अयोध्या: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आरोपों और राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। वहीं विपक्ष ने इस जांच पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है। आइए पूरे विश्लेषण को एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते हैं।
मामला कैसे शुरू हुआ ?
7 जून को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की रकम गायब होने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे और अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय का दावा है कि ट्रस्ट के गठन के बाद से वित्तीय अनियमितताओं के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि “पहले जमीन खरीद से जुड़े विवाद सामने आए और बाद में चढ़ावे की रकम की गिनती से जुड़े मुद्दे भी उठे, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।”
पूर्व लेखा प्रभारी के आरोप
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जनवरी 2021 से मई 2022 तक लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह ने चढ़ावे की रकम और दान में मिली कीमती धातुओं की गणना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
महिपाल सिंह का दावा है कि “उन्होंने साप्ताहिक बैठक में कथित गड़बड़ियों की जानकारी दी थी, लेकिन इसके बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। बाद में उन्होंने इस व्यवस्था से स्वयं दूरी बना ली।
जब एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा ने उनसे बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने जान का खतरा बताते हुए विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और वे अत्यधिक दबाव में हैं।
क्या है ट्रस्ट का पक्ष !
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि “ट्रस्ट की सभी वित्तीय गतिविधियों का नियमित ऑडिट कराया जाता है। दान पेटियों (हुंडी) की गणना प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की भागीदारी रहती है। उनके अनुसार अब तक किसी भी प्रकार की उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई है।”
हालांकि प्रकाश मेहरा द्वारा चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से संपर्क करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन उनकी ओर से कोई अतिरिक्त प्रतिक्रिया नहीं मिली।
सरकार ने SIT क्यों बनाई?
अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा को बताया कि “चढ़ावे को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और तथ्यों की पुष्टि के बाद पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।”
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया है। इस टीम में आईएएस विजय विश्वास पंत। आईपीएस किरण एस।वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन। को शामिल किया गया है। यह टीम अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू कर चुकी है और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
विपक्ष को SIT पर क्यों है आपत्ति?
समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद समेत विपक्षी नेताओं का कहना है कि “मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित विशेष समिति से कराई जानी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि “केवल सरकारी SIT से निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह बना रहेगा।”
भाजपा नेताओं के भी अलग-अलग सुर
इस विवाद ने भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने ला दी हैं। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे विनय कटियार ने आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं भाजपा सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “वे इस विषय पर पूरी बात फिलहाल नहीं कह सकते क्योंकि इसमें “बहुत बड़े लोग” शामिल हैं।
दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि “समाजवादी पार्टी को इस मुद्दे पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उठे हुए सवाल गंभीर हैं और जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए।
भाजपा नेता रजनीश सिंह ने क्या मांग की?
स्थानीय भाजपा नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग की है। उन्होंने कुछ व्यक्तियों की संपत्तियों और उनकी वित्तीय गतिविधियों की भी जांच कराने की मांग उठाई है।
फिलहाल पूरे मामले का केंद्र बिंदु SIT जांच है। आरोप गंभीर हैं, लेकिन अभी तक किसी भी जांच एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर किसी वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चढ़ावे की रकम में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या नहीं। वहीं करोड़ों रामभक्तों और देशभर के लोगों की निगाहें अब SIT की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।







