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Home धर्म

बेटियों को पैर क्यों नहीं छूने दिया जाता है? जानिए इसके पीछे का कारण

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 27, 2026
in धर्म
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पैर कब नहीं छूने चाहिए
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नई दिल्ली। हिंदू परिवारों में पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा बहुत पुरानी और गहरी है। बड़ों के पैर छूना सम्मान, श्रद्धा और आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इसी परंपरा में एक खास नियम है – बेटियों को पैर नहीं छूने दिया जाता है। कई परिवारों में यह नियम आज भी सख्ती से निभाया जाता है। यह नियम केवल रिवाज नहीं है, बल्कि इसके पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कारण छिपे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि हिंदू धर्म में बेटियों को पैर छूने से क्यों रोका जाता है।

बेटी को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है

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हिंदू धर्म में बेटी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। लक्ष्मी जी धन, समृद्धि, सौभाग्य और सुख की देवी हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि बेटी घर में लक्ष्मी का आगमन है। जब बेटी पैदा होती है, तो परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इसी वजह से बेटी के पैर छूना या उसके सामने झुकना शास्त्रों में वर्जित माना गया है। पैर छूने से लक्ष्मी के प्रति अवमानना होती है और घर की समृद्धि पर असर पड़ सकता है। इसलिए बेटी के पैर छूने की बजाय उसे आशीर्वाद देने की परंपरा है।

बेटी का स्थान मां के समान होता है

हिंदू धर्म में बेटी को मां के समान माना जाता है। मां के पैर छूने की परंपरा नहीं होती, क्योंकि मां स्वयं आशीर्वाद देने वाली होती है। ठीक उसी तरह बेटी भी घर की मां का रूप होती है। जब बेटी पैदा होती है तो वह घर की लक्ष्मी और मां दोनों का प्रतीक बन जाती है। बेटी के पैर छूने से यह भाव आता है कि आप मां के पैर छू रहे हैं, जो शास्त्रों में अनुचित माना जाता है। इसलिए बेटी के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करना या आशीर्वाद लेना उचित होता है, पैर छूना नहीं।

बेटी के पैर छूने से सौभाग्य पर असर पड़ सकता है

कई पुरानी मान्यताओं और लोक परंपराओं में कहा जाता है कि बेटी के पैर छूने से सौभाग्य कम हो सकता है। बेटी को सौभाग्य की देवी माना जाता है। उसके पैर छूने से सौभाग्य का ह्रास होने की आशंका मानी जाती है। खासकर अविवाहित लड़कियों या बेटियों के पैर छूने से उनके विवाह में रुकावट या सौभाग्य पर प्रभाव पड़ने की मान्यता है। इसलिए परिवार के बड़े बेटी के पैर छूने से बचते हैं और उसे आशीर्वाद देते हैं। यह परंपरा बेटी के सम्मान और उसके सौभाग्य की रक्षा के लिए है।

बेटी के पैर छूने की बजाय क्या करना चाहिए

हिंदू परंपरा में बेटी के पैर छूने की जगह उसे आशीर्वाद देने की प्रथा है। जब बेटी घर में आती है या किसी शुभ अवसर पर मिलती है, तो बड़े लोग उसे आशीर्वाद देते हैं, सिर पर हाथ फेरते हैं या हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं। इससे बेटी का सम्मान बढ़ता है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। यह नियम बेटी को घर की लक्ष्मी के रूप में स्थापित करता है और उसके प्रति आदर का भाव बनाए रखता है।

यह परंपरा बेटी के सम्मान, सौभाग्य की रक्षा और परिवार में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए है। बेटी को पैर छूने से रोकना उसकी गरिमा और महत्व को दर्शाता है। आज के समय में भी यह परंपरा कई परिवारों में जीवित है और बेटी को लक्ष्मी का दर्जा देने का प्रतीक बनी हुई है।

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