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Home राज्य

किताब मांगने पहुंची छात्राएं, CEO बोले – पढ़ने आती हो या राजनीति करने..!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 29, 2026
in राज्य, विशेष
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The CEO said, "Do you come here to study or to play politics?"
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विकाश शुक्ला


उमरिया (मध्य प्रदेश)। शासकीय कन्या शिक्षा परिसर में किताबों के इंतजार में छात्राओं की पढ़ाई अटकी है। आधा सत्र गुजरने के बाद भी किताबें नहीं मिलने की शिकायत लेकर छात्राएं पहले परिसर में धरने पर बैठीं, अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी और जब समाधान नहीं हुआ तो जिला मुख्यालय की जनसुनवाई तक पहुंच गईं। यहां छात्राओं के मुताबिक उनकी समस्या सुनने के दौरान जिला पंचायत CEO ने तेज आवाज में उनसे कहा- “तुम लोग पढ़ने आते हो या राजनीति करने।” किताब मांग रही छात्राओं को मिले इस कथित जवाब के बाद सिस्टम पर बड़े प्रश्न चिन्ह उठ रहे हैं।

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The CEO said, "Do you come here to study or to play politics?"

छात्राओं का कहना है कि वे किसी राजनीतिक गतिविधि के लिए नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई के लिए किताबें मांग रही हैं। परीक्षाएं नजदीक हैं, और अब तक पाठ्यक्रम की पुस्तकें नहीं मिलने से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है।

धरने पर बैठीं तो जेल और टीसी की धमकी का आरोप 

किताबों की समस्या को लेकर छात्राएं परिसर में अनशन पर बैठीं। उन्होंने कलेक्टर को समस्या बताने की बात कही। छात्राओं के अनुसार, मौके पर AC और SDM पहुंचीं, जिन्हें उन्होंने किताबों से जुड़ी समस्या बताई। अधिकारियों की ओर से कलेक्टर को अवगत कराने और समस्या के जल्द निराकरण का आश्वासन मिलने की बात छात्राएं कहती हैं। लेकिन समाधान नहीं होने पर छात्राएं दूसरे दिन भी धरने पर बैठीं। छात्राओं का आरोप है, कि इस दौरान SDM मैडम ने उन्हें राजनीति करने वाला बताते हुए जेल भिजवाने और टीसी देने की बात कही। छात्राओं के मुताबिक उनसे यह भी कहा गया कि वे पढ़ने के लायक नहीं हैं।

जनसुनवाई में भी किताबों की बात पर मिला ‘राजनीति’ का तंज 

मंगलवार को कुछ छात्राएं जिला मुख्यालय पहुंचीं और कलेक्टर को आवेदन देने के लिए जनसुनवाई में पहुंचीं। वहां जिला पंचायत CEO मौजूद थे। छात्राओं ने उन्हें किताबें नहीं मिलने की समस्या बताई। छात्राओं का आरोप है कि समस्या सुनने के दौरान CEO ने तेज आवाज में कहा- “तुम लोग पढ़ने आते हो या राजनीति करने।”

जनसुनवाई में अपनी पढ़ाई से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंची छात्राओं के साथ इस तरह की कथित टिप्पणी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। छात्राओं का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों के सामने किताब उपलब्ध कराने की मांग कर रही हैं, लेकिन उनकी मूल समस्या पर कार्रवाई के बजाय उन्हें राजनीति करने वाला बताया जा रहा है।

छात्राओं की पढ़ाई, किताबों की उपलब्धता पर उलझन 

छात्राओं के मुताबिक परिसर में सैकड़ों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उनका कहना है कि आधा सत्र निकल चुका है, लेकिन किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। वहीं विद्यालय में सिलेबस बदलने की बात भी कही जा रही है।

छात्राओं ने पाली में कई दुकानों पर किताबें तलाशने की बात कही, लेकिन उनके अनुसार वहां भी संबंधित किताबें नहीं मिल रही हैं। ऐसे में छात्राओं के सामने पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा है।

छात्राओं का यह भी आरोप है कि विद्यालय में किताबें आ चुकी हैं, लेकिन उन्हें वितरित नहीं किया जा रहा। वहीं किताबों की राशि को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आने की बात कही गई है। छात्राओं के मुताबिक उन्हें बताया गया कि तत्कालीन प्राचार्य सरिता जैन पैसे लेकर चली गईं, जबकि पूर्व प्राचार्य सरिता गुप्ता की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि उनका पैसा नहीं आया है।
छात्राओं ने सरिता गुप्ता और आकाश नामक व्यक्ति पर उन्हें भड़काने का आरोप भी लगाया है।

पढ़ाई की किताबों के बीच आरोपों का खेल, छात्राएं समाधान की राह में 

पूरा मामला अब किताबों की उपलब्धता से आगे बढ़कर जिम्मेदारी और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। छात्राओं का कहना है, कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी चाहिए कि किताबें आई हैं या नहीं, यदि आई हैं तो उनका वितरण क्यों नहीं हुआ और यदि नहीं आईं तो सत्र के बीच तक इसकी वजह क्या है। परीक्षाओं का दौर नजदीक है। ऐसे में छात्राओं की मांग सीधी है कि उन्हें राजनीति के आरोप नहीं, पढ़ने के लिए किताबें चाहिए।

अधिकारी का कहना

पहले भी कुछ समस्याएं सामने आई थीं और छात्रों की शिकायत पर ही प्राचार्य को हटाया गया था। वर्तमान में छात्र पुस्तक को लेकर जनसुनवाई में आए थे। मामले को दिखवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
– पूजा द्विवेदी, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग उमरिया

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