प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
पुणे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार” प्रदान किया गया। पुणे में आयोजित सम्मान समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति तथा रणनीतिक निर्णयों में उनके योगदान की खुलकर सराहना की। समारोह में अमित शाह ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में सत्ता संभालने के बाद लिया गया पहला महत्वपूर्ण निर्णय अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त करना था और तब से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लगभग हर बड़े फैसले में उनकी सलाह और भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।”
अमित शाह ने डोभाल की भूमिका को बताया निर्णायक
अमित शाह ने कहा कि “तिलक स्मारक ट्रस्ट द्वारा अजीत डोभाल को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना जाना अत्यंत उचित निर्णय है। उन्होंने कहा कि “पिछले एक दशक में भारत की सुरक्षा नीति, आतंकवाद के खिलाफ रणनीति और विदेश नीति को मजबूत बनाने में डोभाल ने पर्दे के पीछे रहकर उल्लेखनीय योगदान दिया है।”
शाह ने कहा कि “राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की कई महत्वपूर्ण सफलताओं के पीछे डोभाल की रणनीतिक सोच और अनुभव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों में डोभाल की सलाह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
लोकमान्य तिलक को श्रद्धांजलि
समारोह के दौरान गृह मंत्री ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि “तिलक केवल स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत की जिसने देश को नई दिशा दी।
अमित शाह ने कहा कि “तिलक का प्रसिद्ध उद्घोष— “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा”— आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारत आज उसी राष्ट्रवादी विचारधारा के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
छत्रपति शिवाजी महाराज का भी किया स्मरण
अपने संबोधन में अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वराज केवल शासन प्राप्त करने का नाम नहीं है, बल्कि अपनी भाषा, अपनी संस्कृति, अपनी परंपरा और अपनी आस्था के संरक्षण का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब ये सभी तत्व एक साथ आते हैं, तभी वास्तविक स्वराज की स्थापना होती है।
सम्मान पाकर भावुक हुए अजीत डोभाल
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अजीत डोभाल भावुक नजर आए। उन्होंने अपने बचपन और पुणे से जुड़े पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि “लगभग 76 वर्ष पहले उनके पिता की सेना में पोस्टिंग के कारण उनका परिवार पुणे आया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा यहीं से शुरू की थी और डेढ़ वर्ष तक इस शहर में रहे।”
डोभाल ने कहा कि “भले ही समय के साथ कई यादें धुंधली हो गई हों, लेकिन दो बातें आज भी उन्हें स्पष्ट रूप से याद हैं। पहली, उनकी मां हर मंगलवार उन्हें चतुर्शृंगी मंदिर लेकर जाती थीं, जहां देवी को चढ़ाया जाने वाला पारंपरिक प्रसाद उन्हें बेहद पसंद था। दूसरी, उनके स्कूल की प्रार्थना सभा, जहां एक शिक्षक ने लोकमान्य तिलक के जीवन और विचारों पर प्रेरणादायक भाषण दिया था।
उन्होंने कहा कि “उसी समय पहली बार उन्होंने लोकमान्य तिलक के व्यक्तित्व और उनके योगदान के बारे में जाना। तब उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि कई दशक बाद उसी पुणे में तिलक के नाम पर स्थापित राष्ट्रीय पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान के लिए मिला सम्मान
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार देश के उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्र निर्माण, सार्वजनिक जीवन, समाज सेवा या राष्ट्रीय हित में असाधारण योगदान दिया हो। अजीत डोभाल को यह सम्मान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने, आतंकवाद विरोधी रणनीतियों, खुफिया तंत्र और विदेश नीति के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए प्रदान किया गया।
समारोह में उपस्थित लोगों ने अजीत डोभाल के सम्मान को देश की सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिक नेतृत्व के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया। गृह मंत्री अमित शाह और अजीत डोभाल दोनों ने अपने संबोधनों में लोकमान्य तिलक के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया।







