौरान अपना मन एकदम शांत रखें।
- शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल या फिर चांदी के पात्र का इस्तेमाल करें।
- जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र और धतूरा वगैरह अर्पित करें।







