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Home राज्य

उत्तराखंड में तीसरे विधान भवन का मामला फंसा, जानिए क्या है मामला?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 14, 2024
in राज्य
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assembly building
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देहरादून : देहरादून में रायपुर में प्रस्तावित नई विधानसभा और सचिवालय का निर्माण खटाई में पड़ गया है। इसके लिए दी गई करीब साठ हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक मंजूरी केंद्र सरकार ने रद्द कर दी है। इसके पीछे मंजूरी की शर्तों का समय पर और ठीक तरह से अनुपालन ना करने को वजह बताया गया है।

राज्य सरकार की रायपुर में थानो रोड पर स्पोर्ट्स कॉलेज के पास नई विधानसभा, सचिवालय, मंत्रियों के आवास और कार्यालय बनाने की योजना है। इसके लिए फरवरी 2014 में सरकार ने रायपुर रेंज की 59.9 हेक्टेयर वन भूमि राज्य संपदा विभाग को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा था।

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जिसके आधार पर केंद्र ने फरवरी 2016 में इसके लिए सैंद्धांतिक मंजूरी दे दी। इसके साथ ही राज्य से फेज वन की विधिवत मंजूरी के लिए सैद्धांतिक मंजूरी की शर्तों के अनुपालन का प्रस्ताव मांगा। लेकिन सरकार की ओर से करीब पांच साल बाद 2022 में इसका प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया। इसका परीक्षण करने पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी पाया कि प्रस्ताव बिना नियत जगह चिन्हित किए भेजा गया है।

प्रस्ताव में देरी और नियत जगह चयन ना होने के आधार पर केंद्र ने 2016 में दी गई लैंड ट्रांसफर की सैद्धांतिक मंजूरी रद्द कर दी। मंजूरी रद्द करने का पत्र एआईजी फॉरेस्ट सुनीत भारद्वाज की ओर से प्रमुख सचिव वन उत्तराखंड और पीसीसीएफ को भेजा गया है।

नए सिरे से भेजना पड़ेगा प्रस्ताव पत्र में ये भी कहा गया है कि इस प्रस्ताव को करीब सात साल का लंबा समय हो गया है। लेकिन इसके लिए सरकार की ओर से किए गए प्रयासों से जाहिर होता है कि सरकार इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर नहीं है। ये भी कहा गया है कि अगर सरकार चाहती है तो दोबारा नए सिरे से फेज वन की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेज सकती है।

पहले से ही दो विधानसभा भवन हैं मौजूद

राज्य में पहले से ही दो विधानसभा भवन मौजूद हैं। एक देहरादून में और दूसरा गैरसैण में। ऐसे में तीसरे विधानसभा भवन के लिए रायपुर में जगह चिह्नित की जा रही थी। इसके अलावा यहां पहले से ही सचिवालय और नेताओं के आवास व कार्यालय मौजूद हैं। इसके बावजूद रायपुर में सचिवालय और नेताओं के बंगले बनाने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है।

निर्माण और जमीन खरीद पर है रोक

रायपुर में विधानसभा और सचिवालय का निर्माण प्रस्तावित होने के कारण वहां मुख्य सड़क के आसपास जमीनों की खरीद व निर्माण पर भी रोक लगाई गई है। जिससे लोगों को भी परेशान हैं। लेकिन जिस प्रस्ताव के लिए ये किया गया अब उसके खटाई में पड़ने से फिलहाल रोक हटने की लोगों में उम्मीद जगी है।

बाउंड्री बनाकर करना था चिह्नित

जो वन भूमि दूसरे विभाग को ट्रांसफर करनी थी उसमें बाउंड्री वाल कर उसे चिह्नित करने का भी काम जल्द ही शुरू किया जाना था। वन विभाग इसकी तैयारी कर रहा था। लेकिन इससे पहले केंद्र ने इसकी लैंड ट्रांसफर अनुमति रद्द कर दी। जिससे अब ये काम भी नहीं हो पाएगा। इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ भी काटे जाने थे। ऐसे में इस अनुमति के रद्द होने के बाद वन विभाग को इसकी भी राहत मिलेगी। वहीं ये क्षेत्र हाथी बहुल होने के कारण वहां हाथियों से सुरक्षा को लेकर भी काम जल्द शुरू होना था।

गैर वन क्षेत्र तलाशने की भी सलाह

केंद्र ने ये भी सलाह दी है कि सरकार को इस प्रस्ताव के लिए गैर वनों वाला क्षेत्र चिह्नित करना चाहिए। ताकि वहां इस तरह की सुविधाएं विकसित की जा सके। इससे वनों की हानि से भी बचा जा सकेगा।

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